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बाढ़ पीड़ितों का मुआवजे के लिए प्रदर्शन
Updated Tue, 12 Sep 2017 10:07 PM IST
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शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। बाढ़ में हुई क्षति का मुआवजा न मिलने से क्षुब्ध जोगिया के बैदौली के ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। नारेबाजी की और एसडीएम को ज्ञापन देकर समस्या के समाधान की मांग की।
ग्रामीणों का कहना था कि जीतपुर बांध टूटने से गांव की हजारों बीघा फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। पानी भरने से खेतों में गड्ढा बन गया है। बांध की मरम्मत अब तक नहीं हुई है। बाढ़ के कारण कई लोगों का मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया। लोग बांस-बल्ली के सहारे पन्नी तानकर खानाबदोशों की तरह जीवनयापन करने को मजबूर हैं। बाढ़ समाप्त होने के बाद भी प्रशासन की ओर से पीड़ितों को कोई सरकारी मदद नहीं मिली। इससे लोगों की स्थिति दयनीय हो गई है। जल्द ही सरकार से मदद नहीं मिली तो दो जून के रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। बाढ़ ने पहले ही गांव के लोगों का सब कुछ छीन लिया। अब प्रशासन व शासन की ओर से सरकारी मदद में हो रही देरी से जीविकोपार्जन कठिन हो गया है। इस संबंध में एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि बाढ़ में फसलों के नुकसान का सर्वे होना है। सर्वे के आधार पर पीड़ित किसानों को सरकारी मदद दी जाएगी। इस दौरान अच्छेलाल, सोहराब, सीताराम, बुझारत, शंभू, मुबारक अली, शेरुल्लाह, गुलाम हुसैन, मोल्हू, बब्बन, सोबराती और खैरुन्निशा आदि शामिल थे।
बाढ़ में टूटे अरमान, फसल डूबी ढहे मकान
शोहरतगढ़। तहसील क्षेत्र के जोगिया ब्लाक में बैदोली गांव के लोग पिछले कई सालों से बानगंगा नदी की कहर से अपना सब कुछ गांव बैठे है। हर साल बाढ़ के कारण बैदोली गांव में करीब दो दर्जन लोगों का घर नदी में समा गया। शासलन-प्रशासन से मदद की गुहार के बाद भी ग्रामीणों को कुछ नहीं मिला। इस गांव के लोग नदी के पूरब अपने खेतों में घर बनाकर जीवनयापन करने लगे, लेकिन बानगंगा नदी के कहर से गांव वालों का पीछा नहीं छूटा। 650 की आबादी वाले इस गांव में कुल 275 घर हैं। 14 अगस्त को आई बूढी राप्ती नदी में बाढ़ से जीतपुर बांध टूट गया। इससे बैदोली गांव के साथ दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर गया। हजारों एकड़ खेत जलमग्न हो गए और पानी ठहरने के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। ग्रामवासी अच्छेलाल, सीताराम, मोल्हू ने बताया कि जीतपुर बांध कटने से खेतों में लगी फसल बर्बाद हो गई। खेत भी तालाब में तब्दील हो गया था। फसल चौपट होने से अब खाने की भी लाले पड़ गए हैं। गांव के मोहम्मद गुलाम, मुबारक, जगदीश, फूलचंद, अकरम ने बताया कि शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण ही हम लोग पिछले कई दशकों से बाढ़ का दंश झेलते आ रहे है। इस बार आई भयंकर बाढ़ ने अरमानों पर पानी दिया। गांव में आने-जाने के सभी रास्ते अवरुद्ध हैं। जीतपुर बांध कटने और गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर जखवलिया के पास बना पुल ढहने से वाहनों का गांव में प्रवेश पूर्ण रुप से बंद है। फसल बर्बाद होने से लोगों के सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। लोग अपने बेटी-बेटियों के शादी-विवाह कैसे निपटाएंगे, यह सोच कर परेशान हैं।
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ग्रामीणों का कहना था कि जीतपुर बांध टूटने से गांव की हजारों बीघा फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। पानी भरने से खेतों में गड्ढा बन गया है। बांध की मरम्मत अब तक नहीं हुई है। बाढ़ के कारण कई लोगों का मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया। लोग बांस-बल्ली के सहारे पन्नी तानकर खानाबदोशों की तरह जीवनयापन करने को मजबूर हैं। बाढ़ समाप्त होने के बाद भी प्रशासन की ओर से पीड़ितों को कोई सरकारी मदद नहीं मिली। इससे लोगों की स्थिति दयनीय हो गई है। जल्द ही सरकार से मदद नहीं मिली तो दो जून के रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। बाढ़ ने पहले ही गांव के लोगों का सब कुछ छीन लिया। अब प्रशासन व शासन की ओर से सरकारी मदद में हो रही देरी से जीविकोपार्जन कठिन हो गया है। इस संबंध में एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि बाढ़ में फसलों के नुकसान का सर्वे होना है। सर्वे के आधार पर पीड़ित किसानों को सरकारी मदद दी जाएगी। इस दौरान अच्छेलाल, सोहराब, सीताराम, बुझारत, शंभू, मुबारक अली, शेरुल्लाह, गुलाम हुसैन, मोल्हू, बब्बन, सोबराती और खैरुन्निशा आदि शामिल थे।
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बाढ़ में टूटे अरमान, फसल डूबी ढहे मकान
शोहरतगढ़। तहसील क्षेत्र के जोगिया ब्लाक में बैदोली गांव के लोग पिछले कई सालों से बानगंगा नदी की कहर से अपना सब कुछ गांव बैठे है। हर साल बाढ़ के कारण बैदोली गांव में करीब दो दर्जन लोगों का घर नदी में समा गया। शासलन-प्रशासन से मदद की गुहार के बाद भी ग्रामीणों को कुछ नहीं मिला। इस गांव के लोग नदी के पूरब अपने खेतों में घर बनाकर जीवनयापन करने लगे, लेकिन बानगंगा नदी के कहर से गांव वालों का पीछा नहीं छूटा। 650 की आबादी वाले इस गांव में कुल 275 घर हैं। 14 अगस्त को आई बूढी राप्ती नदी में बाढ़ से जीतपुर बांध टूट गया। इससे बैदोली गांव के साथ दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर गया। हजारों एकड़ खेत जलमग्न हो गए और पानी ठहरने के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। ग्रामवासी अच्छेलाल, सीताराम, मोल्हू ने बताया कि जीतपुर बांध कटने से खेतों में लगी फसल बर्बाद हो गई। खेत भी तालाब में तब्दील हो गया था। फसल चौपट होने से अब खाने की भी लाले पड़ गए हैं। गांव के मोहम्मद गुलाम, मुबारक, जगदीश, फूलचंद, अकरम ने बताया कि शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण ही हम लोग पिछले कई दशकों से बाढ़ का दंश झेलते आ रहे है। इस बार आई भयंकर बाढ़ ने अरमानों पर पानी दिया। गांव में आने-जाने के सभी रास्ते अवरुद्ध हैं। जीतपुर बांध कटने और गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर जखवलिया के पास बना पुल ढहने से वाहनों का गांव में प्रवेश पूर्ण रुप से बंद है। फसल बर्बाद होने से लोगों के सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। लोग अपने बेटी-बेटियों के शादी-विवाह कैसे निपटाएंगे, यह सोच कर परेशान हैं।
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