{"_id":"5ceec170bdec22075d23a8e0","slug":"15591510083-siddharthnagar-news41","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत-नेपाल की संयुक्त टीम ने किया महली सागर क्षेत्र का सर्वे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत-नेपाल की संयुक्त टीम ने किया महली सागर क्षेत्र का सर्वे
Wed, 29 May 2019 11:22 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
siddharthnagar
siddharthnagar
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 May 2019 11:22 PM IST
विज्ञापन
भारत व नेपाल की सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने महली सागर क्षेत्र में सर्वे किया।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से सटे जमींदारी नहर प्रणाली के महली सागर परिक्षेत्र में निर्माणाधीन पुल पर नेपाल सरकार की तरफ से आपत्ति लगा दी गई थी। इसके चलते 14 वर्ष से पुल का निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है। इस बीच पुुल निर्माण फिर से शुरू कराने के लिए भारत व नेपाल की सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने रविवार से बुधवार तक क्षेत्र में सर्वे किया। सर्वे रिपोर्ट दोनों देशों के उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। उसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने के संबंध में विचार-विमर्श किया जाएगा।
नेपाल की टीम की अगुवाई मुकेश पाठक ने की जबकि भारत की तरफ से ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के सहायक अभियंता मनोज कुमार रायजादा, अवर अभियंता एमटी राय व अभिजीत सिंह टीम में शामिल थे। जानकारी के अनुसार वर्ष 2005 में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित महली सागर के भारतीय क्षेत्र में ड्रेनेज खंड की ओर से 15 स्पान 2 मीटर की लंबाई में पुल का निर्माण शुरू किया गया। इसके कुछ समय बाद नेपाल सरकार ने निर्माण कार्य पर यह कहते हुए आपत्ति जता दी कि पुल बनने के बाद नेपाल के कपिलवस्तु क्षेत्र में बाढ़ आ सकती है। बाढ़ आने की दशा में नेपाल के रंगपुर, परसोहिया, मर्यादपुर, करमहवा समेत आसपास के कई अन्य गांव जलमग्न हो जाएंगे। पुल की ऊंचाई कम करने की बात भी कही गई। नेपाल सरकार की आपत्ति के बाद इन 14 वर्षों के दौरान कई बार दोनों देशों की संयुक्त टीम ने सर्वे किया लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। इस बीच बीते रविवार से बुधवार तक दोनों देशों की सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने एक बार क्षेत्र में सर्वे किया। बताया गया कि सर्वे रिपोर्ट जल्द ही दोनों देशों के उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। नेपाल की सरकार ने सर्वे रिपोर्ट के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया तो पुल निर्माण को गति मिल सकती है।
विज्ञापन
नेपाल की टीम की अगुवाई मुकेश पाठक ने की जबकि भारत की तरफ से ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के सहायक अभियंता मनोज कुमार रायजादा, अवर अभियंता एमटी राय व अभिजीत सिंह टीम में शामिल थे। जानकारी के अनुसार वर्ष 2005 में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित महली सागर के भारतीय क्षेत्र में ड्रेनेज खंड की ओर से 15 स्पान 2 मीटर की लंबाई में पुल का निर्माण शुरू किया गया। इसके कुछ समय बाद नेपाल सरकार ने निर्माण कार्य पर यह कहते हुए आपत्ति जता दी कि पुल बनने के बाद नेपाल के कपिलवस्तु क्षेत्र में बाढ़ आ सकती है। बाढ़ आने की दशा में नेपाल के रंगपुर, परसोहिया, मर्यादपुर, करमहवा समेत आसपास के कई अन्य गांव जलमग्न हो जाएंगे। पुल की ऊंचाई कम करने की बात भी कही गई। नेपाल सरकार की आपत्ति के बाद इन 14 वर्षों के दौरान कई बार दोनों देशों की संयुक्त टीम ने सर्वे किया लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। इस बीच बीते रविवार से बुधवार तक दोनों देशों की सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने एक बार क्षेत्र में सर्वे किया। बताया गया कि सर्वे रिपोर्ट जल्द ही दोनों देशों के उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। नेपाल की सरकार ने सर्वे रिपोर्ट के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया तो पुल निर्माण को गति मिल सकती है।
विज्ञापन