{"_id":"5ce81eb1bdec2207657ba1e8","slug":"15587161316-siddharthnagar-news82","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा के ‘चक्रव्यूह’ में फंस गया विपक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा के ‘चक्रव्यूह’ में फंस गया विपक्ष
Fri, 24 May 2019 10:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 May 2019 10:36 PM IST
विज्ञापन
भाजपा
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। मोदी मैजिक का असर, केंद्र सरकार का सुशासन और योगी की मेहनत का असर यह रहा है कि भाजपा के हर चक्रव्यूह में विपक्षी फंसते चले गए। मोदी मैजिक के आगे जातीयता की दीवार भी दरक गई। यही कारण है कि भाजपा को इस बार पिछले साल की तुलना में 18 प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं।
इस बार भाजपा प्रत्याशी जगदंबिका पाल को 49.96 प्रतिशत मत मिले हैं। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में 31.96 प्रतिशत मत मिले थे। इतना ही नहीं, सबसे अहम बात यह रही है कि 31.96 प्रतिशत मत पाकर जगदंबिका पाल एक लाख मतों से विजेता बने थे। जबकि इस बार 39.27 प्रतिशत मत पाकर भी हार गए। डुमरियागंज संसदीय सीट पर पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई प्रत्याशी 39 प्रतिशत मत पाकर भी हार गया है। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा के मतों को जोड़ दें, तो उनके वोट प्रतिशत में 0.30 प्रतिशत कम मत पड़े है। खास बात यह रही है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पीस पार्टी ने कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10.61 प्रतिशत मत पाया था। लेकिन इस बार 0.59 पर सिमटकर रह गया है। जबकि कांग्रेस पिछली बार की त़ुलना में इस बार 3.27 प्रतिशत मत कम मिले हैं। पिछली बार कांग्रेस को 9.42 प्रतिशत मत मिले थे।
योगी फैक्टर आया काम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिले से खास लगाव है। यही कारण है कि उन्होंने जिले में सांसद जगदंबिका पाल के समर्थन में तीन जनसभाएं कीं। उनकी सबसे अहम सभा इटवा विधानसभा के कठेला में रही। जहां पर भाजपा हर लोकसभा चुनाव में दूसरे और तीसरे नंबर पर रहती थी। यह विधानसभा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय का है। यहां से पूर्व सांसद मो. मुकीम भी आते हैं। इसके बाद भी इस बार योगी की सभा ने ऐसी रंगत लाई कि यहां से भाजपा गठबंधन प्रत्याशी से 10 हजार वोट अधिक पाई। इसके अलावा बांसी विधानसभा के खेसरहा में सभा कर एक लाख से ज्यादा वोट भाजपा प्रत्याशी को दिलाया।
विज्ञापन
नहीं काम आया मुस्लिम-यादव-दलित फैक्टर
जातिगत आंकड़ों की बात करें तो डुमरियागंज लोकसभा में सबसे अधिक मुस्लिम और ब्राह्मण चेहरे है। इसके बाद दलित, यादव और ओबीसी की संख्या सबसे अधिक बताई जाती है। इन्हीं मतों के समीकरण को साध कर गठबंधन ने बसपा से मुस्लिम चेहरा आफताब आलम को प्रत्याशी बनाया था। इसका असर यह हुआ कि मुस्लिम मतदाताओं ने जबरदस्त मतदान किया। लेकिन यादव और दलित वोटरों में भाजपा ने जबरदस्त सेंधमारी की। इसकी बदौलत भाजपा को 49.96 प्रतिशत वोट मिले।
विज्ञापन
इस बार भाजपा प्रत्याशी जगदंबिका पाल को 49.96 प्रतिशत मत मिले हैं। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में 31.96 प्रतिशत मत मिले थे। इतना ही नहीं, सबसे अहम बात यह रही है कि 31.96 प्रतिशत मत पाकर जगदंबिका पाल एक लाख मतों से विजेता बने थे। जबकि इस बार 39.27 प्रतिशत मत पाकर भी हार गए। डुमरियागंज संसदीय सीट पर पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई प्रत्याशी 39 प्रतिशत मत पाकर भी हार गया है। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा के मतों को जोड़ दें, तो उनके वोट प्रतिशत में 0.30 प्रतिशत कम मत पड़े है। खास बात यह रही है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पीस पार्टी ने कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10.61 प्रतिशत मत पाया था। लेकिन इस बार 0.59 पर सिमटकर रह गया है। जबकि कांग्रेस पिछली बार की त़ुलना में इस बार 3.27 प्रतिशत मत कम मिले हैं। पिछली बार कांग्रेस को 9.42 प्रतिशत मत मिले थे।
विज्ञापन
योगी फैक्टर आया काम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिले से खास लगाव है। यही कारण है कि उन्होंने जिले में सांसद जगदंबिका पाल के समर्थन में तीन जनसभाएं कीं। उनकी सबसे अहम सभा इटवा विधानसभा के कठेला में रही। जहां पर भाजपा हर लोकसभा चुनाव में दूसरे और तीसरे नंबर पर रहती थी। यह विधानसभा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय का है। यहां से पूर्व सांसद मो. मुकीम भी आते हैं। इसके बाद भी इस बार योगी की सभा ने ऐसी रंगत लाई कि यहां से भाजपा गठबंधन प्रत्याशी से 10 हजार वोट अधिक पाई। इसके अलावा बांसी विधानसभा के खेसरहा में सभा कर एक लाख से ज्यादा वोट भाजपा प्रत्याशी को दिलाया।
विज्ञापन
नहीं काम आया मुस्लिम-यादव-दलित फैक्टर
जातिगत आंकड़ों की बात करें तो डुमरियागंज लोकसभा में सबसे अधिक मुस्लिम और ब्राह्मण चेहरे है। इसके बाद दलित, यादव और ओबीसी की संख्या सबसे अधिक बताई जाती है। इन्हीं मतों के समीकरण को साध कर गठबंधन ने बसपा से मुस्लिम चेहरा आफताब आलम को प्रत्याशी बनाया था। इसका असर यह हुआ कि मुस्लिम मतदाताओं ने जबरदस्त मतदान किया। लेकिन यादव और दलित वोटरों में भाजपा ने जबरदस्त सेंधमारी की। इसकी बदौलत भाजपा को 49.96 प्रतिशत वोट मिले।