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विवि परीक्षा में उड़ाका दल खत्म हुआ, निगरानी बढ़ी

Mon, 25 Feb 2019 10:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 Feb 2019 10:54 PM IST
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विवि परीक्षा में उड़ाका दल खत्म हुआ, निगरानी बढ़ी
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विवि परीक्षा में उड़ाका दल खत्म, निगरानी बढ़ी
जनपदों में नोडल अधिकारियों के जरिए रखी जा रही नजर
पहली बार सभी परीक्षा केंद्रों पर जमा हो रहीं उत्तर पुस्तिकाएं
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में पहली बार सामूहिक नकल और अनियमितता की शिकायतें अब तक नहीं सामने आई हैं। इस बार की परीक्षा में उड़ाका दल की व्यवस्था खत्म की गई, पर उससे ज्यादा निगरानी बढ़ी है। इसके पीछे परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में तय मानक का पालन किया जाना प्रमुख कारण है। ये बातें सिद्धार्थ विवि के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र दुबे ने कहीं। वह सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय में परीक्षा के दौरान निरीक्षण बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
आगे कहा कि विवि की शुरू परीक्षा के तीसरे दिन तक किसी भी केंद्र से कोई शिकायत नहीं प्राप्त हुई है। प्रेक्षक, सेक्टर व स्टेटिक मजिस्ट्रेटों के जरिए परीक्षा संतोषजनक, निष्पक्ष व नकलविहीन हो रही है। लगभग बीस वर्षों से नकल में लिप्त महाविद्यालयों में रचनात्मक सुधार आया है। तय मानक के अनुसार परीक्षा केंद्र का निर्धारण किया गया। किसी की सिफारिश नहीं सुनी गई। इस बार की परीक्षा में दो नए प्रयोग किए गए। उड़ाका दल की व्यवस्था समाप्त कर दी गई, पर निगरानी उससे ज्यादा बढ़ाने का कार्य हुआ। हर जिले में सात से आठ सदस्यों को पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में संबंधित महाविद्यालयों में परीक्षा के दौरान पैनी नजर रखी जा रही है। इसके अलावा पहली बार महाविद्यालयों को उत्तर पुस्तिका जमा करने के लिए नोडल केंद्रों पर जाने की जहमत से दूर किया गया है। कोरियर एजेंसी के जरिए महाविद्यालयों पर उत्तरपुस्तिका एकत्र कराने का कार्य कराया जा रहा है।
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नए शिक्षा सत्र में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगी पढ़ाई
सिद्धार्थ विवि कपिलवस्तु के कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र दुबे ने बताया कि नए शिक्षा सत्र में शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही अन्य बिंदुओं पर ठोस निर्णय लिया गया है। समय से प्रवेश व पढ़ाई होने के साथ ही सत्र प्रारंभ होने से पहले शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए जिम्मेदारों को कड़े निर्देेश दिए गए हैं। इसके अलावा परीक्षा सत्र के बाद सामान्य दिनों में महाविद्यालयों में पढ़ाई के दौरान हर कमरों में सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता रखने की भी हिदायत दी गई है। हर 15 दिन पर फुटेज निकाल कर सच्चाई परखी जाएगी।
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1130 ने छोड़ दी परीक्षा
कपिलवस्तु। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु की ओर से संचालित परीक्षा में विश्वविद्यालय परिसर सहित छह जिलों के 70 केंद्र पर हुई परीक्षा में 1133 परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।
बता दें कि विश्वविद्यालय द्वारा सिद्धार्थनगर, बस्ती, महराजगंज, संतकबीरनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती में परीक्षा हो रही है। सोमवार को प्रथम पाली में विश्वविद्यालय को भेजे गए लगभग 70 कॉलेजों की रिपोर्ट के अनुसार अनुमानित 20647 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। जबकि कड़ाई के चलते 1130 छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी कड़े निर्देशों के बावजूद परीक्षा केंद्र विश्वविद्यालय को डाटा नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। इससे विश्वविद्यालय को डाटा शासन को भेजने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार बहुत से केंद्र डाटा भेजने में लापरवाही बरत रहे हैं। 22 फरवरी से शुरू हुई इस मुख्य परीक्षा में अभी तक एक भी परीक्षार्थी अनुचित साधनों के साथ नहीं पकड़ा गया है। जो विश्वविद्यालय के लिए एक अच्छी उपलब्धि है।
निरीक्षण में खुली नकलविहीन परीक्षा की पोल
नगर के बाल शिक्षा सदन कन्या इंटर कॉलेज में इमला बोलकर नकल कराते हुए सचल दस्ते ने पकड़ा
रजिस्टर मांगे जाने पर अभद्र व्यवहार करने का भी है आरोप
बीएसए ने डीआईओएस को पत्र भेज की कार्रवाई की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित बोर्ड की परीक्षा में नकलविहीन परीक्षा की पोल उस वक्त खुल गई। जब बीएसए के दस्ते के सामने इमला बोलकर नकल कराते हुए कक्ष निरीक्षक मिले। यहां तक की रजिस्टर मांगें जाने पर टीम से अभद्र व्यवहार तक किया गया। मामला नगर के बाल शिक्षा सदन कन्या इंटर कॉलेज की है। इस मामले में बीएसए ने डीआईओएस को पत्र भेजकर कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

बीएसए राम सिंह की नेतृत्व में गठित सचल दस्ते की टीम 22 फरवरी को दूसरी में पाली में इंटरमीडिएट की परीक्षा में भौतिक विज्ञान की परीक्षा में टीम नगर के बाल शिक्षा सदन कन्या इंटर कॉलेज में पहुंची। बीएसए के रामसिंह के मुताबिक निरीक्षण में कक्ष संख्या एक, दो और तीन में बोलकर नकल कराते हुए कक्ष निरीक्षक मिले। साथ ही बच्चों की कॉपी देखे जाने पर बहु विकल्पीय प्रश्नों के उत्तर पेंसिल से भरे हुए पाए गए। साथ ही परिचय पत्र पर गलत डाटा अंकित पाया गया, जो परीक्षा नियम के विरुद्ध था। नकल कराने में संलिप्त पाए जाने पर तीनों कक्ष निरीक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया गया। शिक्षकों से संबंधित रजिस्टर मांगे जाने पर कमरे के बंद होने के बारे में बताया गया। उनका कहना था कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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