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मातृ एवं शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए उठाएं ठोस कदम
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श्रावस्ती। कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार शाम जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता डीएम ने की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को संस्थागत प्रसव बढ़ाने, मरीजों को सभी सुविधाएं समय से मुहैया कराने व मात्र एवं शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी नेहा प्रकाश ने कहा कि जिले में मातृ एंव शिशु मृत्यु दर अन्य जिलों की तुलना में अधिक है, जो चिंता का विषय है। इस पर रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाए जाएं। एएनएम और आशा गांव में स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन की मुख्य धुरी हैं। इसलिए सभी प्रभारी चिकित्साधिकारी एएनएम व आशा के कार्यों की समीक्षा करें। लापरवाही बरतने पर संबंधित लोगों को दंडित भी किया जाए। आरसीएच पोर्टल पर गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं का पंजीकरण/अपडेशन शत-प्रतिशत किया जाए। यदि अपडेशन में लापरवाही बरतने वालें पर कार्रवाई की जाए।
जिले की प्रत्येक गर्भवती महिला, नवजात शिशु को सूचीबद्ध करने के साथ उन्हें समय से टीका भी लगाया जाए। साथ ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराकर समय से इलाज मुहैया कराकर स्वस्थ बनाया जाए। यदि भविष्य में कोई भी मातृ एव शिशु की प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान या प्रसव के बाद मृत्यु होती है तो संबंधित प्रभारी चिकित्साधिकारियों को इसका कारण स्पष्ट करना होगा। प्रभारी चिकित्साधिकारियों को संस्थागत प्रसवों का सत्यापन स्वयं करने, ग्रामवार जनसंख्या के आधार पर प्रजनन दर क्या है और उसके सापेक्ष हुए प्रसवों की संख्या क्या है इसकी रिपोर्ट तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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टीकाकरण की समीक्षा में कई क्षेत्रों में डियू लिस्ट ढंग से न बनाने पर संबंधितों को फटकार भी लगाई। साथ ही परिवार नियोजन पर बल देने, पुरुष व महिला नसबंदी बढ़ाने, एनआरसी में अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उन्हें स्वस्थ बनाने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना, जननी सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना एवं हाई रिस्क गर्भवती की पहचान सहित अन्य कार्यक्रमों की समीक्षा की। बैठक में सीडीओ ईशान प्रताप सिंह, सीएमओ डॉ. एपी भार्गव, एसीएमओ डॉ. मुकेश मातनहेलिया, डॉ. उदयनाथ, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी अभय प्रताप सहित सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।
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बैठक में जिलाधिकारी नेहा प्रकाश ने कहा कि जिले में मातृ एंव शिशु मृत्यु दर अन्य जिलों की तुलना में अधिक है, जो चिंता का विषय है। इस पर रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाए जाएं। एएनएम और आशा गांव में स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन की मुख्य धुरी हैं। इसलिए सभी प्रभारी चिकित्साधिकारी एएनएम व आशा के कार्यों की समीक्षा करें। लापरवाही बरतने पर संबंधित लोगों को दंडित भी किया जाए। आरसीएच पोर्टल पर गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं का पंजीकरण/अपडेशन शत-प्रतिशत किया जाए। यदि अपडेशन में लापरवाही बरतने वालें पर कार्रवाई की जाए।
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जिले की प्रत्येक गर्भवती महिला, नवजात शिशु को सूचीबद्ध करने के साथ उन्हें समय से टीका भी लगाया जाए। साथ ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराकर समय से इलाज मुहैया कराकर स्वस्थ बनाया जाए। यदि भविष्य में कोई भी मातृ एव शिशु की प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान या प्रसव के बाद मृत्यु होती है तो संबंधित प्रभारी चिकित्साधिकारियों को इसका कारण स्पष्ट करना होगा। प्रभारी चिकित्साधिकारियों को संस्थागत प्रसवों का सत्यापन स्वयं करने, ग्रामवार जनसंख्या के आधार पर प्रजनन दर क्या है और उसके सापेक्ष हुए प्रसवों की संख्या क्या है इसकी रिपोर्ट तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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टीकाकरण की समीक्षा में कई क्षेत्रों में डियू लिस्ट ढंग से न बनाने पर संबंधितों को फटकार भी लगाई। साथ ही परिवार नियोजन पर बल देने, पुरुष व महिला नसबंदी बढ़ाने, एनआरसी में अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उन्हें स्वस्थ बनाने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना, जननी सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना एवं हाई रिस्क गर्भवती की पहचान सहित अन्य कार्यक्रमों की समीक्षा की। बैठक में सीडीओ ईशान प्रताप सिंह, सीएमओ डॉ. एपी भार्गव, एसीएमओ डॉ. मुकेश मातनहेलिया, डॉ. उदयनाथ, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी अभय प्रताप सहित सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।