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Shravasti News: रेशम के धागे से मजबूत होगी महिला समूहों की डोर

Sun, 11 May 2025 03:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Sun, 11 May 2025 03:11 AM IST
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Silk thread will strengthen the bond of women's groups
चंदर्खा बुजुर्ग हो रहा कीट पालन।
श्रावस्ती। जमुनहा के गौसपुर में स्थित राजकीय रेशम फार्म में समूह की महिलाएं रेशम के धागे से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगी। इसके लिए मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना समूह की महिलाओं का सहारा बनेगी।
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ग्रामीण महिलाओं को अपने घर के आसपास रोजगार देने के लिए मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना की शुरुआत हुई थी। इसके तहत समूह की महिलाएं अपने खेतों में न सिर्फ शहतूत का पौधा रोपित करेंगी, बल्कि रेशम कीट का पालन भी करेंगी। तैयार रेशम कीट को जमुनहा के गौसपुर स्थिति राजकीय रेशम फार्म लाया जाएगा।
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6.67 एकड़ में फैले इस रेशम फार्म की स्थापना वर्ष 1978 में कराई गई थी। वर्ष-2023 में यहां धागा रेलिंग मशीन लगाई गई थी। यहां समूह की 15 महिलाओं की ट्रेनिंग भी कराई गई है। समूह की महिलाएं वर्ष में चार बार यहां रेशम का उत्पादन करेंगी। इससे जहां उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी वहीं उन्हें रोजगार भी मिलेगा।
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चंदर्खा बुजुर्ग में हो रहा कीट पालन
गिलौला विकास क्षेत्र के चंदर्खा बुजुर्ग गांव में वर्ष 1983 में पी टू कीट पालन केंद्र की स्थापना कराई गई थी। यहां पांच कमरों में एसी की व्यवस्था है। इसमें कीट पालन हो रहा है। यहीं से प्रदेश के सभी पी वन कीट पालन केंद्रों को रेशम के कीट भेजे जाते हैं। किसान अपने खेतों में शहतूत लगाकर कीट पालन कर सकते हैं। यहां जून में किसानों को आठ-नौ दिन व जनवरी में 10-12 दिन चाकी कराने के बाद (रेशम के अंडों को शिशु अवस्था में आने तक) किसानों को दिए जाते हैं। किसान इसका पालन कर सकते हैं।


भूमिहीन किसानों को मिलता अनुदान
रेशम कीट पालन के इच्छुक ऐसे लोग जिनके पास शहतूत का पेड़ लगाने के लिए भूमि नहीं है। उन्हें कीट पालन के लिए भवन निर्माण कराना पड़ता है। एक सेटअप तैयार करने में एक लाख 85 हजार का खर्च आता है। इसमें से किसान को 25 प्रतिशत देना होगा। शेष पैसा केंद्र व राज्य सरकार प्रोत्साहन के रूप में प्रदान करती है। अब तक 30 किसान इसका लाभ ले चुके हैं।
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