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चार सत्य जानने से संभव है दुख का निवारण : भंवरानंद
Thu, 08 Jan 2026 12:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Thu, 08 Jan 2026 12:10 AM IST
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गंध कुटी में बुधवार को प्रार्थना करते भूटान के अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बुधवार को भूटान से आए 60 अनुयायियों से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु भंवरानंद के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से गंध कुटी पर पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि अध्यात्म हमें जानकारी देता है कि संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है। जीवन में सुख-दुख, भूख-प्यास व हंसना-रोना, सब परिस्थिति पर निर्भर करता है। दुख की अवस्था बीतती है और सुख आता है।
उन्होंने बताया कि दुख का निवारण चार सत्य को जान लेने से संभव हो जाता है। संसार में दुख है, इस दुख का कारण है, दुख का कारण दूर करने से दुख दूर किया जा सकता है। बताया कि मध्यम मार्ग पर आचरण करने से दुख दूर होता हैं। मध्यम या माध्यमिक मार्ग ही बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा है। बौद्ध दर्शन सम्यक आचरण पर बल देता है, जिसके आठ अंग सम्यक ज्ञान, सम्यक विचार, सम्यक आचरण, सम्यक समाधि आदि हैं।
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सभा के बाद अनुयायियों ने बौद्ध तपोस्थली के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि अध्यात्म हमें जानकारी देता है कि संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है। जीवन में सुख-दुख, भूख-प्यास व हंसना-रोना, सब परिस्थिति पर निर्भर करता है। दुख की अवस्था बीतती है और सुख आता है।
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उन्होंने बताया कि दुख का निवारण चार सत्य को जान लेने से संभव हो जाता है। संसार में दुख है, इस दुख का कारण है, दुख का कारण दूर करने से दुख दूर किया जा सकता है। बताया कि मध्यम मार्ग पर आचरण करने से दुख दूर होता हैं। मध्यम या माध्यमिक मार्ग ही बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा है। बौद्ध दर्शन सम्यक आचरण पर बल देता है, जिसके आठ अंग सम्यक ज्ञान, सम्यक विचार, सम्यक आचरण, सम्यक समाधि आदि हैं।
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सभा के बाद अनुयायियों ने बौद्ध तपोस्थली के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।