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Shravasti News: राप्ती तो घटी, लेकिन नहीं कम हुईं ग्रामीणों की दुश्वारियां
Sun, 14 Sep 2025 01:59 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:59 AM IST
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मल्हीपुर-भिनगा मार्ग पर बीरपुर के निकट फंसे वाहन। - संवाद
श्रावस्ती/तुलसीपुर। राप्ती का जलस्तर शनिवार से घटने लगा। दोपहर 12 बजे तक नदी खतरे के निशान 127.70 मीटर पर बनी रही। दोपहर तीन बजे के बाद जलस्तर लाल निशान से 40 सेमी घटकर 127.30 मीटर पहुंच गया। बावजूद इसके बाढ़ग्रस्त गांवों के लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुईं।
राप्ती नदी का जलस्तर घटने के बाद भी लोगों की दुश्वारियां खत्म नहीं हुई हैं। वीरपुर के पास कटे भिनगा-मल्हीपुर मार्ग पर पानी व कीचड़ से आवागमन प्रभावित है, कीचड़ में घंटों वाहन फंसे रहते हैं। शनिवार को कटान स्थल पार करते समय वीरपुर तराई निवासी रंगीले की यूएसवी कीचड़ व पानी में फंस गई, इससे अफरातफरी मच गई।
वाहन सवार लोग दहशत में आ गए और नीचे कूदने लगे। घंटों मशक्कत के बाद ट्रैक्टर से टोचन कर बोलेरो को बाहर निकाला गया। कई बाइक सवार भी कीचड़ में फंसे नजर आए और कइयों के कपड़े व सामान भी खराब हो गए।
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किसानों को फसल के नुकसान का आशंका
राप्ती के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी से नदी किनारे बसे शिकारी चौड़ा, हरिहरपुर, महाराज नगर, बीरपुर लौकिहा, जोगिया, भालुहिया कुंडवा व कथरामाफी आदि गांवों के खेतों में पानी भर गया था। जलस्तर घटने के बावजूद अभी खेतों में पानी भरा हुआ है, इससे किसानों को धान की फसल गलने का डर सताने लगा है।
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राप्ती नदी का जलस्तर घटने के बाद भी लोगों की दुश्वारियां खत्म नहीं हुई हैं। वीरपुर के पास कटे भिनगा-मल्हीपुर मार्ग पर पानी व कीचड़ से आवागमन प्रभावित है, कीचड़ में घंटों वाहन फंसे रहते हैं। शनिवार को कटान स्थल पार करते समय वीरपुर तराई निवासी रंगीले की यूएसवी कीचड़ व पानी में फंस गई, इससे अफरातफरी मच गई।
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वाहन सवार लोग दहशत में आ गए और नीचे कूदने लगे। घंटों मशक्कत के बाद ट्रैक्टर से टोचन कर बोलेरो को बाहर निकाला गया। कई बाइक सवार भी कीचड़ में फंसे नजर आए और कइयों के कपड़े व सामान भी खराब हो गए।
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किसानों को फसल के नुकसान का आशंका
राप्ती के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी से नदी किनारे बसे शिकारी चौड़ा, हरिहरपुर, महाराज नगर, बीरपुर लौकिहा, जोगिया, भालुहिया कुंडवा व कथरामाफी आदि गांवों के खेतों में पानी भर गया था। जलस्तर घटने के बावजूद अभी खेतों में पानी भरा हुआ है, इससे किसानों को धान की फसल गलने का डर सताने लगा है।