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जननी सुरक्षा के लाभार्थियों के बकाए का तत्काल हो भुगतान
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श्रावस्ती। मातृ शिशु मृत्यु दर की समीक्षा बैठक शुक्रवार कलेक्ट्रेट सभागार में की गई। डीएम ने इसकी अध्यक्षता करते हुए बढ़ती शिशु मृत्यु दर पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सीएमओ से एएनएम की जिम्मेदारी तय करते हुए समीक्षा करने का निर्देश दिया। जननी सुरक्षा के लाभार्थियों के बकाए का भुगतान करने को भी उन्होंने कहा।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीएम टीके शिबु ने कहा कि जिले की हर गर्भवती महिला से लेकर नवजात शिशुओं को सूचीबद्ध करना होगा। समय से टीकाकरण के साथ ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उनको इलाज मुहैया कराना होगा। जिससे जिले की मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की समीक्षा भी की। मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करते हुए सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा, भविष्य में कोई भी मातृ एवं शिशु की प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान या प्रसव के पश्चात मृत्यु होती है तो संबंधित प्रभारी चिकित्साधिकारियों को मृत्यु का कारण, जच्चा-बच्चा की प्रसव पूर्व की गई देखभाल एवं टीकाकरण, पोषण संबंधी दी गई सुविधाओं के विषय में स्थिति स्पष्ट करनी होगी। जननी सुरक्षा योजना की समीक्षा में घरेलू प्रसव ज्यादा पाए गए।
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इस पर डीएम ने प्रभारी चिकित्साधिकारियों को संस्थागत प्रसव पर जोर देने का निर्देश दिया। जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभार्थियों के लंबित भुगतान पर प्रभारी चिकित्साधिकारियों को तत्काल धनराशि भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अब सभी एएनएम को क्षेत्र में भ्रमण के लिए स्कूटी दी गई। ऐसे में उन्हें भ्रमण कर स्वास्थ्य कार्यक्रमों में तेजी लाने को कहा गया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी ईशान प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एपी भार्गव, जिला स्वास्थ्य शिक्षा सूचना अधिकारी अभय प्रताप, डिप्टी सीएमओ संत कुमार व डॉ. उदयनाथ सहित सभी प्रभारी चिकित्साधिकारी, डीसीपीएम एवं बीसीपीएम मौजूद रहे।
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जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीएम टीके शिबु ने कहा कि जिले की हर गर्भवती महिला से लेकर नवजात शिशुओं को सूचीबद्ध करना होगा। समय से टीकाकरण के साथ ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उनको इलाज मुहैया कराना होगा। जिससे जिले की मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
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उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की समीक्षा भी की। मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करते हुए सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा, भविष्य में कोई भी मातृ एवं शिशु की प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान या प्रसव के पश्चात मृत्यु होती है तो संबंधित प्रभारी चिकित्साधिकारियों को मृत्यु का कारण, जच्चा-बच्चा की प्रसव पूर्व की गई देखभाल एवं टीकाकरण, पोषण संबंधी दी गई सुविधाओं के विषय में स्थिति स्पष्ट करनी होगी। जननी सुरक्षा योजना की समीक्षा में घरेलू प्रसव ज्यादा पाए गए।
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इस पर डीएम ने प्रभारी चिकित्साधिकारियों को संस्थागत प्रसव पर जोर देने का निर्देश दिया। जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभार्थियों के लंबित भुगतान पर प्रभारी चिकित्साधिकारियों को तत्काल धनराशि भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अब सभी एएनएम को क्षेत्र में भ्रमण के लिए स्कूटी दी गई। ऐसे में उन्हें भ्रमण कर स्वास्थ्य कार्यक्रमों में तेजी लाने को कहा गया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी ईशान प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एपी भार्गव, जिला स्वास्थ्य शिक्षा सूचना अधिकारी अभय प्रताप, डिप्टी सीएमओ संत कुमार व डॉ. उदयनाथ सहित सभी प्रभारी चिकित्साधिकारी, डीसीपीएम एवं बीसीपीएम मौजूद रहे।