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गन्ना बिक्री व भुगतान के लिए चक्कर लगा रहे किसान

Thu, 23 Jan 2020 11:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 11:00 PM IST
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Farmers rotating for cane sale and payment
श्रावस्ती। गन्ना किसानों की मुसीबतें कम नहीं हो रही। एक तरफ जहां उन्हें फसल बेचने के लिए क्रय केंद्रों पर कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर किसी भी गड़बड़ी व बकाया भुगतान के लिए किसानों को बहराइच व बलरामपुर के चक्कर भी लगाने पड़ रहे हैं।
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चिलवरिया मिल पर ही जिले के किसानों का लगभग सत्तर करोड़ रुपया पुराना बकाया है। वहीं नए सत्र में भी 15 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा जा चुका है। इसका भुगतान अभी न के बराबर हो पा रहा है। चिलवरिया चीनी मिल को अपनी फसल बेचना किसानों के सामने मजबूरी है। जिले में कुल 28 गन्ना क्रय केंद्र बनाए गए हैं, इसमें से 12 चिलवरिया चीनी मिल के हैं।
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भले ही सरकार चीनी मिलों को गन्ना किसानों का बकाया भुगतान के लिए आदेश जारी कर रही हो, लेकिन उसका लाभ उनको नहीं मिल रहा है। इसके चलते अब गन्ना किसानों के लिए यह खेती महंगी व मुसीबत भरी हो चुकी है। इसका कारण पहले कई दिनों तक लगने वाली क्रय केंद्रों पर लंबी कतार। इस कतार से जूझ कर गन्ना तौल कराने के बाद महीनों तक भुगतान के लिए किसानों को चीनी मिल का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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यदि आंकड़ों पर गौर करें तो श्रावस्ती जिले में गन्ने का क्षेत्रफल लगभग पंद्रह हजार हेक्टेअर है। इस गन्ने को खरीदने के लिए जिले में कुल चार चीनी मिलें अधिकृत हैं। इन चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति के लिए 28 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें से 11 क्रय केंद्र बलरामपुर चीनी मिल के हैं।
इसी ग्रुप की तुलसीपुर चीनी मिल के दो क्रय केंद्र, उतरौला स्थित पिटईमैदा चीनी मिल के तीन केंद्र व बहराइच स्थित चिलवरिया चीनी मिल के 12 क्रय केंद्र हैं। इनके माध्यम से किसानों का गन्ना खरीदा जा रहा है। इनमें यदि बलरामपुर व तुलसीपुर चीनी मिलों में गन्ना भुगतान प्रक्रिया को छोड़ दिया जाए तो पिटईमैदा व चिलवरिया मिली की स्थिति चिंता जनक है। अकेले चिलवरिया चीनी मिल पर ही जिले के गन्ना किसानों का लगभग सत्तर करोड़ रुपये विगत वर्ष का बकाया है। यही नहीं इस पेराई सत्र में 27 नवंबर से अब तक 15 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा जा चुका है। इसका भी भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है।
जिले में लगभग पंद्रह हजार हेक्टेअर गन्ना उपज का क्षेत्रफल है। इस उपज को खरीदने के लिए चार चार चीनी मिलों में होड़ लगी है। श्रावस्ती में इस गन्ने की खरीद व बिक्री की मध्यस्थता करने के लिए गन्ना समिति का गठन ही नहीं हो पाया। चिलवरिया मिल को जाने वाला गन्ना श्रावस्ती गन्ना समिति बहराइच से संचालित होता है। बलरामपुर, तुलसीपुर व पिटईमैदा को भेजे जाने वाला गन्ना बलरामपुर गन्ना समिति के माध्यम से भेजा जाता है।
गन्ना खरीद के लिए गन्ना समिति बनाई जाती है। इस समिति का गन्ने की उपज करने वाला प्रत्येक किसान सदस्य होता है। इस समिति के माध्यम से किसानों का गन्ना खरीद कर चीनी मिलों को भेजा जाता है। चीनी मिलें गन्ने का भुगतान पहले समिति को करती है। इसके बाद समिति किसानों को उसका भुगतान करती है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समिति किसानों से अपना लाभांश लेती है।
इस लाभांश से वह किसानों के हित में कभी उत्तम कोटि का बीज, कभी फर्टलाइजर, तो कभी गन्ना ट्रैक्टर ट्रॉलियों के आने जाने के लिए सड़क का निर्माण करती है। यही नहीं यदि गन्ना किसान के साथ कोई दुर्घटना फसल लाने व ले जाने के दौरान हो तो उसको मुआवजा, चिकित्सीय प्रतिपूर्ति देने के साथ ही गन्ने के नुकसान की भरपाई भी कर करती है। जिले में गन्ना समिति न होने के कारण इसका लाभ किसानों को कभी नहीं मिला।
गन्ना रकबा की फीडिंग कराने से लेकर पर्चियों में गड़बड़ी व भुगतान की जानकारी के लिए लोगों को बहराइच व बलरामपुर का चक्कर लगाना होता है। इसके लिए जिले में किसी भी चीनी मिल का न तो कोई कैंप कार्यालय है और न गन्ना समिति के अधिकारी यहां आते हैं।

एडीएम योगानंद पांडेय का कहना है कि चिलवरिया चीनी मिल की ओर से गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं होने से उस पर पहले ही एफआईआर की जा चुकी है। लगातार प्रयास किया जा रहा है कि किसानों का भुगतान जल्द से जल्द हो जाए।
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