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चीन के सामान की घटी बिक्री
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श्रावस्ती। एलएसी पर भारत-चीन के सैनिकों के बीच हो रहे संघर्ष से जिले के लोग भी नाराज हैं। जिले में चीन के सामानों की उपलब्धता के बाद भी ग्राहक उसकी मांग नहीं कर रहे हैं। बाजार आने वाले ग्राहक अब केवल भारतीय सामान ही मांग रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर कास्मेटिक, इलेक्ट्रानिक बाजार में पड़ा है।
जिले में लगभग साठ फीसदी हिस्सा चीन के सामान का है। वहीं चालीस फीसदी ही सामान भारतीय है। बिकने वाले सामानों में सबसे ज्यादा प्रसाधन, पॉलीबैग, इलेक्ट्रिक व इलेक्ट्रानिक व कृषि क्षेत्र के पंपिंग सेट, पाइप व अन्य सामान है। लोगों की ओर से मांग नहीं होने से चीन के सामान की बिक्री जिले में काफी कम रह गई है।
भारत व चीन का सीमा विवाद अब आम लोगों के मन में क्रोध का कारण बनता जा रहा है। वहीं चीन की ओर से धोखा देकर सैनिकों पर किए गए हमले व उनकी शहादत से आम लोगों में इसका गुस्सा है। इस गुस्से का असर स्थानीय बाजार में देखने को मिल रहा है। जहां चायनीज सामान तो दुकानों में भरा है, लेकिन दो दिन से ग्राहक इन सामानों की मांग नहीं कर रहे हैं।
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जब कि देखा जाए तो कास्मेटिक, इलेक्ट्रानिक व खिलौना सहित पूरे बाजार पर चायनीज समान की पकड़ नब्बे फीसदी तक है। यदि श्रावस्ती के बाजार में चायनीज सामान की हिस्सेदारी की बात करें तो कृषि क्षेत्र में छोटे सिंचाई के इंजन, प्लास्टिक की पाइप का जिले में बड़ा बाजार है।
खिलौने के क्षेत्र में नब्बे फीसदी हिस्सा चायनीज बाजार का है। इलेक्ट्रानिक में एलईडी, मोबाइल, स्विच, सहित अन्य सामान पर साठ फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी चीन के सामान की है। ऐसे ही पॉलीबैग, कैरीबैग, खाने में चाइना से आने वाला सेब व तरबूज से भिनगा व इकौना का बाजार भरा पड़ा है। यह सामान स्थानीय सामान से सस्ता है। इस लिए इसकी मांग भी ज्यादा रहती थी। वहीं कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच हो रहे संघर्ष के बाद इन सामानों की मांग लगभग न के बराबर है। लोगों की पहली पसंद अब भारतीय क्षेत्र में बने सामान हैं।
श्रावस्ती में चीन के सामान का साठ फीसदी बाजार
व्यापारी महेश पटवा ने बताया कि उनके पास फैशन से जुड़े सामान, कास्मेटिक व खिलौने हैं। यह सामान लॉकडाउन के पहले ही आया था। लॉकडाउन में दुकान बंद होने के कारण बिक्री नहीं हो पाई। इधर चीन के सैनिकों की ओर से किए जा रहे संघर्ष के कारण लोगों में नाराजगी है। इसीलिए इन सामानों की मांग घटी है। ग्राहक इसे नहीं खरीद रहे हैं।
वहीं व्यापारी रईश खान ने बताया कि बाजार में चीन का इलेक्ट्रानिक सामान भरा पड़ा है। सस्ता होने के कारण पहले इसकी मांग थी। जब से सीमा पर विवाद शुरू हुआ है, लोगों में चीन के प्रति नाराजगी है। वह अब इन सामान को खरीदना नहीं चाहते। इसलिए अब भविष्य में भी सामान ही नहीं लूंगा। व्यापारी महेश गुप्ता ने बताया कि भारत में चीन के सामान का बढ़ा बाजार है। श्रावस्ती जिले से ही कई करोड़ का व्यापार प्रतिमाह होता है। इसमें से साठ फीसदी चीन के सामान के हिस्सेदारी है। ऐसे में यही हाल देश के अन्य बाजारों का है। चीन हमारे पैसे का उपयोग हमारे ऊपर ही कर रहा है। इसका एक ही जवाब है कि हम चीनी सामान का बहिष्कार करें। इसलिए चीन के सामान की खरीद बंद की गई है। वहीं निसार अहमद का कहना है कि चीन का मूल आधार निर्यात व्यवस्था ही है। इसका सबसे बड़ा केंद्र भारत है। जब श्रावस्ती में साठ फीसदी बाजार चीन के सामान का है तो अन्य जिलों को मिला कर क्या हाल होगा। इसलिए चीन के सामान का बहिष्कार होना चाहिए। तभी चीन को ठीक से उत्तर दिया जा सकता है।
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जिले में लगभग साठ फीसदी हिस्सा चीन के सामान का है। वहीं चालीस फीसदी ही सामान भारतीय है। बिकने वाले सामानों में सबसे ज्यादा प्रसाधन, पॉलीबैग, इलेक्ट्रिक व इलेक्ट्रानिक व कृषि क्षेत्र के पंपिंग सेट, पाइप व अन्य सामान है। लोगों की ओर से मांग नहीं होने से चीन के सामान की बिक्री जिले में काफी कम रह गई है।
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भारत व चीन का सीमा विवाद अब आम लोगों के मन में क्रोध का कारण बनता जा रहा है। वहीं चीन की ओर से धोखा देकर सैनिकों पर किए गए हमले व उनकी शहादत से आम लोगों में इसका गुस्सा है। इस गुस्से का असर स्थानीय बाजार में देखने को मिल रहा है। जहां चायनीज सामान तो दुकानों में भरा है, लेकिन दो दिन से ग्राहक इन सामानों की मांग नहीं कर रहे हैं।
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जब कि देखा जाए तो कास्मेटिक, इलेक्ट्रानिक व खिलौना सहित पूरे बाजार पर चायनीज समान की पकड़ नब्बे फीसदी तक है। यदि श्रावस्ती के बाजार में चायनीज सामान की हिस्सेदारी की बात करें तो कृषि क्षेत्र में छोटे सिंचाई के इंजन, प्लास्टिक की पाइप का जिले में बड़ा बाजार है।
खिलौने के क्षेत्र में नब्बे फीसदी हिस्सा चायनीज बाजार का है। इलेक्ट्रानिक में एलईडी, मोबाइल, स्विच, सहित अन्य सामान पर साठ फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी चीन के सामान की है। ऐसे ही पॉलीबैग, कैरीबैग, खाने में चाइना से आने वाला सेब व तरबूज से भिनगा व इकौना का बाजार भरा पड़ा है। यह सामान स्थानीय सामान से सस्ता है। इस लिए इसकी मांग भी ज्यादा रहती थी। वहीं कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच हो रहे संघर्ष के बाद इन सामानों की मांग लगभग न के बराबर है। लोगों की पहली पसंद अब भारतीय क्षेत्र में बने सामान हैं।
श्रावस्ती में चीन के सामान का साठ फीसदी बाजार
व्यापारी महेश पटवा ने बताया कि उनके पास फैशन से जुड़े सामान, कास्मेटिक व खिलौने हैं। यह सामान लॉकडाउन के पहले ही आया था। लॉकडाउन में दुकान बंद होने के कारण बिक्री नहीं हो पाई। इधर चीन के सैनिकों की ओर से किए जा रहे संघर्ष के कारण लोगों में नाराजगी है। इसीलिए इन सामानों की मांग घटी है। ग्राहक इसे नहीं खरीद रहे हैं।
वहीं व्यापारी रईश खान ने बताया कि बाजार में चीन का इलेक्ट्रानिक सामान भरा पड़ा है। सस्ता होने के कारण पहले इसकी मांग थी। जब से सीमा पर विवाद शुरू हुआ है, लोगों में चीन के प्रति नाराजगी है। वह अब इन सामान को खरीदना नहीं चाहते। इसलिए अब भविष्य में भी सामान ही नहीं लूंगा। व्यापारी महेश गुप्ता ने बताया कि भारत में चीन के सामान का बढ़ा बाजार है। श्रावस्ती जिले से ही कई करोड़ का व्यापार प्रतिमाह होता है। इसमें से साठ फीसदी चीन के सामान के हिस्सेदारी है। ऐसे में यही हाल देश के अन्य बाजारों का है। चीन हमारे पैसे का उपयोग हमारे ऊपर ही कर रहा है। इसका एक ही जवाब है कि हम चीनी सामान का बहिष्कार करें। इसलिए चीन के सामान की खरीद बंद की गई है। वहीं निसार अहमद का कहना है कि चीन का मूल आधार निर्यात व्यवस्था ही है। इसका सबसे बड़ा केंद्र भारत है। जब श्रावस्ती में साठ फीसदी बाजार चीन के सामान का है तो अन्य जिलों को मिला कर क्या हाल होगा। इसलिए चीन के सामान का बहिष्कार होना चाहिए। तभी चीन को ठीक से उत्तर दिया जा सकता है।