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वर्चुअल माध्यम से पोषण पाठशाला का आयोजन
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श्रावस्ती। कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी में बृहस्पतिवार को पोषण पाठशाला का वर्चुअल माध्यम से आयोजन किया गया। इसमें मौजूद विशेषज्ञों ने छह माह तक केवल स्तनपान की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी दी। पोषण पाठशाला का शुभारंभ जिलाधिकारी नेहा प्रकाश व मुख्य विकास अधिकारी अनुभव सिंह ने कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी में वर्चुअल माध्यम से किया। इसमें मौजूद विशेषज्ञों ने स्तनपान की आवश्यकता व उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में मौजूद धात्री व गर्भवती लाभार्थी वर्ग की ज्योति, रेनू व सोनपती ने विशेषज्ञों से स्तनपान में आ रही समस्याओं के बारे में प्रश्न भी किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए अमृत के समान है। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आवश्यक है कि जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान शुरू करा दिया जाए। छह माह की आयु तक बच्चों को केवल स्तनपान कराना चाहिए। स्तनपान से ही शिशु की पानी की भी आवश्यकता पूरी हो जाती है।
स्तनपान की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाना है। इसके अतिरिक्त जिले में संचालित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी वेब-कॉस्टिंग के माध्यम से पोषण पाठशाला का आयोजन कराया गया। इस दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एपी भार्गव, जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह, बाल विकास परियोजना अधिकारी जमुनहा राजेंद्र कुमार वर्मा, नंदलाल प्रसाद, श्यामू सिंह, अभिषेक मिश्र, मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में मौजूद धात्री व गर्भवती लाभार्थी वर्ग की ज्योति, रेनू व सोनपती ने विशेषज्ञों से स्तनपान में आ रही समस्याओं के बारे में प्रश्न भी किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए अमृत के समान है। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आवश्यक है कि जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान शुरू करा दिया जाए। छह माह की आयु तक बच्चों को केवल स्तनपान कराना चाहिए। स्तनपान से ही शिशु की पानी की भी आवश्यकता पूरी हो जाती है।
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स्तनपान की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाना है। इसके अतिरिक्त जिले में संचालित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी वेब-कॉस्टिंग के माध्यम से पोषण पाठशाला का आयोजन कराया गया। इस दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एपी भार्गव, जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह, बाल विकास परियोजना अधिकारी जमुनहा राजेंद्र कुमार वर्मा, नंदलाल प्रसाद, श्यामू सिंह, अभिषेक मिश्र, मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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