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फूल व झालरों से सजाया गया राप्ती बैराज
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श्रावस्ती। सरयू राष्ट्रीय परियोजना को पानी देने के लिए तैयार राप्ती बैराज फूल व झालरों से सजाया गया है। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री इसका निरीक्षण भी करेंगे। प्रधानमंत्री के उद्घाटन के बाद यहां बने आठ गेटों में जिनकी आवश्यकता होगी उन्हें खोलकर पानी राप्ती मुख्य नहर में भेजा जाएगा।
सरयू राष्ट्रीय परियोजना पूरा हो चुका है। बस अब उसके शुभारंभ में कुछ ही दिन अवशेष है। 11 दिसंबर को प्रधानमंत्री इसका लोकार्पण बलरामपुर में कर सकते हैं। इसके लिए तैयारी श्रावस्ती में पूरी हो चुकी है। इस राष्ट्रीय परियोजना का प्रमुख हिस्सा राप्ती बैराज जहां से पूरी परियोजना को पानी मिलेगा। उसको फूल व झालरों से सजाया गया है। यही नहीं पूरी परियोजना के आसपास के क्षेत्र को भी रंग कर आकर्षक स्वरूप दिया गया है ताकि इस क्षेत्र से जब पानी छोड़ा जाए तो इसका दृश्य विहंगम व सुंदर दिखाई दे। वहीं राप्ती बैराज पर अब तक हुई व्यवस्थाओं का जायजा लेने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री भी राप्ती बैराज का दौरा कर सकते हैं। इसके लिए हेलीपैड तैयार कर दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री दोपहर तक यहां उतरकर स्थिति का जायजा व अधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे। इस दौरान उनके साथ सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
राप्ती नदी नेपाल से निकलकर जब भारत में प्रवेश करती है तो उसे सबसे पहले राप्ती बैराज पर रोका जाता है। यहां पहले से ही चौदह शटर के गेट लगे हुए हैं। यहां से पानी आवश्यकता अनुसार नदी में भेजा जाता है, लेकिन बाढ़ के समय मजबूरी के चलते सभी शटर खोलने पड़ते है। जिससे राप्ती विकराल रूप लेते हुए श्रावस्ती से गोरखुपर तक तांडव करती है, लेकिन अब राप्ती के पानी को सरयू राष्ट्रीय परियोजना का मुख्य हिस्सा राप्ती मुख्य नहर को जोड़ दिया गया। इस पर आठ गेट बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री जब इस परियोजना को लोकार्पित करेंगे उस समय सभी गेट खोले जा सकते हैं। इसके लिए ट्रायल पहले ही पूरा कर लिया गया है। वहीं, राप्ती बैराज का उच्चतम जलस्तर 127.70 मीटर है। यहां इतना जलस्तर होने के बाद यह माना जाता है कि अब नदी आगे तांडव करेगी। अभी पूरे बैराज क्षेत्र में 127.70 मीटर पानी का संचय किया गया है ताकि टेल तक पानी पहुंच जाए।
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सरयू राष्ट्रीय परियोजना पूरा हो चुका है। बस अब उसके शुभारंभ में कुछ ही दिन अवशेष है। 11 दिसंबर को प्रधानमंत्री इसका लोकार्पण बलरामपुर में कर सकते हैं। इसके लिए तैयारी श्रावस्ती में पूरी हो चुकी है। इस राष्ट्रीय परियोजना का प्रमुख हिस्सा राप्ती बैराज जहां से पूरी परियोजना को पानी मिलेगा। उसको फूल व झालरों से सजाया गया है। यही नहीं पूरी परियोजना के आसपास के क्षेत्र को भी रंग कर आकर्षक स्वरूप दिया गया है ताकि इस क्षेत्र से जब पानी छोड़ा जाए तो इसका दृश्य विहंगम व सुंदर दिखाई दे। वहीं राप्ती बैराज पर अब तक हुई व्यवस्थाओं का जायजा लेने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री भी राप्ती बैराज का दौरा कर सकते हैं। इसके लिए हेलीपैड तैयार कर दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री दोपहर तक यहां उतरकर स्थिति का जायजा व अधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे। इस दौरान उनके साथ सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
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राप्ती नदी नेपाल से निकलकर जब भारत में प्रवेश करती है तो उसे सबसे पहले राप्ती बैराज पर रोका जाता है। यहां पहले से ही चौदह शटर के गेट लगे हुए हैं। यहां से पानी आवश्यकता अनुसार नदी में भेजा जाता है, लेकिन बाढ़ के समय मजबूरी के चलते सभी शटर खोलने पड़ते है। जिससे राप्ती विकराल रूप लेते हुए श्रावस्ती से गोरखुपर तक तांडव करती है, लेकिन अब राप्ती के पानी को सरयू राष्ट्रीय परियोजना का मुख्य हिस्सा राप्ती मुख्य नहर को जोड़ दिया गया। इस पर आठ गेट बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री जब इस परियोजना को लोकार्पित करेंगे उस समय सभी गेट खोले जा सकते हैं। इसके लिए ट्रायल पहले ही पूरा कर लिया गया है। वहीं, राप्ती बैराज का उच्चतम जलस्तर 127.70 मीटर है। यहां इतना जलस्तर होने के बाद यह माना जाता है कि अब नदी आगे तांडव करेगी। अभी पूरे बैराज क्षेत्र में 127.70 मीटर पानी का संचय किया गया है ताकि टेल तक पानी पहुंच जाए।
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