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दीपावली मेले में दुकानें तो आईं, नहीं पहुंचे ग्राहक
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श्रावस्ती। दीपावली के अवसर पर स्ट्रीट वेंडरों को कमाई का मौका देने के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत भिनगा में दीपावली मेला लगाने का आदेश था। मेला जूनियर हाईस्कूल मैदान में लगाया भी गया। लेकिन मेला औपचारिकता बन कर रह गया। मेले में कुल 17 स्टाल बनाए गए थे, दस स्टाल दुकानदारों को दिए गए थे। उद्घाटन करने के लिए डीएम व विधायक सहित अन्य अधिकारी आए। मंच पर कुछ देर सांस्कृतिक कार्यक्रम चला, स्टालों का निरीक्षण हुआ। कुछ देर बाद अधिकारी व नेता चले गए। उनके जाते ही विभागों द्वारा योजनाओं के प्रदर्शनी के लिए लगाए गए स्टाल से भी सामान समेट लिया गया। इसके बाद केवल दस स्टाल बचे।
मेले में एक स्टाल नंदनी स्वयं सहायता समूह को दिया गया था। यह सहायता समूह गोबर से अगरबत्ती सहित अन्य सामान बनाता है। एक स्टाल फल वाले को दिया गया था। उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, लुधियाना महासेल सहित प्लास्टिक के सामान बेचने वाले व अन्य दुकानें लगाई गई थी। इसके अतिरिक्त सात दुकानों में सभी विभागों द्वारा अपनी अपनी योजनाओं का प्रचार प्रसार करने के लिए लगाया गया था। दुकानों की संख्या कम होने व मेले का ठीक से प्रचार प्रसार न होने के कारण यहां ग्राहक आए ही नहीं। दिन भर में स्वयं सहायता समूह ने पूरे दिन में 45 रुपये की अगरबत्ती, फल वाले स्टाल मालिक ने 210 रुपये के फल, लुधियाना महासेल ने 300 का कपड़ा, तौकीर फाइबर स्टोर ने 250 रुपये की बाल्टी व मग व धर्मराज पटवा व शकील ने पूरे दिन में 30-30 रुपये की दुकानदारी की।
ग्राहकों की आमद न देख कई दुकानदार शाम होने से पहले ही अपनी दुकान से सामान समेट चले गए। मेले का उद्देश्य था कि स्ट्रीट वेंडरों को एक मंच पर एकत्र कर सामान बेचने का मौका मिले। लेकिन जिले में नाम तो मेला रखा गया। लेकिन मेले का स्वरूप नहीं बन पाया। यहां न तो प्रचार प्रसार में ग्राहक आए और न ही स्ट्रीट वेंडरों को मेले तक लाने की कोई कवायद ही की गई।
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मेला आयोजन के लिए विभागवार सभी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यदि मेला समाप्त होने से पहले सरकारी विभागों के स्टाल हटाए गए हैं, तो गंभीर विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी। मेला अभी दो दिन और लगना है। इसमें प्रयास होगा कि स्ट्रेट वेंडरों को बाजार मिल सके।
ईशान प्रताप सिंह सीडीओ
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मेले में एक स्टाल नंदनी स्वयं सहायता समूह को दिया गया था। यह सहायता समूह गोबर से अगरबत्ती सहित अन्य सामान बनाता है। एक स्टाल फल वाले को दिया गया था। उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, लुधियाना महासेल सहित प्लास्टिक के सामान बेचने वाले व अन्य दुकानें लगाई गई थी। इसके अतिरिक्त सात दुकानों में सभी विभागों द्वारा अपनी अपनी योजनाओं का प्रचार प्रसार करने के लिए लगाया गया था। दुकानों की संख्या कम होने व मेले का ठीक से प्रचार प्रसार न होने के कारण यहां ग्राहक आए ही नहीं। दिन भर में स्वयं सहायता समूह ने पूरे दिन में 45 रुपये की अगरबत्ती, फल वाले स्टाल मालिक ने 210 रुपये के फल, लुधियाना महासेल ने 300 का कपड़ा, तौकीर फाइबर स्टोर ने 250 रुपये की बाल्टी व मग व धर्मराज पटवा व शकील ने पूरे दिन में 30-30 रुपये की दुकानदारी की।
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ग्राहकों की आमद न देख कई दुकानदार शाम होने से पहले ही अपनी दुकान से सामान समेट चले गए। मेले का उद्देश्य था कि स्ट्रीट वेंडरों को एक मंच पर एकत्र कर सामान बेचने का मौका मिले। लेकिन जिले में नाम तो मेला रखा गया। लेकिन मेले का स्वरूप नहीं बन पाया। यहां न तो प्रचार प्रसार में ग्राहक आए और न ही स्ट्रीट वेंडरों को मेले तक लाने की कोई कवायद ही की गई।
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मेला आयोजन के लिए विभागवार सभी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यदि मेला समाप्त होने से पहले सरकारी विभागों के स्टाल हटाए गए हैं, तो गंभीर विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी। मेला अभी दो दिन और लगना है। इसमें प्रयास होगा कि स्ट्रेट वेंडरों को बाजार मिल सके।
ईशान प्रताप सिंह सीडीओ