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पौधरोपण का नया कीर्तिमान बनाने की तैयारियां
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:17 PM IST
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कैराना क्षेत्र के बरनावी में पूर्व में हुआ पौधरोपण।
- फोटो : अमर उजाला
पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने पौध रोपण का नया कीर्तिमान बनाने की तैयारियां कर ली हैं। प्रदेश भर में करीब नौ करोड़ पौधे 2018 में रोपित किए जाने हैं। इनमें शामली में सवा तीन लाख पौधे रोपे जाएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक वृक्ष धन योजना भी बनाई है, जिसके लिए शासन ने सभी जिलों को पत्र भेजकर पौध रोपण के लक्ष्य को पूरा करने का निर्देश दिया है। मगर, बीते वर्षों में रोपित हुए पौधों के संरक्षण पर कोई गौर नहीं किया जा रहा है।
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गौरतलब है कि शामली जिले के कैराना क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर माफिया का काफी समय से कब्जा रहा है। बीते समय में कई बार वन विभाग की टीम ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को साथ लेकर अवैध कब्जे भी हटवाए, लेकिन भू माफिया फिर से अवैध कब्जा कर लेते हैं। इतना ही नहीं वन विभाग द्वारा रोपे गए पौधों को भी नष्ट कर दिया जाता है। यही वजह है कि बीते दो साल में रोपे गए पौधों में से बहुत कम संख्या में पौधे जीवित रह पा रहे हैं। शामली जिले में 2016 में 2,55,250 पौधों का रोपण किया गया था, जबकि 2017 में 1,54,375 पौधों का रोपण किया गया। इन पौधों का संरक्षण ठीक से नहीं हो पा रहा है। इस बार 2018 के लिए शामली जिले को 3,23,400 पौधों के रोपण का लक्ष्य मिला है। सवाल उठता है कि प्रत्येक वर्ष पौधरोपण तो किया जा रहा है, लेकिन पौधों के संरक्षण के प्रति गंभीरता नहीं है। इस कारण पौधे बड़े होने से पहले ही दम तोड़ जाते हैं।
मुख्यमंत्री कृषक वृक्ष धन योजना
महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत निजी खेत की मेढ़ (बाउंड्री) पर मुख्यमंत्री कृषक वृक्ष धन योजना के तहत पौधरोपण होगा। इसमें जॉब कार्ड धारी पात्र वर्ग, महिला मुखिया, इंदिरा आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी परिवार तथा पट्टाधारी परिवार और सामान्य वर्ग के लघु एवं सीमांत किसान अपने खेतों की डोल पर पौध रोपण कर सकेंगे। पौध रोपण में उच्च गुणवत्ता के बांस तथा छायादार, फलदार, औषधीय प्रजाति का प्रयोग किया जाए। इसमें शीशम, नीम, खैर, बबूल, मलबरी, सहजनी, कदंब, यूकेलिप्टस, पापुलर, कलमी देशी आम, कटहल, अमरूद, आंवला, बेल, जामुन, नींबू और चीकू आदि प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों का चयन लाभार्थी द्वारा किया जाएगा, लेकिन डार्क भूजल स्तर वाले क्षेत्रों में अधिक उपयोगी प्रजातियों का रोपण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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निजी खेतों पर पौध रोपण के नामक
परियोजना की अवधि तीन वर्ष होगी। प्रति परियोजना में 200 पौधों का रोपण होगा, 7.5 मीटर के अंतराल से पौध रोपण होगा। परियोजना की लागत 1,89,200 रुपये तथा प्रति पौधे की मानक लागत 946 रुपये होगी।
ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार होगी प्लानिंग
मुख्यमंत्री कृषक वृक्ष योजना के तहत पौध रोपण के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर योजना बनेगी। ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान ऐसे
कृषकों का ब्यौरा निर्धारित प्रारूप में भरकर जिला स्तरीय अधिकारियों को भेजेंगे। उसमें कृषक के नाम पता और कृषि भूमि के विवरण तथा रोपित होने वाले पौधों की संख्या तथा उनकी प्रजाति का उल्लेख किया जाएगा।
पौधों के दुश्मन बने माफिया
जिले में कैराना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हर साल पौधरोपण होता है। खासकर बरनावी, मलकपुर सहित कई गांवों में जहां वन विभाग की भूमि है, वहां पर पौध रोपण हुआ। बीते वर्ष ही यहां 20 हजार पौधों का रोपण हुआ, लेकिन वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे करने वाले माफिया इन पौधों को नष्ट कर रहे हैं। कैराना वन रेंजर राकेश बालियान का कहना है कि पौधों को नष्ट करने और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कई बार एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं तथा भूमाफिया के रूप में चिह्नित कर कार्रवाई की गई।
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