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अब वायु प्रदूषण फैलाया तो खैर नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Thu, 14 Dec 2017 11:33 PM IST
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demo
- फोटो : demo
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल होने पर शामली में वायु प्रदूषण कम करने को लेकर कवायद शुरू हो गई है। प्रदूषण फैलने से रोकने और कार्रवाई के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इसके बाद प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव के दृष्टिगत एनजीटी के आदेशों का पालन कराने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विभागवार जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। इसमें विभिन्न विभागों के 13 अधिकारी शामिल किए गए हैं। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि प्रदूषण न फैलने पाए। यदि कोई प्रदूषण फैलाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को एक्शन टेकन रिपोर्ट नोडल अधिकारी को प्रत्येक शुक्रवार की दोपहर तक भेजनी होगी, ताकि यह ब्यौरा जिलाधिकारी के वेबपोर्टल पर अपलोड किया जा सके। अपर जिलाधिकारी शिव बहादुर सिंह का कहना है कि एनसीआर में शामिल होने पर जिले में एनजीटी के नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। इसी के चलते जिला स्तरीय समिति का गठन हुआ है।
समिति में 13
अधिकारी शामिल
अपर जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय, खनन निरीक्षक/खान अधिकारी, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, जिला कृषि अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला सूचना अधिकारी।
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----- विभाग और उनकी जिम्मदेारी
-- लैंडफिल साइट्स एवं अन्य स्थानों पर कूड़ा जलाए जाने से रोका जाना तथा दोषी व्यक्ति के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई करने की जिम्मेदारी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की होगी।
-- ईंट भट्ठों एवं उद्योगों को में प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन, खनन विभाग एवं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की होगी।
-- हैवी ट्रैफिक वाली सड़कों पर समयबद्ध रूप से मैकेनाइज्ड सफाई और पानी का छिड़काव दो दिन के अंतराल पर किए जाने की जिम्मेदारी नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग की होगी।
-- ऐसे वाहनों की निगरानी रखना जो प्रदूषण फैला रहे हों और उनका संचालन बंद कराने तथा जुर्माना अधिरोपित करने तथा वाहनों पर पीयूसी (पोल्यूशन अंडर कंट्रोल) मानकों का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी परिवहन तथा यातायात पुलिस की होगी।
-- निर्माण गतिविधियों में धूल उत्सर्जन के नियमों का कड़ाई से लागू करना तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माण स्थलों को बंद कराना विकास प्राधिकरण और नगर पालिका संभालेंगे।
-- चिह्नित संवेदनशील स्थलों पर वाहनों के निर्बाध आवागमन की जिम्मेदारी यातायात पुलिस की होगी।
-- सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नॉन डेस्टाइनड ट्रकों को डायवर्ट करना तथा वर्ष 2005 के बाद रजिस्टर्ड ट्रकों को ही अनुमति देने की जिम्मेदारी यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की होगी।
-- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आतिशबाजी पर प्रतिबंध के आदेश को कड़ाई से लागू कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
-- सोशल मीडिया, मोबाइल एप के माध्यम से जनसामान्य को प्रदूषण स्तर, कंट्रोल रूम का संपर्क विवरण आदि के संबंध में सूचित करने की जिममेदारी सूचना विभाग की होगी।
-- 10 वर्ष पुराने समस्त डीजल चालित वाहनों तथा 15 साल पुराने पेट्रोल चालित वाहनों को जब्त किए जाने की कार्रवाई यातायात पुलिस और परिवहन विभाग करेगा।
-- कृषि अवशेषों को जलाने से रोकने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और कृषि विभाग की होगी, जबकि ईंधन रूप में पैट कोक व फर्नेस आयल पर प्रतिबंध को लागू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रहेगी।
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव के दृष्टिगत एनजीटी के आदेशों का पालन कराने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विभागवार जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। इसमें विभिन्न विभागों के 13 अधिकारी शामिल किए गए हैं। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि प्रदूषण न फैलने पाए। यदि कोई प्रदूषण फैलाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को एक्शन टेकन रिपोर्ट नोडल अधिकारी को प्रत्येक शुक्रवार की दोपहर तक भेजनी होगी, ताकि यह ब्यौरा जिलाधिकारी के वेबपोर्टल पर अपलोड किया जा सके। अपर जिलाधिकारी शिव बहादुर सिंह का कहना है कि एनसीआर में शामिल होने पर जिले में एनजीटी के नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। इसी के चलते जिला स्तरीय समिति का गठन हुआ है।
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समिति में 13
अधिकारी शामिल
अपर जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय, खनन निरीक्षक/खान अधिकारी, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, जिला कृषि अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला सूचना अधिकारी।
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----- विभाग और उनकी जिम्मदेारी
-- लैंडफिल साइट्स एवं अन्य स्थानों पर कूड़ा जलाए जाने से रोका जाना तथा दोषी व्यक्ति के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई करने की जिम्मेदारी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की होगी।
-- ईंट भट्ठों एवं उद्योगों को में प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन, खनन विभाग एवं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की होगी।
-- हैवी ट्रैफिक वाली सड़कों पर समयबद्ध रूप से मैकेनाइज्ड सफाई और पानी का छिड़काव दो दिन के अंतराल पर किए जाने की जिम्मेदारी नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग की होगी।
-- ऐसे वाहनों की निगरानी रखना जो प्रदूषण फैला रहे हों और उनका संचालन बंद कराने तथा जुर्माना अधिरोपित करने तथा वाहनों पर पीयूसी (पोल्यूशन अंडर कंट्रोल) मानकों का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी परिवहन तथा यातायात पुलिस की होगी।
-- निर्माण गतिविधियों में धूल उत्सर्जन के नियमों का कड़ाई से लागू करना तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माण स्थलों को बंद कराना विकास प्राधिकरण और नगर पालिका संभालेंगे।
-- चिह्नित संवेदनशील स्थलों पर वाहनों के निर्बाध आवागमन की जिम्मेदारी यातायात पुलिस की होगी।
-- सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नॉन डेस्टाइनड ट्रकों को डायवर्ट करना तथा वर्ष 2005 के बाद रजिस्टर्ड ट्रकों को ही अनुमति देने की जिम्मेदारी यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की होगी।
-- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आतिशबाजी पर प्रतिबंध के आदेश को कड़ाई से लागू कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
-- सोशल मीडिया, मोबाइल एप के माध्यम से जनसामान्य को प्रदूषण स्तर, कंट्रोल रूम का संपर्क विवरण आदि के संबंध में सूचित करने की जिममेदारी सूचना विभाग की होगी।
-- 10 वर्ष पुराने समस्त डीजल चालित वाहनों तथा 15 साल पुराने पेट्रोल चालित वाहनों को जब्त किए जाने की कार्रवाई यातायात पुलिस और परिवहन विभाग करेगा।
-- कृषि अवशेषों को जलाने से रोकने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और कृषि विभाग की होगी, जबकि ईंधन रूप में पैट कोक व फर्नेस आयल पर प्रतिबंध को लागू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रहेगी।