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मृगांका संभालेंगी हुकुम की राजनीतिक विरासत

Wed, 14 Feb 2018 11:54 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली Updated Wed, 14 Feb 2018 11:54 PM IST
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Mriganka will take over the political legacy of hukum
सांसद बाबू हुकुम सिंह की पुत्री। - फोटो : अमर उजाला
शामली में पूर्व सांसद बाबू हुकुम सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही अटकलों पर आखिरकार बुधवार को विराम लग गया। जिस अंदाज में मृगांका सिंह ने कैराना में रहने, दृढ़ संकल्प के साथ अपने पिता के सपनों को पूरा करने की बात कही, उससे स्पष्ट है कि बाबूजी की राजनीतिक विरासत मृगांका सिंह ही संभालेंगी।
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बाबू हुकुम सिंह के कोई पुत्र नहीं है, बल्कि पांच बेटियां हैं। उनमें से मृगांका सिंह काफी समय से अपने पिता हुकुम सिंह के साथ रहकर ही राजनीति के गुर सीखे। इसी के चलते 2017 के विधानसभा चुनाव में हुकुम सिंह ने कैराना विधानसभा सीट से मृगांका सिंह को चुनाव भी लड़ाया, यह बात अलग है कि वह जीत नहीं पाई। वहीं, तीन फरवरी को हुकुम सिंह का निधन होने के बाद इस बात पर बहस शुरू हो गई कि अब हुकुम सिंह की राजनीतिक विरासत कौन संभालेगा। बुधवार को जब श्रद्धांजलि सभा हुई, तो उसमें मृगांका सिंह ने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से बाबूजी हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी असीम स्मृति हमेशा साथ रहेगी। अब तक हर परिस्थिति में बाबूजी चट्टान की तरह साया बनकर खड़े रहते थे। उन्होंने धार्मिक सद्भाव और क्षेत्र के विकास में अनेक कार्य किए। उसी बदौलत जनसमर्थन से उन्हें सात बार विधायक और सांसद बनने का मौका मिला।
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मृगांका सिंह ने कहा कि मैं क्षेत्र की जनता की पीड़ा समझती हूं और भरोसा दिलाती हूं कि बाबूजी के घर के दरवाजे क्षेत्र की जनता के लिए हमेशा की तरह खुले रहेंगे। मैं कैराना में ही आप सबके बीच रहूंगी। बाबूजी के जाने के बाद उनका संकल्प और दृढ़ हो गया है, जो बाबूजी के सपनों को पूरा करने के लिए लिया गया है। मृगांका सिंह ने कहा कि यदि मुझसे कोई गलती हो जाए, तो अपनी बुआ, बहन अथवा बेटी समझकर माफ कर देना। मृगांका सिंह के इस वक्तव्य से स्पष्ट है कि बाबू हुकुम सिंह की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए वह पूर्ण रूप से तैयार हैं और कैराना क्षेत्र में रहकर ही पिता के नक्शे कदम पर राजनीतिक पारी खेलेंगी।
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मेरे लिए गर्व की बात है इस परिवार में पैदा होना बाबू हुकुम सिंह के पौत्र जिला पंचायत सदस्य अनुज चौहान और शिवेंद्र उर्फ शिवा को पगड़ी बांधी गई। इस लिहाज से अनुज चौहान की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अनुज चौहान ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं इस परिवार में पैदा हुआ। बाबूजी ने हमें ईमानदारी से कार्य करने की प्रेरणा दी। बाबूजी के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए हर कदम पर बुआजी (मृगांका सिंह) के साथ रहेंगे।
गूंज उठा बाबूजी अमर रहे का नारा मायापुर फार्म हाउस पर बुधवार को श्रद्धांजलि सभा के समापन पर दो मिनट का मौन रखा गया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। इसी दौरान लोगों ने बाबू हुकुम सिंह अमर रहे और जब तक सूरज चांद रहेगा, हुकुम सिंह तेरा नाम रहेगा का नारा भी खूब लगाया।
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