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शामली: महाशिवरात्रि आज, सुबह चार बजे से शुरू होगी विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक
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- भगवान आशुतोष का दो दिन जलाभिषेक रविवार शाम तक होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि व्रत शनिवार को त्रयोदशी और चतुर्दशी के आने से विशेष संयोग में महाशिवरात्रि का जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस बार शनिवार से रविवार तक बीस घंटे 18 मिनट दुर्लभ संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि शनिवार के दिन शनि प्रदोष को यह त्योहार मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि का जलाभिषेक त्रयोदशी और चतुर्दशी को सुबह चार बजे से शिवालयों और घरों में शुरू हो जाएगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी-चतुर्दशी का विशेष संयोग बनने पर मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर शनिवार को फाल्गुन चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ शाम 8.02 बजे शुरू होकर चतुर्दशी तिथि का समापन 19 फरवरी रविवार को 4.18 शाम तक जलाभिषेक और पूजा-अर्चना चारों पहर होगी। शहर के बुढ़ाना रोड हनुमान ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित प्रभुशंकर शास्त्री व कमल शर्मा ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि शनिवार के दिन यानि शनि प्रदोष में यह पर्व मनाया जाएगा। उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और वरियान योग, वाशी योग, सुनफा योग और शंख योग भी रहेगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग- शाम 5:42 बजे से अगले दिन सुबह 7:05 बजे तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि मनाना शुभ माना गया है। महाशिवरात्रि पर शाम 7:35 मिनट से वरियान योग प्रारंभ होगा। जो अगले दिन रविवार दोपहर 3:18 मिनट तक रहेगा। ग्रह संयोग : इस दिन शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में, सूर्यदेव भी कुंभ, चंद्रमा भी कुंभ में विराजमान रहेंगे। यानी त्रिग्रही योग का निर्माण होगा।
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- महाशिवरात्रि का प्रथम पहर पूजन समय- 6.13 शाम 9.24 तक
- द्वितीय प्रहर पूजन समय- 9.24 शाम से लेकर 19 फरवरी को 12.35 दोपहर तक।
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजन समय- 12.35 दोपहर से 19 फरवरी 3.46 दोपहर तक।
- चतुर्थ पहर पूजन समय 03.46 शाम से 19 फरवरी को 6.56 शाम तक।
- व्रत पारण रविवार, 19 फरवरी को 6.56 से लेकर 3.24 शाम तक।
महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर मस्तक पर भस्म का तिलक और गले में रुद्राक्ष माला धारण करें।
मंदिर या घर, जिस जगह भी पूजन करना है, उस स्थान को साफ-स्वच्छ कर लें।
अगर शिवालय में जा रहे हैं तो शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन एवं शिव जी को नमस्कार करें। श्रद्धा पूर्वक व्रत का संकल्प लेते हुए शिव रात्रि व्रत में हाथ में लिए पुष्प, अक्षत, जल आदि अर्पित करें।
सफेद चंदन अथवा गोपी चंदन से शिवलिंग या प्रतिमा को तिलक लगाएं।
शिव जी को पुष्प अर्पण करते समय शिव स्तुति का पाठ करें या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
भांग, धतूरा, जायफल, फल, मिठाई, मीठा पान, इत्र अर्पित करें और खीर का भोग लगाएं।
दिन भर भगवान शिव का ध्यान करें एवं स्तुति करें। सायंकाल या रात के समय में पुन: शिव जी का विधिवत पूजन-अर्चन करें। रात के समय खीर का प्रसाद दूसरों को बांटें और प्रसाद रूपी खीर का सेवन कर पारण करें। रात्रि जागरण में शिव भजन, मंत्र, श्लोक, स्तोत्र, चालीसा आदि का पाठ अवश्य करें।
शिवरात्रि व्रत में क्या खाए
-साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़े का हलवा, कुट्टू के आटे की पूड़ी, सामा के चावल, आलू का हलवा, सेंधा नमक भोजन में उपयोग कर सकते है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि व्रत शनिवार को त्रयोदशी और चतुर्दशी के आने से विशेष संयोग में महाशिवरात्रि का जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस बार शनिवार से रविवार तक बीस घंटे 18 मिनट दुर्लभ संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि शनिवार के दिन शनि प्रदोष को यह त्योहार मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि का जलाभिषेक त्रयोदशी और चतुर्दशी को सुबह चार बजे से शिवालयों और घरों में शुरू हो जाएगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी-चतुर्दशी का विशेष संयोग बनने पर मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर शनिवार को फाल्गुन चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ शाम 8.02 बजे शुरू होकर चतुर्दशी तिथि का समापन 19 फरवरी रविवार को 4.18 शाम तक जलाभिषेक और पूजा-अर्चना चारों पहर होगी। शहर के बुढ़ाना रोड हनुमान ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित प्रभुशंकर शास्त्री व कमल शर्मा ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि शनिवार के दिन यानि शनि प्रदोष में यह पर्व मनाया जाएगा। उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और वरियान योग, वाशी योग, सुनफा योग और शंख योग भी रहेगा।
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सर्वार्थ सिद्धि योग- शाम 5:42 बजे से अगले दिन सुबह 7:05 बजे तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि मनाना शुभ माना गया है। महाशिवरात्रि पर शाम 7:35 मिनट से वरियान योग प्रारंभ होगा। जो अगले दिन रविवार दोपहर 3:18 मिनट तक रहेगा। ग्रह संयोग : इस दिन शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में, सूर्यदेव भी कुंभ, चंद्रमा भी कुंभ में विराजमान रहेंगे। यानी त्रिग्रही योग का निर्माण होगा।
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- महाशिवरात्रि का प्रथम पहर पूजन समय- 6.13 शाम 9.24 तक
- द्वितीय प्रहर पूजन समय- 9.24 शाम से लेकर 19 फरवरी को 12.35 दोपहर तक।
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजन समय- 12.35 दोपहर से 19 फरवरी 3.46 दोपहर तक।
- चतुर्थ पहर पूजन समय 03.46 शाम से 19 फरवरी को 6.56 शाम तक।
- व्रत पारण रविवार, 19 फरवरी को 6.56 से लेकर 3.24 शाम तक।
महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर मस्तक पर भस्म का तिलक और गले में रुद्राक्ष माला धारण करें।
मंदिर या घर, जिस जगह भी पूजन करना है, उस स्थान को साफ-स्वच्छ कर लें।
अगर शिवालय में जा रहे हैं तो शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन एवं शिव जी को नमस्कार करें। श्रद्धा पूर्वक व्रत का संकल्प लेते हुए शिव रात्रि व्रत में हाथ में लिए पुष्प, अक्षत, जल आदि अर्पित करें।
सफेद चंदन अथवा गोपी चंदन से शिवलिंग या प्रतिमा को तिलक लगाएं।
शिव जी को पुष्प अर्पण करते समय शिव स्तुति का पाठ करें या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
भांग, धतूरा, जायफल, फल, मिठाई, मीठा पान, इत्र अर्पित करें और खीर का भोग लगाएं।
दिन भर भगवान शिव का ध्यान करें एवं स्तुति करें। सायंकाल या रात के समय में पुन: शिव जी का विधिवत पूजन-अर्चन करें। रात के समय खीर का प्रसाद दूसरों को बांटें और प्रसाद रूपी खीर का सेवन कर पारण करें। रात्रि जागरण में शिव भजन, मंत्र, श्लोक, स्तोत्र, चालीसा आदि का पाठ अवश्य करें।
शिवरात्रि व्रत में क्या खाए
-साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़े का हलवा, कुट्टू के आटे की पूड़ी, सामा के चावल, आलू का हलवा, सेंधा नमक भोजन में उपयोग कर सकते है।