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Shamli News: कागजों में हाईटेक, हकीकत में धूल फांक रहे प्रोजेक्टर

Tue, 19 Aug 2025 12:57 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Aug 2025 12:57 AM IST
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High-tech on paper, but in reality, projectors are gathering dust
शहर के माजरा रोड ​स्थित क​न्या उच्च प्राथमिक स्कूल में कमरे में बंद पड़ी एलईडी। संवाद
सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास का सच :
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- पड़ताल में खुला राज, कहीं ताले में बंद, कहीं ऑफिस में सजावट, बच्चों को नहीं मिल रहा लाभ
बिल्लू मलिक

शामली। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को कान्वेंट स्कूल जैसी आधुनिक शिक्षा देने के लिए शासन ने स्मार्ट क्लास योजना शुरू की थी। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जनपद के अधिकांश उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाओं का संचालन दिखाया जा रहा है। लेकिन जब हकीकत की पड़ताल की गई तो तस्वीर बिल्कुल उलट निकली। कई जगह एलईडी और प्रोजेक्टर धूल फांकते मिले, कहीं ताले में बंद, तो कहीं शिक्षकों के दफ्तरों की शोभा बढ़ाते नजर आए।
बच्चों को आधुनिक शिक्षा का सपना दिखाने वाली स्मार्ट क्लास व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित हैं। जिम्मेदार अधिकारी इस सच्चाई से वाकिफ होने के बावजूद चुप्पी साधे हुए हैं।
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केस-1 : सिंभालका का स्कूल
गांव सिंभालका स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रोजेक्टर धूल खाता मिला। जिस कमरे में एलईडी लगाई गई, वहां ताला जड़ा था। कमरे में रसोई का सामान भरा हुआ था। इंचार्ज प्रधानाध्यापिका का कहना है कि बिजली की समस्या के चलते स्मार्ट क्लास का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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केस-2 : माजरा रोड कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय

यहां पिछले साल बच्चों की पढ़ाई के लिए नई एलईडी भेजी गई थी। लेकिन पड़ताल में पाया गया कि जिस कमरे में एलईडी लगाई गई, उसका ताला अधिकतर समय बंद रहता है। मौके पर भी ताला लगा था। प्रभारी प्रधानाध्यापक रविकांत ने कहा कि बीच-बीच में बच्चों को इससे पढ़ाया जाता है और कहानी सुनाई जाती है।

केस-3 : झाल का उच्च प्राथमिक विद्यालय
झाल में स्थिति और भी चौंकाने वाली है। यहां एलईडी बच्चों की कक्षा में न लगाकर शिक्षकों के कार्यालय में लगा दी गई है। एलईडी बंद पड़ी थी। वहीं तीन कंप्यूटर भी कार्यालय में रखे मिले। प्रधानाध्यापक अजय कुमार ने सफाई दी कि समय-समय पर बच्चों को इससे शिक्षण कार्य कराया जाता है।

--- अधिकारियों का मौन
विभागीय अधिकारियों की लापरवाही साफ झलक रही है। कहीं उपकरण बिजली न होने के कारण धूल फांक रहे हैं तो कहीं ताले में बंद पड़े हैं। कई स्कूलों में तो बच्चों ने कभी स्मार्ट क्लास देखी ही नहीं।


इन्होंने कहा
विभाग द्वारा स्कूलों में प्रोजेक्टर व एलईडी बच्चों की पढ़ाई के लिए दिए गए हैं, न कि उन्हें कार्यालय में रखने या बंद करने के लिए। पूरे जिले में स्कूलों की जांच कराई जाएगी और जहां लापरवाही है, वहां तत्काल सुधार कराया जाएगा। - लता राठौर, बीएसए
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