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कमजोर मानसून के डर से घट गया धान का रकबा
ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
Updated Wed, 08 Jun 2016 01:10 AM IST
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शामली। इस बार गिरते हुए जल स्तर और कमजोर मानसून के डर से जिले में 161 हेक्टेयर धान का रकबा कम हो गया है। वहीं पूसा बासमती 1509 प्रजाति बोने की कवायद शुरू हो गई है। जिला मुख्यालय को 110 कुंतल पूसा बासमती की बीज उपलब्ध हो गया है।
पिछले दो सालो में जिले में धान का रकबा बढ़ा था। गत वर्ष धान 19 हजार पांच सौ हेक्टेयर में बोया गया था। 24.98 कुंतल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन हुआ था। इस साल धान का रकबा 19 हजार 339 हेक्टेयर निर्धारित कर कृषि विभाग को लक्ष्य दिया गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल धान का 161 हेक्टेयर रकबा घट गया है।
धान का रकबा घटने का कारण कृषि विभाग कमजोर मानसून का डर और गिरता जलस्तर मान रहा है। गेहूं कटाई के बाद धान की बुवाई लिए खेत खाली छोड़ दिया जाता है और नर्सरी एक माह में तैयार की जाती है।
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जून के मध्य से लेकर अगस्त के प्रथम सप्ताह तक धान की रोपाई की जाती है। कमजोर मानसून और गिरते जल स्तर से धान की बुवाई पर प्रतिकूल असर पड़ता है। कृषि विभाग के उपनिदेशक हरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जिले में धान की बुवाई की तैयारी शुरू हो गई है। 1298 हेक्टेयर में धान की नर्सरी तैयार की जा रही है। पूसा 1509 धान की प्रजाति का 110 कुंतल बीज उपलब्ध हो गया है। उन्होंने बताया कि पूसा बासमती 115 से लेकर 120 दिन में तैयार हो जाती है।
ढेंचा का 50 कुंतल बीज किसानों को दिया जा चुका है। उड़द 455 हेक्टेयर, अरहर में बीस हेक्टेयर, तिल 23 हेक्टेयर में बोया जाएगा। उड़द का 12 कुंतल बीज उपलब्ध हो गया है। अगस्त माह में उड़द की बुवाई की जाएगी।
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पिछले दो सालो में जिले में धान का रकबा बढ़ा था। गत वर्ष धान 19 हजार पांच सौ हेक्टेयर में बोया गया था। 24.98 कुंतल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन हुआ था। इस साल धान का रकबा 19 हजार 339 हेक्टेयर निर्धारित कर कृषि विभाग को लक्ष्य दिया गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल धान का 161 हेक्टेयर रकबा घट गया है।
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धान का रकबा घटने का कारण कृषि विभाग कमजोर मानसून का डर और गिरता जलस्तर मान रहा है। गेहूं कटाई के बाद धान की बुवाई लिए खेत खाली छोड़ दिया जाता है और नर्सरी एक माह में तैयार की जाती है।
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जून के मध्य से लेकर अगस्त के प्रथम सप्ताह तक धान की रोपाई की जाती है। कमजोर मानसून और गिरते जल स्तर से धान की बुवाई पर प्रतिकूल असर पड़ता है। कृषि विभाग के उपनिदेशक हरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जिले में धान की बुवाई की तैयारी शुरू हो गई है। 1298 हेक्टेयर में धान की नर्सरी तैयार की जा रही है। पूसा 1509 धान की प्रजाति का 110 कुंतल बीज उपलब्ध हो गया है। उन्होंने बताया कि पूसा बासमती 115 से लेकर 120 दिन में तैयार हो जाती है।
ढेंचा का 50 कुंतल बीज किसानों को दिया जा चुका है। उड़द 455 हेक्टेयर, अरहर में बीस हेक्टेयर, तिल 23 हेक्टेयर में बोया जाएगा। उड़द का 12 कुंतल बीज उपलब्ध हो गया है। अगस्त माह में उड़द की बुवाई की जाएगी।