{"_id":"5a340ce34f1c1b86698c1cf5","slug":"farmers-stop-locking-down-lockout","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों ने तालाबंदी कर ऊन मिल बंद कराई ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों ने तालाबंदी कर ऊन मिल बंद कराई
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:26 PM IST
विज्ञापन
ऊन शुगर मिल के गेट पर पर ताला बंदी करते किसान ।
- फोटो : अमर उजाला
शामली में सुपीरियर फूड ग्रेंस प्राईवेट लिमिटेड ऊन चीनी मिल द्वारा बाहरी क्षेत्र का गन्ना खरीदने के विरोध में व पिछले साल का बकाया भुगतान न करने से गुस्साए किसानों ने राणा समूह की ऊन चीनी मिल पर प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। किसानों ने तालाबंदी करते हुए नारेबाजी करते मिल को बंद करा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे ऊन क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने सुपीरियर फूड ग्रेंस प्राईवेट लिमिटेड ऊन चीनी मिल गेट के बाहर शमियाना लगाकर बेमियादी धरना शुरू कर दिया। हंगामा करते हुए मिल की पेराई ठप कर दी। आरोप लगाया कि ऊन मिल पर पिछले साल के पेराई सत्र का 19 करोड़ से ज्यादा रुपया बकाया है। दूसरे प्रदेश से गन्ने की अवैध खरीद की जा रही है। किसानों ने दूसरे प्रदेश के बाहरी गन्ने की अवैध खरीद पर रोक लगाने की मांग की। आरोप लगाया कि ऊन क्षेत्र के किसान शामली कलक्ट्रेट में डीएम के नाम एडीएम को बृहस्पतिवार को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अधिकारी किसानों को दिए गए आश्वासन पर नहीं टिक पाए हैं। उधर, भारतीय किसान संगठन के मंडल अध्यक्ष यशपाल सिंह ने कहां कि जब किसानों की का समाधान नही हो जाता है, तब तक धरना जारी रहेगा। मौके पर ऊन, पिंडौरा, गागोर, खेड़ी, मुंडेट किसान नीटू, बिट्टू, रवि सिरोही, जगमेर सिंह, अजय, धीर सिंह, दारा सिंह, कपिल, लोकेश, यशपाल, रविंद्र, विकास, नरेंद्र, अंशुल, राजेंद्र, नीटू चेयरमैन, जगमेर, कपिल, अजय, मुकेश, नीरज राणा, जगत सिंह, सुरेंद्र, बीरसिंह सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे। अध्यक्षता सहेंद्र सिंह पिंडौरा और संचालन सतेंद्र ऊन ने किया।
वार्ता के बाद धरना समाप्त
जिला गन्ना अधिकारी अनिल भारती ने बताया कि रात आठ बजे में ऊन चीनी मिल पर किसानों को बेमियादी धरना मिल प्रबंधन के बीच वार्ता के बाद समाप्त हो गया है। किसानों का पिछले साल का बकाया भुगतान शीघ्र किया जाएगा। ऊन मिल के गन्ना प्रबंधक अनिल अहलावत ने बताया कि पिछले साल का 19 करोड़ 50 लाख रुपये का बकाया गन्ना अगले सप्ताह तक कर दिया जाएगा। उन्होंने किसानों से रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना लाने का अनुरोध किया गया है। मिल किसी भी कीमत पर अस्वीकृत प्रजाति नहीं खरीदेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन