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Shamli News: जीएसटी के गणित में उलझे शहर के व्यापारी, नहीं मंगा रहे सामान
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले ही जिले के व्यापारी जीएसटी के गणित में उलझे नजर आए। सोमवार से जीएसटी की नई दरें लागू हो जाएंगी। इससे बाजार में सामान की कीमतों का समीकरण बदलने वाला है। इसी बदलाव ने व्यापारियों की तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है। व्यापारी असमंजस में हैं कि मौजूदा दर पर माल मंगवाएं या नई दरों का इंतजार करें।
अर्थ शास्त्री नीना छोकरा के मुताबिक दुर्गा पूजा से दिवाली तक जनपद के बाजारों में लगभग 100 करोड़ से ऊपर का कारोबार होता है। कपड़े, सजावटी सामान, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक्स, पूजा सामग्री से लेकर हर क्षेत्र में रौनक रहती है। इस बार उपभोक्ता खर्च में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, लेकिन व्यापारियों की उलझन यह है कि 22 सितंबर के बाद जीएसटी दरें घटने वाली हैं। ऐसे में अगर वे अभी स्टॉक खरीदते हैं तो उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा, लेकिन माल बेचना कम दर पर होगा। इससे उनकी पूंजी फंस सकती है और आईसीटी का समायोजन करना भी चुनौतीपूर्ण होगा। विशेषज्ञ ने बताया कि यदि व्यापारी उच्च दर पर माल खरीदते हैं और बाद में निम्न दर पर बेचते हैं, तो आईटीसी समायोजन में अंतर आएगा, क्योकि जो आईटीसी 28 प्रतिशत पर मिला है, उसे 18 प्रतिशत पर समायाेजित करना होगा। शेष 10 प्रतिशत क्रेडिट लेजर में फंसा रह जाएगा, जिसका उपयोग करना मुश्किल होगा।
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शामली। त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले ही जिले के व्यापारी जीएसटी के गणित में उलझे नजर आए। सोमवार से जीएसटी की नई दरें लागू हो जाएंगी। इससे बाजार में सामान की कीमतों का समीकरण बदलने वाला है। इसी बदलाव ने व्यापारियों की तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है। व्यापारी असमंजस में हैं कि मौजूदा दर पर माल मंगवाएं या नई दरों का इंतजार करें।
अर्थ शास्त्री नीना छोकरा के मुताबिक दुर्गा पूजा से दिवाली तक जनपद के बाजारों में लगभग 100 करोड़ से ऊपर का कारोबार होता है। कपड़े, सजावटी सामान, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक्स, पूजा सामग्री से लेकर हर क्षेत्र में रौनक रहती है। इस बार उपभोक्ता खर्च में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, लेकिन व्यापारियों की उलझन यह है कि 22 सितंबर के बाद जीएसटी दरें घटने वाली हैं। ऐसे में अगर वे अभी स्टॉक खरीदते हैं तो उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा, लेकिन माल बेचना कम दर पर होगा। इससे उनकी पूंजी फंस सकती है और आईसीटी का समायोजन करना भी चुनौतीपूर्ण होगा। विशेषज्ञ ने बताया कि यदि व्यापारी उच्च दर पर माल खरीदते हैं और बाद में निम्न दर पर बेचते हैं, तो आईटीसी समायोजन में अंतर आएगा, क्योकि जो आईटीसी 28 प्रतिशत पर मिला है, उसे 18 प्रतिशत पर समायाेजित करना होगा। शेष 10 प्रतिशत क्रेडिट लेजर में फंसा रह जाएगा, जिसका उपयोग करना मुश्किल होगा।
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