UP: "योगी को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहती एआईएमआईएम", ओवैसी ने सपा-कांग्रेस पर भी साधा निशाना
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सपा, कांग्रेस, बसपा और आप पर निशाना साधाते हुए कहा, जब तक अब्दुल नेता नहीं बनेगा, मसलों का हल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहती। कहा जो दल योगी आदित्यनाथ को दोबारा मुख्यमंत्री बनने से रोकना चाहते हैं, एआईएमआईएम उनके साथ जाने को तैयार है।
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कैराना में तितरवाड़ा रोड पर मैदान में आयोजित जनसभा में पहुंचे असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया से बातचीत के दौरान प्रदेश की राजनीति में अल्पसंख्यक समाज की भागीदारी और नेतृत्व का मुद्दा उठाते हुए कहा कि समाज के अपने राजनीतिक नेतृत्व के बिना रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याओं और जमीन से जुड़े विवादों का हल नहीं होगा।
सपा-कांग्रेस से सवाल क्यों नहीं
ओवैसी ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने करीब 380, कांग्रेस ने 400, बसपा ने 400 और आम आदमी पार्टी ने करीब 300 उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद इन पार्टियों से यह सवाल नहीं किया जाता कि उनके चुनाव लड़ने से किसे फायदा होगा। उन्होंने सवाल किया कि एआईएमआईएम के चुनाव लड़ने पर ही उसे निशाना क्यों बनाया जाता है। उन्होंने भाजपा की वर्ष 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 में हुई चुनावी जीत का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए।
अन्य राजनीतिक दलों को भी घेरा
ओवैसी ने बिहार में एआईएमआईएम के चार विधायकों के दूसरे दल में जाने और महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल अलग-अलग घटनाओं पर अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में सभी दलों के लिए एक समान मापदंड होना चाहिए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि कुछ दल चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समाज उन्हें वोट दे, लेकिन अपने अन्य मुद्दों पर सवाल न उठाए।
मकान, मस्जिद, रोज़गार, किसानों पर भी छेड़ी बात
ओवैसी ने मकानों पर कार्रवाई, मस्जिदों से जुड़े विवाद और लोगों को जेल भेजे जाने के मामलों का भी जिक्र किया। रामपुर में आजम खान का जिक्र करते हुए कहा कि यदि वे उनसे मिलने नहीं जाते तो क्या दूसरे राजनीतिक दल उनसे मिलने जाते। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के मुद्दों को केवल चुनाव तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याओं, जमीन के विवादों और इबादतगाहों से जुड़े मामलों पर भी राजनीतिक दलों को आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समाज उन्हें वोट दे, लेकिन अपने अन्य मुद्दों पर सवाल न उठाए।