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पृथ्वीराज चौहान के गुर्जर होने का दावा
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अमर उजाला ब्यूरो
कैराना (शामली)। भगवान हनुमान के बाद अब हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जाति को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने दावा किया कि पृथ्वीराज चौहान राजपूत नहीं बल्कि गुर्जर थे।
रविवार को कलस्यान चौपाल पर अखिल भारतीय वीर गुजर्र महासभा की प्रेसवार्ता में प्रोफेसर डा. जितेश ने कहा कि बारहवीं शताब्दी में मुगल राज के दौरान गुर्जर समाज का पतन हो गया और राजपूत समाज का उत्थान हुआ। इतिहास का अध्ययन करें तो अग्निकुंड की चारों शाखाएं परमार, प्रतिहार, चालुक्य और चौहान गुर्जर थीं। विदेशी आक्रांताओं से लड़ने और आर्यावर्त की रक्षा के लिए राजवंशों ने अग्नि के समक्ष शपथ ली थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यशराज बैनर द्वारा बनाई जा रही फिल्म गुर्जरों को अपमानित करती है, क्योंकि हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान को राजपूत जाति से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी साहित्यकारों ने सभी अग्निवंशियों को गुर्जर माना हैं। विदेशी लेखक जयानक ने अपनी पुस्तक पृथ्वीराज विजय महाकाव्यम में स्पष्ट लिखा है कि पृथ्वीराज गुर्जर थे। इनके अलावा बारहवीं ही शताब्दी की लिखी पुस्तकों में भी उन्हें गुजर्र सिद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि पृथ्वीराज चौहान को फिल्म में गुजर्र योद्धा एवं कुशल शासक नहीं बताया गया, तो गुर्जर समाज फिल्म का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध की रणनीति तय करेगा। इस दौरान महासभा के जिलाध्यक्ष रवि चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष अवनीश चौहान, जिला पंचायत सदस्य अनुज चौहान, जीवा, अमित, राजेश प्रधान, शिवकुमार, अंकुर आदि भी मौजूद थे।
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कैराना (शामली)। भगवान हनुमान के बाद अब हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जाति को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने दावा किया कि पृथ्वीराज चौहान राजपूत नहीं बल्कि गुर्जर थे।
रविवार को कलस्यान चौपाल पर अखिल भारतीय वीर गुजर्र महासभा की प्रेसवार्ता में प्रोफेसर डा. जितेश ने कहा कि बारहवीं शताब्दी में मुगल राज के दौरान गुर्जर समाज का पतन हो गया और राजपूत समाज का उत्थान हुआ। इतिहास का अध्ययन करें तो अग्निकुंड की चारों शाखाएं परमार, प्रतिहार, चालुक्य और चौहान गुर्जर थीं। विदेशी आक्रांताओं से लड़ने और आर्यावर्त की रक्षा के लिए राजवंशों ने अग्नि के समक्ष शपथ ली थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यशराज बैनर द्वारा बनाई जा रही फिल्म गुर्जरों को अपमानित करती है, क्योंकि हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान को राजपूत जाति से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी साहित्यकारों ने सभी अग्निवंशियों को गुर्जर माना हैं। विदेशी लेखक जयानक ने अपनी पुस्तक पृथ्वीराज विजय महाकाव्यम में स्पष्ट लिखा है कि पृथ्वीराज गुर्जर थे। इनके अलावा बारहवीं ही शताब्दी की लिखी पुस्तकों में भी उन्हें गुजर्र सिद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि पृथ्वीराज चौहान को फिल्म में गुजर्र योद्धा एवं कुशल शासक नहीं बताया गया, तो गुर्जर समाज फिल्म का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध की रणनीति तय करेगा। इस दौरान महासभा के जिलाध्यक्ष रवि चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष अवनीश चौहान, जिला पंचायत सदस्य अनुज चौहान, जीवा, अमित, राजेश प्रधान, शिवकुमार, अंकुर आदि भी मौजूद थे।
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