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एंटी भूमाफिया पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही
Updated Mon, 23 Apr 2018 11:17 PM IST
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एंटी भूमाफिया पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही
झिंझाना। शासन ने एंटी भू माफिया टास्क फोर्स का गठन करके अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जो व्यवस्था बनाई, उसे ठीक तरह से लागू करने में लेखपाल मनमानी कर रहे हैं। खासकर एंटी भू माफिया के तहत मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज की जा रही शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरती जा रही हैं, जिस कारण लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। तहसील कैराना और तहसील ऊन क्षेत्र के सामने आए हैं। इनमें कवलजीत कौर निवासी गांव भाउ माजरा तहसील ऊन ने पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी उसकी 117 बीघा भूमि पर परगना बिड़ौली में है। इस पर गांव यूसुफपुर चौतरा निवासी आठ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। शिकायत दर्ज कराने के 15 दिन बाद हल्का लेखपाल ने पोर्टल पर रिपोर्ट में अपनी आख्या में लिख दिया कि वादी को मौके पर बुलाया, लेकिन वह नहीं आईं। दोबारा शिकायत दर्ज कराई गई, तो फिर लेखपाल ने रिपोर्ट में लिख दिया कि सक्षम न्यायालय में वाद दायर कर अपनी जमीन पर कब्जा प्राप्त करें। कवलजीत पक्ष से पैरवी करने वाले सतपाल मुखिया ने बताया कि जब शासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अवैध कब्जे हटवाए जाएं, तो फिर पोर्टल पर ऐसी आख्या लगाने का औचित्य नहीं है। उन्होंने बताया कि कवलजीत के अलावा इदरीश निवासी गांव गंदराऊ ने भी अपनी आठ बीघा भूमि और ज्ञानवती निवासी झिंझाना आदि ने भी अपनी भूमि दबंगों के कब्जे से मुक्त कराने के लिए पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराईं, लेकिन एंटी भू माफिया अभियान के तहत इनमें से किसी भी शिकायत पर सही निस्तारण नहीं हुआ और न अवैध कब्जे हटाए गए। उधर, अपर जिलाधिकारी केबी सिंह का कहना है कि एंटी भूमाफिया अभियान के तहत सरकारी भूमि से अवैध कब्जे प्राथमिकता से हटवाए गए। भूमि विवाद के जो मामले न्यायालय में विचाराधीन होते हैं, उनमें तत्काल मौके पर पहुंचकर कब्जे नहीं हटाए जा सकते हैं। इसके लिए शिकायतकर्ता को न्यायालय में ही वाद दायर करना होता है। न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई होती है।
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झिंझाना। शासन ने एंटी भू माफिया टास्क फोर्स का गठन करके अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जो व्यवस्था बनाई, उसे ठीक तरह से लागू करने में लेखपाल मनमानी कर रहे हैं। खासकर एंटी भू माफिया के तहत मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज की जा रही शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरती जा रही हैं, जिस कारण लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। तहसील कैराना और तहसील ऊन क्षेत्र के सामने आए हैं। इनमें कवलजीत कौर निवासी गांव भाउ माजरा तहसील ऊन ने पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी उसकी 117 बीघा भूमि पर परगना बिड़ौली में है। इस पर गांव यूसुफपुर चौतरा निवासी आठ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। शिकायत दर्ज कराने के 15 दिन बाद हल्का लेखपाल ने पोर्टल पर रिपोर्ट में अपनी आख्या में लिख दिया कि वादी को मौके पर बुलाया, लेकिन वह नहीं आईं। दोबारा शिकायत दर्ज कराई गई, तो फिर लेखपाल ने रिपोर्ट में लिख दिया कि सक्षम न्यायालय में वाद दायर कर अपनी जमीन पर कब्जा प्राप्त करें। कवलजीत पक्ष से पैरवी करने वाले सतपाल मुखिया ने बताया कि जब शासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अवैध कब्जे हटवाए जाएं, तो फिर पोर्टल पर ऐसी आख्या लगाने का औचित्य नहीं है। उन्होंने बताया कि कवलजीत के अलावा इदरीश निवासी गांव गंदराऊ ने भी अपनी आठ बीघा भूमि और ज्ञानवती निवासी झिंझाना आदि ने भी अपनी भूमि दबंगों के कब्जे से मुक्त कराने के लिए पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराईं, लेकिन एंटी भू माफिया अभियान के तहत इनमें से किसी भी शिकायत पर सही निस्तारण नहीं हुआ और न अवैध कब्जे हटाए गए। उधर, अपर जिलाधिकारी केबी सिंह का कहना है कि एंटी भूमाफिया अभियान के तहत सरकारी भूमि से अवैध कब्जे प्राथमिकता से हटवाए गए। भूमि विवाद के जो मामले न्यायालय में विचाराधीन होते हैं, उनमें तत्काल मौके पर पहुंचकर कब्जे नहीं हटाए जा सकते हैं। इसके लिए शिकायतकर्ता को न्यायालय में ही वाद दायर करना होता है। न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई होती है।