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विश्व मिर्गी दिवस आज : भूत-प्रेत का नहीं, बीमारी है मिर्गी
Mon, 10 Feb 2025 12:57 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 10 Feb 2025 12:57 AM IST
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शाहजहांपुर। शरीर अकड़ना, झटके आना और अचेतावस्था में जाना भूत-प्रेत का साया नहीं होता, बल्कि यह मस्तिष्क की बीमारी है। इसे मिर्गी कहते हैं। इसका बिरवा या देसी नुस्खे से उपचार संभव नहीं है। नियमित रूप से दवा के सेवन से ही मरीज स्वस्थ हो सकते हैं। उपचार नहीं कराने पर स्थिति गंभीर हो जाती है।
विश्व मिर्गी दिवस आज है। मिर्गी के रोग से ग्रस्त व्यक्ति को देखकर लोग भूत-प्रेत का साया समझकर झाड़-फूंक कराने लगते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मिर्गी से पीड़ित पांच से छह मरीज रोजाना ही पहुंचते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि तंत्र-मंत्र कराने से मरीज की जान जा सकती है। यह मस्तिष्क का रोग है।
वंशानुगत, खून के रास्ते दिमाग में कीड़ा पहुंचने और बुखार के बाद दौरे पड़ने लग जाते हैं। बड़ों की अपेक्षा यह बच्चों में अधिक है। इसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर कहते हैं। दो से तीन साल तक उपचार कराने पर मरीज ठीक हो जाता है।
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ये हैं लक्षण
-पूरे शरीर में अचानक से झटके आना। अचानक से अचेतावस्था में जाना। हाथ-पैर कड़े हो जाना।
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ये बरतें सावधानी
-दवा शुरू होने पर लाभ होने पर बंद नहीं करें। दौरा पड़ने पर मुंह में पानी नहीं डालें। हाथ-पैर अकड़े होने पर सीधा नहीं करें। मुंह से अधिक झाग आने पर बायीं ओर करवट कर लिटा दें। गिरने पर सुरक्षित स्थान पर लिटाकर डॉक्टर से संपर्क करें।
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मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजिस्ट का पद ही स्वीकृत नहीं
-प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजिस्ट का पद ही स्वीकृत नहीं है, जबकि जिले के अलावा आसपास के जनपदों से भी मरीज आते हैं। उनको बरेली, लखनऊ और दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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विश्व मिर्गी दिवस आज है। मिर्गी के रोग से ग्रस्त व्यक्ति को देखकर लोग भूत-प्रेत का साया समझकर झाड़-फूंक कराने लगते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मिर्गी से पीड़ित पांच से छह मरीज रोजाना ही पहुंचते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि तंत्र-मंत्र कराने से मरीज की जान जा सकती है। यह मस्तिष्क का रोग है।
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वंशानुगत, खून के रास्ते दिमाग में कीड़ा पहुंचने और बुखार के बाद दौरे पड़ने लग जाते हैं। बड़ों की अपेक्षा यह बच्चों में अधिक है। इसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर कहते हैं। दो से तीन साल तक उपचार कराने पर मरीज ठीक हो जाता है।
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ये हैं लक्षण
-पूरे शरीर में अचानक से झटके आना। अचानक से अचेतावस्था में जाना। हाथ-पैर कड़े हो जाना।
ये बरतें सावधानी
-दवा शुरू होने पर लाभ होने पर बंद नहीं करें। दौरा पड़ने पर मुंह में पानी नहीं डालें। हाथ-पैर अकड़े होने पर सीधा नहीं करें। मुंह से अधिक झाग आने पर बायीं ओर करवट कर लिटा दें। गिरने पर सुरक्षित स्थान पर लिटाकर डॉक्टर से संपर्क करें।
मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजिस्ट का पद ही स्वीकृत नहीं
-प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजिस्ट का पद ही स्वीकृत नहीं है, जबकि जिले के अलावा आसपास के जनपदों से भी मरीज आते हैं। उनको बरेली, लखनऊ और दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।