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लहू किसका बहा इससे उन्हें मतलब नहीं होता

Tue, 18 Oct 2016 12:17 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर Updated Tue, 18 Oct 2016 12:17 AM IST
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पुवायां। श्री रामलीला मेला समिति की ओर से रविवार रात मेला परिसर में कवि सम्मेलन का किया गया। खुटार के राजा विजय शाह जूदेव ने राजमाता मृदुला सिंह की उपस्थिति में मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। अध्यक्षता सहायक कमिश्नर वाणिज्य गोवर्धनलाल ने की। 
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शाहजहांपुर के चंद्रप्रकाश बाजपेयी ने सुनाया
जन-जन के मन में रण की ज्वाला प्रचंड कर देंगे,
खंड-खंड भारत भू को फिर से अखंड कर देंगे। 
उन्नाव से आए केडी शर्मा ने सुनाया
कहां जा रही धर्म संस्कृति यहु द्याखौ कुदरत का खेल,
साधू संत, महंतौ ब्याचैं, शैंपू, साबुन, कड़ुवा तेल।
इलाहाबाद से आए राधेश्याम भारती ने सुनाया
लड़की किसी लड़के से प्यार करने से पहले,
देखेगी लैपटॉप पर कितना है फायदा।
लखीमपुर के फारूख सरल ने सुनाया
भाषा, धर्म, जाति वाली मत इस पर छाप लगाना
राष्ट्र एकता वाला ऐसा गहरा रंग चढ़ाना
उसे ओढ़ कर हम सब लागें केवल हिंदुस्तानी
सुहानी रंग दे चुन्नी, रंग दे रंगरेजवा सुहानी रंग दे।
गाजीपुर से आई सुप्रिया सिंह ने सुनाया
खिजा के बाद जो आती है वो बहार हूं मैं,
मुझे गले लगा लो तुम्हारा प्यार हूं मैं।
खीरी के नवल सुधांशु ने सुनाया
तुम्हारी शाम में महफिल हमेशा मुस्कराती है,
हमारी शाम तो तन्हाइयों में बीत जाती है। 
एहतिशाम हुसैन ने सुनाया
जहां गुजरा था बचपन घर वो बस्ती भूल जाते हैं,
बुलंदी शोहरतों की पाके पस्ती भूल जाते हैं।
नहीं साया शजर का धूप है दस्तार पर उनकी,
बुजुर्गों की जो अपने सरपरस्ती भूल जाते हैं। 
उत्तराखंड से आए डॉ. मनोज आर्य ने सुनाया
कोई मंदिर, कोई मस्जिद या कोई रब नहीं होता
दरिंदों का कभी अपना कोई मजहब नहीं होता
तबाही करने वालों का महज मकसद तबाही है
लहू किसका बहा इससे उन्हें मतलब नहीं होता।
लखनऊ के अभय सिंह ने सुनाया
दुख पहुंचाकर ताली देना अभिव्यक्ति का अर्थ नहीं,
भारत मां को गाली देना अभिव्यक्ति का अर्थ नहीं।
कुंवर जावेद ने सुनाया
वह लोग साहिबे कुरान हो नहीं सकते,
किसी भी धर्म की पहचान हो नहीं सकते।
जो उग्रवाद को यारों जिहाद कहते हैं,
वह और कुछ हैं मुसलमान हो नहीं सकते।
बाराबंकी के विकास बौखल सहित कई अन्य कवियों ने भी कविता पाठ किया। सुबह चार बजे तक चले कवि सम्मेलन में कवियों ने कविता पाठ से श्रोताओं की तालियां बटोरीं। राजा विजयशाह जूदेव ने मेले में उत्कृष्ट कार्य के लिए एसआई मनोज सहरावत और उनके सहयोगियों को सम्मानित किया। आयोजन में मेला कमेटी के तमाम सदस्यों का योगदान रहा।
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