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Shahjahanpur News: सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद की रफ्तार सुस्त, किसान परेशान
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रोजा मंडी में खरीद केंद्रों के बाहर लगा व्यापारियों का धान पर नहीं दिखे प्रभारी। संवाद
शाहजहांपुर। बाढ़ और बारिश से फसल को हुए नुकसान के बाद अब सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। जिले में कई केंद्रों पर खरीद की रफ्तार धीमी है। कहीं किसान टोकन लेकर तौल का इंतजार कर रहे हैं तो कहीं केंद्रों पर प्रभारी और जरूरी व्यवस्थाएं तक पूरी नहीं हैं। नमी और मानक का हवाला देकर धान लौटाए जाने से परेशान किसान आढ़तियों को कम दाम पर उपज बेचने के लिए मजबूर हैं।
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पुवायां : टोकन लेकर घूम रहे किसान
पुवायां। मंडी में सरकारी धान खरीद की स्थिति खराब है। किसानों के पास धान लगभग समाप्त हो चुका है और आलू की बोआई के लिए कई किसान अपनी उपज आढ़तों व राइस मिलों को बेच चुके हैं। इसके बावजूद सरकारी केंद्रों पर खरीद की गति धीमी बनी हुई है।
गांव कुंवरपुर जप्ती निवासी अनुज मिश्रा ने बताया कि उनके पिता प्रेमपाल के नाम 12 अक्तूबर का टोकन है। धान क्रय केंद्र पर पड़ा है, लेकिन लगातार चक्कर लगाने के बाद भी तौल नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति क्विंटल 200 से 250 रुपये तक वसूले जा रहे हैं और सांठगांठ वालों की तौल पहले हो रही है। उनका यह भी आरोप है कि छुट्टा पशुओं ने आधे से अधिक धान खा लिया है।
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मंडी में आरएफसी के नौ और 10 नंबर केंद्र अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। केंद्र संख्या एक पर तीन किसानों का 280 क्विंटल, तीन पर तीन किसानों का 144 क्विंटल, दो पर पांच किसानों का 400 क्विंटल और चार पर चार किसानों का 250 क्विंटल धान खरीदा गया है। केंद्र पांच और आठ पर 100 क्विंटल खरीद बताई गई है। केंद्र छह और सात के प्रभारी विमल कुमार अवकाश पर थे। बुधवार को 170 क्विंटल धान खरीदा गया, लेकिन कागजी प्रक्रिया पूरी न होने से दर्ज नहीं हो सका।
किसानों का कहना है कि केंद्रों पर नमी का हवाला देकर भी उन्हें लौटाया जा रहा है। डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय का मोबाइल शाम पांच बजे बंद मिला। केंद्रों के बैनर पर समस्या के लिए उनका नंबर दर्ज है। एसडीएम सदानंद सरोज ने बताया कि कई दिनों के अवकाश के बाद केंद्र खुले हैं। बृहस्पतिवार को निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी।
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रोजा : ट्राॅलियां पहुंचीं, कई केंद्रों पर खरीद नहीं
रोजा। मंडी समिति परिसर में आरएफसी के चार क्रय केंद्रों के बाहर किसानों की ट्राॅलियां पहुंचीं, लेकिन खरीद नहीं हो सकी। किसानों को सैंपल लेकर दूसरे एजेंसियों के केंद्रों पर जाने की सलाह दी गई। कई केंद्रों पर व्यापारियों का धान पड़ा होने से किसानों की ट्राॅलियां अंदर नहीं पहुंच सकीं।
आरएफसी के केंद्र पांच और छह तथा नेफेड के दो केंद्रों पर प्रभारी नियुक्त नहीं हुए हैं। कुछ केंद्र प्रभारी मौजूद नहीं थे। कई केंद्रों पर नमी मापक यंत्र और जरूरी रजिस्टर भी नहीं मिले। बैठने और पानी की व्यवस्था भी अधूरी थी।
मंडी सचिव के अनुसार एक से 20 अक्तूबर तक करीब 8.56 लाख क्विंटल धान मंडी में आ चुका है। एएमओ सुजीत कुमार ने व्यापारियों का धान हटवाकर गेट पर नमी जांच और टोकन व्यवस्था लागू कराने की बात कही। संवाद
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तिलहर में नमी बताकर लौटाने का आरोप
तिलहर। मंडी समिति में 12 अक्तूबर से शुरू हुए 12 सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद को लेकर किसान परेशान हैं। डभौरा के किसान रामदास और आदेश ने बताया कि बाढ़ और बारिश से नुकसान के बाद बची फसल लेकर केंद्र पहुंचे, लेकिन नमी और मानक का हवाला देकर खरीद से इन्कार कर दिया गया। मजबूरी में उन्हें निजी दुकानदारों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ा। एसडीएम आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि यदि मानक के अनुरूप धान नहीं होने के कारण खरीद प्रभावित है तो मंडी सचिव से जानकारी ली जाएगी। संवाद
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पुवायां : टोकन लेकर घूम रहे किसान
पुवायां। मंडी में सरकारी धान खरीद की स्थिति खराब है। किसानों के पास धान लगभग समाप्त हो चुका है और आलू की बोआई के लिए कई किसान अपनी उपज आढ़तों व राइस मिलों को बेच चुके हैं। इसके बावजूद सरकारी केंद्रों पर खरीद की गति धीमी बनी हुई है।
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गांव कुंवरपुर जप्ती निवासी अनुज मिश्रा ने बताया कि उनके पिता प्रेमपाल के नाम 12 अक्तूबर का टोकन है। धान क्रय केंद्र पर पड़ा है, लेकिन लगातार चक्कर लगाने के बाद भी तौल नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति क्विंटल 200 से 250 रुपये तक वसूले जा रहे हैं और सांठगांठ वालों की तौल पहले हो रही है। उनका यह भी आरोप है कि छुट्टा पशुओं ने आधे से अधिक धान खा लिया है।
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मंडी में आरएफसी के नौ और 10 नंबर केंद्र अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। केंद्र संख्या एक पर तीन किसानों का 280 क्विंटल, तीन पर तीन किसानों का 144 क्विंटल, दो पर पांच किसानों का 400 क्विंटल और चार पर चार किसानों का 250 क्विंटल धान खरीदा गया है। केंद्र पांच और आठ पर 100 क्विंटल खरीद बताई गई है। केंद्र छह और सात के प्रभारी विमल कुमार अवकाश पर थे। बुधवार को 170 क्विंटल धान खरीदा गया, लेकिन कागजी प्रक्रिया पूरी न होने से दर्ज नहीं हो सका।
किसानों का कहना है कि केंद्रों पर नमी का हवाला देकर भी उन्हें लौटाया जा रहा है। डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय का मोबाइल शाम पांच बजे बंद मिला। केंद्रों के बैनर पर समस्या के लिए उनका नंबर दर्ज है। एसडीएम सदानंद सरोज ने बताया कि कई दिनों के अवकाश के बाद केंद्र खुले हैं। बृहस्पतिवार को निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी।
रोजा : ट्राॅलियां पहुंचीं, कई केंद्रों पर खरीद नहीं
रोजा। मंडी समिति परिसर में आरएफसी के चार क्रय केंद्रों के बाहर किसानों की ट्राॅलियां पहुंचीं, लेकिन खरीद नहीं हो सकी। किसानों को सैंपल लेकर दूसरे एजेंसियों के केंद्रों पर जाने की सलाह दी गई। कई केंद्रों पर व्यापारियों का धान पड़ा होने से किसानों की ट्राॅलियां अंदर नहीं पहुंच सकीं।
आरएफसी के केंद्र पांच और छह तथा नेफेड के दो केंद्रों पर प्रभारी नियुक्त नहीं हुए हैं। कुछ केंद्र प्रभारी मौजूद नहीं थे। कई केंद्रों पर नमी मापक यंत्र और जरूरी रजिस्टर भी नहीं मिले। बैठने और पानी की व्यवस्था भी अधूरी थी।
मंडी सचिव के अनुसार एक से 20 अक्तूबर तक करीब 8.56 लाख क्विंटल धान मंडी में आ चुका है। एएमओ सुजीत कुमार ने व्यापारियों का धान हटवाकर गेट पर नमी जांच और टोकन व्यवस्था लागू कराने की बात कही। संवाद
तिलहर में नमी बताकर लौटाने का आरोप
तिलहर। मंडी समिति में 12 अक्तूबर से शुरू हुए 12 सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद को लेकर किसान परेशान हैं। डभौरा के किसान रामदास और आदेश ने बताया कि बाढ़ और बारिश से नुकसान के बाद बची फसल लेकर केंद्र पहुंचे, लेकिन नमी और मानक का हवाला देकर खरीद से इन्कार कर दिया गया। मजबूरी में उन्हें निजी दुकानदारों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ा। एसडीएम आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि यदि मानक के अनुरूप धान नहीं होने के कारण खरीद प्रभावित है तो मंडी सचिव से जानकारी ली जाएगी। संवाद

रोजा मंडी में खरीद केंद्रों के बाहर लगा व्यापारियों का धान पर नहीं दिखे प्रभारी। संवाद