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बंडा में भी हो सकती है भौरखेड़ा जिगनिया जैसी घटना

Wed, 12 Oct 2016 11:39 PM IST
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 12 Oct 2016 11:39 PM IST
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 बंडा ग्राम पंचायत में भी हालात भौरखेड़ा जिगनिया जैसे हैं। यहां भी प्रधान और उनका विरोधी खेमा कई बार आमने-सामने आ चुके हैं लेकिन पुलिस इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। पुलिस ने भौरखेड़ा जिगनिया के प्रधान देवनरायन गंगवार की शिकायत को भी गंभीरता से नहीं लिया था। देवनरायन ने दो महीना पहले ही अपनी हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस को तहरीर दी थी लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजतन मंगलवार को देवनरायन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में सपा के जिला सचिव राजीव गंगवार सहित छह लोग नामजद कराए गए हैं।
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बंडा ग्राम पंचायत में भी स्थिति भौरखेड़ा जिगनिया की तरह ही तनावपूर्ण है। यहां साबरी बेगम प्रधान हैं। ग्राम पंचायत की कई बार खुली बैठक होने के बाद भी समितियों का गठन नहीं हो सका है। एक बार समितियों के गठन की कोशिश हुई तो दूसरे पक्ष के लोगों ने फर्जी हस्ताक्षर कर समितियों के गठन का आरोप लगाते हुए कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
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एक अक्तूबर को बंडा के सुनासिर नाथ इंटर कॉलेज में ग्राम पंचायत की खुली बैठक में प्रधान पक्ष और विरोधी गुट के ग्राम पंचायत सदस्य ओमवीर सिंह के बीच विवाद हो गया था। इसमें भी बंडा पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। सूचना के बाद भी पुलिस ने बैठक को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं समझी, जिससे बवाल बढ़ गया और दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर फायरिंग का का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। पुलिस ने प्रधान साबरी बेगम के पति मोहम्मद इसहाक की तहरीर पर ओमवीर सिंह सहित चार लोगों के खिलाफ हत्या की कोशिश की रिपोर्ट दर्ज की थी, लेकिन ओमवीर सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की। एक अक्तूबर की रात में ही नामजद ओमवीर सिंह, कृपाल सिंह, बलराम सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था। 
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दो अक्तूबर को बंडा में ओमवीर सिंह के पक्ष में तमाम संगठनों ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए छह घंटे तक चक्का जाम किया था। इसके बावजूद नामजद लोगों को जेल भेज दिया गया। एसडीएम जयपाल सिंह और सीओ अरुण कुमार ने जाम लगा रहे लोगों को न्याय का भरोसा देकर जाम खुलवाया था, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बंडा में दोनों पक्षों के बीच स्थिति बेहद तनावपूर्ण है और आगे किसी भी समय बवाल होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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