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अधिवक्ता, उनकी पत्नी और भाई को उम्रकैद
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Wed, 29 Jun 2016 12:10 AM IST
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22 वर्ष पहले प्रेम संबंध को लेकर शहर के मोहल्ला भारद्वाज कालोनी में हुई हत्या के एक मामले में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एहसानुल्ला खान ने सुनवाई पूरी करने के बाद मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया। उन्होंने अधिवक्ता विनय कुमार सिंह, उनकी पत्नी मीना उर्फ मीनाक्षी और भाई विनोद कुमार सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विनय व मीना पर सवा दो-सवा दो लाख और विनोद को 1 लाख 25 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माने की धनराशि में बतौर प्रतिकर एक लाख रुपये वादी सुरेश नरायन श्रीवास्तव को दिलाए जाने का आदेश दिया है।
यह था मामला
सुरेश नरायन श्रीवास्तव का पुत्र आलोक कुमार और अधिवक्ता विनय कुमार सिंह का भाई विनोद कुमार सिंह एक साथ में पढ़ते थे। इसी के चलते विनय कुमार की पत्नी मीनाक्षी से आलोक भाभी कहता था। विनय ने घटना से लगभग दो माह पहले सुरेश नरायन से शिकायत की थी कि आलोक कुमार उसकी बीबी मीनाक्षी से गलत हरकतें करता है। तीन मई 1994 को आलोक कुमार दही लेने गया था, जिसके बाद से घर नहीं लौटा। परिवार वालों के तलाशने पर आलोक की लाश पुल के दक्षिण में खन्नौत नदी में प्लास्टिक की बोरी में बंधी पड़ी मिली थी। चार मई 1994 को सुरेश नारायन की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला धारा 302, 201 तहत दर्ज किया, जिसमें अधिवक्ता विनय कुमार सिंह, उनकी पत्नी मीनाक्षी देवी, भाई विनोद कुमार सिंह को नामजद किया गया था। सात मई 1994 को पुलिस ने विनय कुमार सिंह के घर से डेढ़ किलो अफीम बरामद की थी। उसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत इन आरोपियों पर मुकदमा कायम किया। वादी के अधिवक्ता कमल शुक्ल शील एवं अमित सिंह द्वारा प्रस्तुत दस गवाहों के बयान और उनके तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
कोर्ट ने फैसला सही सुनाया
मृतक आलोक के भाई अधिवक्ता अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट ने बिल्कुल ठीक फैसला सुनाया है। इस फैसले से उनका परिवार संतुष्ट है। फैसला देर से हुआ, लेकिन अपराधियों को सजा सही मिली।
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यह था मामला
सुरेश नरायन श्रीवास्तव का पुत्र आलोक कुमार और अधिवक्ता विनय कुमार सिंह का भाई विनोद कुमार सिंह एक साथ में पढ़ते थे। इसी के चलते विनय कुमार की पत्नी मीनाक्षी से आलोक भाभी कहता था। विनय ने घटना से लगभग दो माह पहले सुरेश नरायन से शिकायत की थी कि आलोक कुमार उसकी बीबी मीनाक्षी से गलत हरकतें करता है। तीन मई 1994 को आलोक कुमार दही लेने गया था, जिसके बाद से घर नहीं लौटा। परिवार वालों के तलाशने पर आलोक की लाश पुल के दक्षिण में खन्नौत नदी में प्लास्टिक की बोरी में बंधी पड़ी मिली थी। चार मई 1994 को सुरेश नारायन की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला धारा 302, 201 तहत दर्ज किया, जिसमें अधिवक्ता विनय कुमार सिंह, उनकी पत्नी मीनाक्षी देवी, भाई विनोद कुमार सिंह को नामजद किया गया था। सात मई 1994 को पुलिस ने विनय कुमार सिंह के घर से डेढ़ किलो अफीम बरामद की थी। उसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत इन आरोपियों पर मुकदमा कायम किया। वादी के अधिवक्ता कमल शुक्ल शील एवं अमित सिंह द्वारा प्रस्तुत दस गवाहों के बयान और उनके तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
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कोर्ट ने फैसला सही सुनाया
मृतक आलोक के भाई अधिवक्ता अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट ने बिल्कुल ठीक फैसला सुनाया है। इस फैसले से उनका परिवार संतुष्ट है। फैसला देर से हुआ, लेकिन अपराधियों को सजा सही मिली।
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