{"_id":"61f5a96e96789223524b4caf","slug":"issue-of-94-villages-shahjahanpur-news-bly4739219101","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुटार, बंडा के 94 गांवों की वापसी भी है मुद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुटार, बंडा के 94 गांवों की वापसी भी है मुद्दा
विज्ञापन
पुवायां। पुवायां तहसील से काटकर पूरनपुर में शामिल किए गए 94 गांवों की वापसी के लिए लोगों ने नेताओं से सवाल करने शुरू कर दिए हैं। बार एसोसिएशन तो इस मामले को लेकर कई वर्ष आंदोलन करता रहा है और शनिवार को वकील न्यायिक कार्य से विरत रहते थे। नेताओं ने वकीलों को इस मुद्दे पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन चुनाव के बाद हमेशा की तरह नेताओं ने वादे को भुला दिया। वकीलों में इसको लेकर रोष हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेताओं को उनकी फिर याद आ गई है, लेकिन गांवों की वापसी के लिए उन्होंने अभी तक क्या किया है? इसका जवाब उनसे मांगा जाएगा।
कब टूटा शहीदों की नगरी से नाता
वर्ष 2001 में भाजपा की सरकार के समय पीसीयू के चेयरमैन डॉ. विनोद तिवारी के प्रयासों से जिले के 94 गांवों को पीलीभीत से जोड़े जाने की घोषणा की गई थी। तत्कालीन राजस्व मंत्री वीरेंद्र सिंह सिरोही ने खुद इसकी घोषणा विनोद तिवारी के आवास गांव कुर्रैया में 12 अक्तूबर 2001 को की थी। इस घोषणा से शाहजहांपुर के लोगों में काफी रोष भी रहा था। खुटार और बंडा ब्लॉक के पीलीभीत में शामिल किए गए गांवों के लोग भी इससे काफी नाराज रहे थे, लेकिन गांवों की शाहजहांपुर में वापसी नहीं हो सकी।
पीलीभीत में शामिल होने पर लोगों को क्या थीं उम्मीदें-
- क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।
- यातायात की सुविधाएं बढ़ेगीं।
- शिक्षा और विकास के मामले में सुधार होगा।
- विकास कार्यों के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने में दूरी से निजात मिलेगी।
पीलीभीत में जाने के बाद क्या हुआ-
- विकास की उम्मीदें पूरी नहीं हुई।
- कई गांव यातायात सुविधा से आज तक वंचित।
- पूरनपुर में उपेक्षापूर्ण व्यवहार।
- कई गांवों से पूरनपुर तक आवागमन के साधनों का अभाव
विज्ञापन
कब टूटा शहीदों की नगरी से नाता
वर्ष 2001 में भाजपा की सरकार के समय पीसीयू के चेयरमैन डॉ. विनोद तिवारी के प्रयासों से जिले के 94 गांवों को पीलीभीत से जोड़े जाने की घोषणा की गई थी। तत्कालीन राजस्व मंत्री वीरेंद्र सिंह सिरोही ने खुद इसकी घोषणा विनोद तिवारी के आवास गांव कुर्रैया में 12 अक्तूबर 2001 को की थी। इस घोषणा से शाहजहांपुर के लोगों में काफी रोष भी रहा था। खुटार और बंडा ब्लॉक के पीलीभीत में शामिल किए गए गांवों के लोग भी इससे काफी नाराज रहे थे, लेकिन गांवों की शाहजहांपुर में वापसी नहीं हो सकी।
विज्ञापन
पीलीभीत में शामिल होने पर लोगों को क्या थीं उम्मीदें-
- क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।
- यातायात की सुविधाएं बढ़ेगीं।
- शिक्षा और विकास के मामले में सुधार होगा।
- विकास कार्यों के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने में दूरी से निजात मिलेगी।
पीलीभीत में जाने के बाद क्या हुआ-
- विकास की उम्मीदें पूरी नहीं हुई।
- कई गांव यातायात सुविधा से आज तक वंचित।
- पूरनपुर में उपेक्षापूर्ण व्यवहार।
- कई गांवों से पूरनपुर तक आवागमन के साधनों का अभाव