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झमाझम बरसात से शहर हुआ सराबोर
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Wed, 22 Jun 2016 11:59 PM IST
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झमाझम बरसात से शहर हुआ सराबोर
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मानसून की पहली झमाझम सौगात से शहर सराबोर हो गया। बुधवार को दोपहर आसमान पर उठे घने बादलों से इस कदर अंधेरा घिरा कि दोपहर में शाम जैसा नजारा हो गया। कुछ ही देर बाद बारिश का दौर शुरू हो गया। मूसलाधार बारिश से तापमान में कमी आने के साथ मौसम सुहावना हो गया। हालांकि, शहर में कई निचले ठिकानों पर जलभराव होने करीब एक घंटे तक शहर की यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त रही। जलभराव के कारण शहर में कई मार्गों पर वाहन फंसने से जाम लग गया।
पिछले कई दिनों से आसमान पर बादल छाए होने और गाहे-बगाहे बूंदाबांदी होने से धूप निकलने पर गर्मी के साथ उमस जनजीवन को खासा परेशान कर रही थी। बुधवार को सुबह भी दिन निकलने के बाद गर्मी और उमस बढ़ने लगी। अचानक दोपहर 12 बजे पूर्वी-दक्षिणी क्षितिज से काले-भूरे बादलों का गुबार उठा, जिसने कुछ ही देर में आसमान को ढक लिया। घने बादलों को देख बाजारों में मौजूद लोगों ने घरों की राह पकड़नी चाही, लेकिन इसी बीच तेज बारिश शुरू हो गई।
42 मिमी बारिश रिकार्ड, दिन में छाया अंधेरा
बारिश की शुरुआत के साथ घनेरे बादलों ने सूरज की रोशनी को इतना ढक लिया कि दोपहर को शाम जैसा नजारा बन गया। सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों को हेड लाइट और इंडीकेटर जलाने पड़ गए। करीब 35 मिनट तक बरसात की झड़ी लगी रही। गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार इस दौरान 42 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
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सड़कों और सरकारी कार्यालयोें में हुआ जलभराव
मौसम की पहली बरसात ने जनजीवन को सराबोर करने के साथ शहर में कई निचले स्थानों पर जलभराव की समस्या पैदा कर दी। अंटा चौराहा, टेलीफोन एक्सचेंज, टाउनहाल में उद्योग केंद्र के पास, पुराने एसपी कार्यालय, बीएसए ऑफिस, कनौजिया अस्पताल मोड़, लोहारों का चौराहा आदि स्थानों पर तीन से चार फुट पानी भर गया। गौहरपुरा में नाला उफनाने से बारिश का पानी तमाम घारों में घुस गया। इससे अंटा चौराहा समेत कई स्थानों पर यातायात ठहरने से वाहनाें का जाम लग गया। जाम में केंद्रीय विद्यालय समेत कई स्कूलों के वाहन भी फंस गए। बारिश के थमने के बाद करीब एक घंटे तक वाटर लॉकिंग की समस्या बनी रहने से यातायात अस्त-व्यस्त रहा।
रेलवे का इलेक्ट्रॉनिक सिगनल सिस्टम हुआ फेल
मानसून की पहली बरसात से रोडवेज वाले रेलवे फाटक से लेकर गोविंदगंज क्रासिंग के आगे तक दोनों रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया। इस दौरान भूमिगत केबिल में पानी चला जाने से रेलवे की डाउन लाइन का इलेक्ट्रॉनिक सिगनल सिस्टम फेल हो गया। इस कारण तमाम ट्रेनों और मालगाड़ियों को स्टेशन और क्रासिंग पर कासन देकर आगे निकाला गया। हालांकि, स्टेशन अधीक्षक एके गौतम का कहना है रेलवे ट्रैक के किनारे झाड़ियों की सफाई करा दिए जाने से पानी समय से निकल गया जिससे रेल यातायात अप्रभावित रहा।
गदियाना में टूटी बिजली की एलटी लाइन
बारिश के दौरान बिजली लाइनों को फाल्ट से बचाने के लिए सभी सब स्टेशनों से बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। बारिश थमने के बाद भी सड़कों पर जहां-तहां पानी भर जाने के कारण बिजली उपकेंद्रों के फीडर बंद रखे गए। इसके बावजूद निगोही रोड पर गदियाना में एलटी लाइन के तार शार्ट सर्किट से जमीन पर आ गिरे। करीब दो घंटे तक शहर में बिजली गुल रही।
खरीफ फसलों की तैयारी का बन गया माहौल
झमाझम बरसात से किसानों के चेहरों पर खुशी झलकने लगी क्योंकि खरीफ की फसलों की तैयारी का माहौल बन गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. टीबी यादव के अनुसार पहली बरसात से सूखे पड़े खेत जुताई के लायक हो जाएंगे। बारिश के साथ धान की रोपाई के साथ अरहर, मक्का की पिछैती बुवाई अब तेजी से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि जो किसान भाई अरहर, मक्का की बुवाई कर चुके हैं, उनकी फसलों के लिए बारिश अमृत के समान साबित होंगी।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग के नहीं हुए इंतजाम
ग्रामीण क्षेत्र में निर्मित किए गए तालाबों ने मानसून की सौगात को सहेजने की पूरी कोशिश की, लेकिन शहरी क्षेत्र में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कारगर इंतजाम नहीं होने से बारिश का पानी नालों के जरिए गर्रा और खन्नौत में समा गया। मुख्यालय पर केवल विकास भवन, कलक्ट्रेट और हथौड़ा क्षेत्र में गन्ना विभाग के नवनिर्मित कार्यालय में बारिश का पानी जमींदोज करने के प्लांट लगे हैं। इनमें विकास भवन का प्लांट पिछले दो साल से खराब पड़ा है। प्रभारी सीडीओ प्रेम प्रकाश त्रिपाठी के अनुसार रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट सुधारने के लिए डीआरडीए के माध्यम से शासन को बजट की डिमांड भेजी गई है।
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पिछले कई दिनों से आसमान पर बादल छाए होने और गाहे-बगाहे बूंदाबांदी होने से धूप निकलने पर गर्मी के साथ उमस जनजीवन को खासा परेशान कर रही थी। बुधवार को सुबह भी दिन निकलने के बाद गर्मी और उमस बढ़ने लगी। अचानक दोपहर 12 बजे पूर्वी-दक्षिणी क्षितिज से काले-भूरे बादलों का गुबार उठा, जिसने कुछ ही देर में आसमान को ढक लिया। घने बादलों को देख बाजारों में मौजूद लोगों ने घरों की राह पकड़नी चाही, लेकिन इसी बीच तेज बारिश शुरू हो गई।
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42 मिमी बारिश रिकार्ड, दिन में छाया अंधेरा
बारिश की शुरुआत के साथ घनेरे बादलों ने सूरज की रोशनी को इतना ढक लिया कि दोपहर को शाम जैसा नजारा बन गया। सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों को हेड लाइट और इंडीकेटर जलाने पड़ गए। करीब 35 मिनट तक बरसात की झड़ी लगी रही। गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार इस दौरान 42 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
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सड़कों और सरकारी कार्यालयोें में हुआ जलभराव
मौसम की पहली बरसात ने जनजीवन को सराबोर करने के साथ शहर में कई निचले स्थानों पर जलभराव की समस्या पैदा कर दी। अंटा चौराहा, टेलीफोन एक्सचेंज, टाउनहाल में उद्योग केंद्र के पास, पुराने एसपी कार्यालय, बीएसए ऑफिस, कनौजिया अस्पताल मोड़, लोहारों का चौराहा आदि स्थानों पर तीन से चार फुट पानी भर गया। गौहरपुरा में नाला उफनाने से बारिश का पानी तमाम घारों में घुस गया। इससे अंटा चौराहा समेत कई स्थानों पर यातायात ठहरने से वाहनाें का जाम लग गया। जाम में केंद्रीय विद्यालय समेत कई स्कूलों के वाहन भी फंस गए। बारिश के थमने के बाद करीब एक घंटे तक वाटर लॉकिंग की समस्या बनी रहने से यातायात अस्त-व्यस्त रहा।
रेलवे का इलेक्ट्रॉनिक सिगनल सिस्टम हुआ फेल
मानसून की पहली बरसात से रोडवेज वाले रेलवे फाटक से लेकर गोविंदगंज क्रासिंग के आगे तक दोनों रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया। इस दौरान भूमिगत केबिल में पानी चला जाने से रेलवे की डाउन लाइन का इलेक्ट्रॉनिक सिगनल सिस्टम फेल हो गया। इस कारण तमाम ट्रेनों और मालगाड़ियों को स्टेशन और क्रासिंग पर कासन देकर आगे निकाला गया। हालांकि, स्टेशन अधीक्षक एके गौतम का कहना है रेलवे ट्रैक के किनारे झाड़ियों की सफाई करा दिए जाने से पानी समय से निकल गया जिससे रेल यातायात अप्रभावित रहा।
गदियाना में टूटी बिजली की एलटी लाइन
बारिश के दौरान बिजली लाइनों को फाल्ट से बचाने के लिए सभी सब स्टेशनों से बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। बारिश थमने के बाद भी सड़कों पर जहां-तहां पानी भर जाने के कारण बिजली उपकेंद्रों के फीडर बंद रखे गए। इसके बावजूद निगोही रोड पर गदियाना में एलटी लाइन के तार शार्ट सर्किट से जमीन पर आ गिरे। करीब दो घंटे तक शहर में बिजली गुल रही।
खरीफ फसलों की तैयारी का बन गया माहौल
झमाझम बरसात से किसानों के चेहरों पर खुशी झलकने लगी क्योंकि खरीफ की फसलों की तैयारी का माहौल बन गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. टीबी यादव के अनुसार पहली बरसात से सूखे पड़े खेत जुताई के लायक हो जाएंगे। बारिश के साथ धान की रोपाई के साथ अरहर, मक्का की पिछैती बुवाई अब तेजी से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि जो किसान भाई अरहर, मक्का की बुवाई कर चुके हैं, उनकी फसलों के लिए बारिश अमृत के समान साबित होंगी।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग के नहीं हुए इंतजाम
ग्रामीण क्षेत्र में निर्मित किए गए तालाबों ने मानसून की सौगात को सहेजने की पूरी कोशिश की, लेकिन शहरी क्षेत्र में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कारगर इंतजाम नहीं होने से बारिश का पानी नालों के जरिए गर्रा और खन्नौत में समा गया। मुख्यालय पर केवल विकास भवन, कलक्ट्रेट और हथौड़ा क्षेत्र में गन्ना विभाग के नवनिर्मित कार्यालय में बारिश का पानी जमींदोज करने के प्लांट लगे हैं। इनमें विकास भवन का प्लांट पिछले दो साल से खराब पड़ा है। प्रभारी सीडीओ प्रेम प्रकाश त्रिपाठी के अनुसार रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट सुधारने के लिए डीआरडीए के माध्यम से शासन को बजट की डिमांड भेजी गई है।