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गैस्ट्रिक से तालाबों में दम तोड़ रहीं मछलियां
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Tue, 11 Oct 2016 12:03 AM IST
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तालाब में मरी मछलियां
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मुरादपुर/खुटार। मछलियों में गैस्ट्रिक की बीमारी से तहसील भर में कई तालाबों मेें भारी संख्या में मछलियों की मौत हो गई है, इससे मछली पालन करने वालों को भारी घाटा हो रहा है। नरौठा कुंइया के झाबर में ही दो लाख रुपये की मछलियाें की मौत हो गई है।
मत्स्य जीवी सहकारी समिति नरौठा कुइयां के नाम से 30 सदस्यों की समिति है। समिति के सदस्यों ने गांव के पास 38 हेक्टेयर झाबर का पट्टा करा रखा है। इसका प्रति वर्ष 3.94 लाख रुपये लगान भी जाता है। समिति अध्यक्ष प्रदीप कुमार और सचिव रामकिशोर नग बताया कि कुछ दिनों से मछलियों में गैस्ट्रिक की बीमारी हो गई, जिससे मछलियां भारी संख्या में मर रही हैं। झाबर में तीन दिन में दो लाख रुपये कीमत की कई क्विंटल मछली मर चुकी हैं। झाबर के अलावा भी कई तालाबों में इस बीमारी से मछलियों की मौत हो रही है, जिससे मछली पालक बेहद परेशान हैं। मत्स्य पालकों ने तहसील प्रशासन से मछली मरने की जांच कराने और लगान आदि में छूट दिलाए जाने की मांग की है।
तालाब में पानी स्थिर रहने से मछलियों को गैस्ट्रिक की समस्या हो रही है। जाल को तालाब में डालकर पानी हिलाने से समस्या हल हो जाएगी। इसके अलावा आस्टीफ्लो दवा तालाब में डालने से भी समस्या हल होगी। - प्रदीप कुमार, इंस्पेक्टर मत्स्य विभाग, शाहजहांपुर
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मत्स्य जीवी सहकारी समिति नरौठा कुइयां के नाम से 30 सदस्यों की समिति है। समिति के सदस्यों ने गांव के पास 38 हेक्टेयर झाबर का पट्टा करा रखा है। इसका प्रति वर्ष 3.94 लाख रुपये लगान भी जाता है। समिति अध्यक्ष प्रदीप कुमार और सचिव रामकिशोर नग बताया कि कुछ दिनों से मछलियों में गैस्ट्रिक की बीमारी हो गई, जिससे मछलियां भारी संख्या में मर रही हैं। झाबर में तीन दिन में दो लाख रुपये कीमत की कई क्विंटल मछली मर चुकी हैं। झाबर के अलावा भी कई तालाबों में इस बीमारी से मछलियों की मौत हो रही है, जिससे मछली पालक बेहद परेशान हैं। मत्स्य पालकों ने तहसील प्रशासन से मछली मरने की जांच कराने और लगान आदि में छूट दिलाए जाने की मांग की है।
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तालाब में पानी स्थिर रहने से मछलियों को गैस्ट्रिक की समस्या हो रही है। जाल को तालाब में डालकर पानी हिलाने से समस्या हल हो जाएगी। इसके अलावा आस्टीफ्लो दवा तालाब में डालने से भी समस्या हल होगी। - प्रदीप कुमार, इंस्पेक्टर मत्स्य विभाग, शाहजहांपुर
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