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नरई जलाएं नहीं, आर्गेनोडीकंपोजर से सड़ाएं

Wed, 27 Apr 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो/शाहजहांपुर
ब्यूरो/शाहजहांपुर Updated Wed, 27 Apr 2016 11:55 PM IST
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dont fire in narai
नरई न जलाएं
फोटो नंबर 17 और 18
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नरई जलाएं नहीं, आर्गेनोडीकंपोजर से सड़ाएं dont fire in narai
उप्र गन्ना शोध परिषद ने विकसित की यह लाभकारी बैक्टीरिया कल्चर
इससे माटी की शक्ति की बढ़ेगी और फसल उत्पादकता भी
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। कंबाइन हार्वेस्टर से प्राय: गेहूं की कटाई के पश्चात फसल अवशेष (नरई) को खेत में ही किसान जला रहे हैं। उससे पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ ही मिट्टी की भौतिक एवं रासायनिक संरचना के साथ ही सूक्ष्म जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यही नहीं, नरई जलाने से देहातों में हाल के दिनों में आग लगने की घटनाएं भी हो रही हैं। किसान इससे बचें और लाभकारी बैक्टीरिया का इस्तेमाल कर नरई को खेत में ही सड़ाएं ताकि उक्त खतरों से बचाव हो। यह बातें उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (शाहजहांपुर) के निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बीसलपुर क्षेत्र से आए प्रगतिशील किसानों के एक दल को समझाया।
उन्होंने बताया कि परिषद में फ सलों के अवशेष जैसे कि नरई,गन्ने की सूखी पत्तियां, पुआल आादि को खेत में ही सडा़ने के लिए जीवाणु कल्चर ’आर्गेनोडीकम्पोजर’ विकसित किया गया है। इससे मात्र 30 से 45 दिनों में ही फसलों के अवशेष खेत में ही सड़ जाएंगे और माटी के कार्बनिक स्तर में बढ़त होने के साथ ही लाभदायक बैक्टीरिया की संख्या भी बढ़ेगी। किसानों को संबोधित करते हुए परिषद के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. सुनील विश्वकर्मा ने इसके इस्तेमाल की विधि समझाई। बताया कि आर्गेनोडीकंपोजर को 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 100 किग्रा कंपोस्ट खाद अथवा प्रेसमड में मिलाकर पूरे खेत में पहले छिड़क दें और फिर अगले दिन सिंचाई करने के बाद 40 किग्रा यूरिया और 50 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में टाप डेऊसिंग करें। फिर पर्याप्त नमी की दशा में ट्रैक्टर चालित डिस्क हैरो से पूरे खेत की जुताई कर दें ताकि खेत की मिट्टी उपर और फसल अवशेष सूखी पत्तियां आदि मृदा में नीचे दब जाएं। अंत में पूरे खेत की सिंचाई कर दें। आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर पर्याप्त नमी की दशा में दो से तीन जुताई या पल्टाई करके सिंचाई  करते रहें। इस प्रकार 30-45 दिन में नरई अथवा गन्ने की सूखी पत्तियां सड़कर कम्पोस्ट खाद का काम करने लगती है। 
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निदेशक डॉ. शर्मा ने बताया कि परिषद द्वारा विकसित ’आर्गेनोडीकम्पोजर’ मृदा संरचना तथा मृदा की जलधारण क्षमता बढ़ाने के साथ ही फसल की उत्पादकता बढ़ाने में कारगर है। यह जीवाणु कल्चर षोध परिशद से किसी भी कार्यदिवस में प्राप्त किया जा सकता है।
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किसानों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
आर्गेनोडीकम्पोजर  नामक बैक्टीरिया कल्चर के बारे में किसानों को हर प्रकार की जानकारी मुहैया कराने एवं मदद के लिए उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (शाहजहांपुर) ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। किसान 05842-222509 पर डायल कर सकते हैं अथवा परिषद प्रसार अधिकारी संजीव पाठक के मोबाइल नंबर 8795837155 पर संपर्क कर सकते हैं।

नरई में लगाई आग से गन्ना जला
खुटार। बुधवार को गांव बनकटा में एक व्यक्ति ने नरई जलाने के लिए  खेत में आग लगाई थी, जिससे पड़ोस के कई खेतों में खड़ी नरई जल गई। आग से गांव के तिलकराम यादव का एक एकड़ गन्ना भी जल गया। तिलकराम ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।गौरतलब है कि खेतों में नरई, पताई आदि जलाने पर प्रतिबंध लगा होने के बाद भी किसान साठा धान लगाने के लिए खेत में खड़ी नरई जला रहे हैं। इससे भूसे का संकट होने के साथ ही पड़ोस के किसानों की फसल आदि भी जल रही है। तेज हवा के कारण गांवों तक आग पहुंच जाने से घरों में भी आग लग रही है और नुकसान हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक अमला इस पर ध्यान नहीं दे रहा।
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