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अब ठंड और इलाज के अभाव में मर रहे गोवंश, प्रशासन मौन
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शाहजहांपुर। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए गोशालाओं में टाट-पट्टी बांधने के साथ ही नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देशों के बाद भी गोवंशों के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा। पिछले दो दिनों में नगर निगम की नंदीशाला में दो सांड़ों की मौत हो चुकी है। खुटार गोशाला में घायल गाय ने भी दम तोड़ दिया। यह स्थिति लगभग सभी अस्थायी गोशालाओं में है, लेकिन इस पर न तो पशु चिकित्सा विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाता नजर आ रहा है और न ही प्रशासन।
सोमवार को नगर निगम की पुवायां रोड स्थित नंदीशाला में एक गोवंश ठंड से तड़पता देखा गया। नंदीशाला में रोजाना सेेवा करने जाने वाले गोरक्षक दल के एक कार्यकर्ता ने बताया कि सुबह के समय पशु चिकित्सक बीमार पशुओं का परीक्षण करने के लिए आए थे, लेकिन उचित इलाज न मिल पाने की वजह से पिछले दो दिनों में दो नंदियों की मौत हो चुकी है। जिसका कारण रात में गोवंश को ठंड से बचाने के लिए इंतजाम न होना भी है। हालांकि गोवंश के लिए भूसा, हरा चारा और चोकर की व्यवस्था में सुधार आया है। नगर निगम की ओर से रोजाना पांच किलो चारा और एक बोरी चोकर का इंतजाम किया जा रहा है। इसके अलावा गोरक्षक दल के कार्यकर्ता समाज के सहयोग से गोवंश के खानपान की जरूरत को पूरा कराते रहते हैं। नंदीशाला में इस समय 99 नंदी रजिस्टर में दर्ज है, जबकि रोजाना निराश्रित गोवंश को यहां लाया जाता है, जिनका लेखा-जोखा अभी दर्ज नहीं किया गया। जिसका कारण उनकी टैगिंग न होना बताया जा रहा है।
नगर निगम की नंदीशाला और गोशाला में लगभग रोज ही पशु चिकित्सक गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए जाते हैं। इलाज के बाद भी गोवंश की मौत स्वाभाविक है। गोवंश को सर्दी से बचाने के लिए इंतजाम किए गए हैं। - विद्याशंकर सिंह, नगर आयुक्त शाहजहांपुर।
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घायल गाय के मरने के बाद इलाज को पहुंचा डॉक्टर
खुटार। एक दिन पहले घायल गाय की मौत के बाद सोमवार को पशु चिकित्सक चमराबोझी गोशाला पहुंचे। उन्होंने में गोशाला में घायल और बीमार गायों का इलाज किया। इसके साथ ही भूसा और चारा की व्यवस्था भी कराई गई।
गौशाला में रविवार को एक घायल गाय की मौत हो गई थी। जिस पर एसडीएम पुवायां सौरभ भट्ट ने सख्ती दिखाते हुए पशु चिकित्सकों को गोशाला में गायों का स्वास्थ्य परीक्षण कर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सोमवार को डॉक्टर गोशाला पहुंचे और गायों का इलाज किया। एसडीएम सौरभ ने पांच दिन पहले इस गौशाला का निरीक्षण भी किया था। तब उन्हें गाय बीमारी तड़पती मिली थी, जिसमें पशु चिकित्सक की लापरवाही सामने आई थी। गोशाला में पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और चारा-पानी की व्यवस्था कराए जाने के निर्देशों के बाद भी कोई ध्यान नही दिया गया और घायल गाय की मौत हो गई। जिसकी खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद एसडीएम ने सख्त रुख अपनाया और डॉक्टर की फटकार लगाई। तब जाकर डॉक्टर ने घायल गायों का इलाज किया। वहीं गांव के प्रधान ने गौशाला में भूसा और चारा आदि की व्यवस्था कराई।
तिलहर में एसडीएम की फटकार के बाद गायों का शुरू हुआ इलाज
तिलहर। नगर में स्टेशन रोड पर स्थित बाईपास चौराहा के समीप प्राचीन गोशाला का हाल भी कुछ अच्छा नहीं है। इस गोशाला का संचालन कमेटी और नगर पालिका प्रशासन के सहयोग से होता है। इसके बावजूद गोशालों गायों को उचित इलाज नहीं मिल पाता।
वर्तमान में गोशाला के अंदर 60 गोवंशीय पशु रह रहे हैं। जिनकी देखरेख के लिए नगर पालिका की ओर से कर्मचारी तैनात है। चारा और भूसा की व्यवस्था नगरपालिका कर रही है, लेकिन गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह गोशाला में अब तक करीब एक दर्जन गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। जिसका संज्ञान एसडीएम तिलहर ने लिया है और पशु चिकित्सकों को लापरवाही बरतने पर फटकार लगाई। तब जाकर गायों का स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज हो सका। गोवंश की देखभाल कर रहे पुत्तन के मुताबिक पहले गोशाला में 110 गौवंश था, जोकि अब 60 हो गया है। 50 गोवंश गोपालकों को सुपुर्द कर दिया गया है।
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सोमवार को नगर निगम की पुवायां रोड स्थित नंदीशाला में एक गोवंश ठंड से तड़पता देखा गया। नंदीशाला में रोजाना सेेवा करने जाने वाले गोरक्षक दल के एक कार्यकर्ता ने बताया कि सुबह के समय पशु चिकित्सक बीमार पशुओं का परीक्षण करने के लिए आए थे, लेकिन उचित इलाज न मिल पाने की वजह से पिछले दो दिनों में दो नंदियों की मौत हो चुकी है। जिसका कारण रात में गोवंश को ठंड से बचाने के लिए इंतजाम न होना भी है। हालांकि गोवंश के लिए भूसा, हरा चारा और चोकर की व्यवस्था में सुधार आया है। नगर निगम की ओर से रोजाना पांच किलो चारा और एक बोरी चोकर का इंतजाम किया जा रहा है। इसके अलावा गोरक्षक दल के कार्यकर्ता समाज के सहयोग से गोवंश के खानपान की जरूरत को पूरा कराते रहते हैं। नंदीशाला में इस समय 99 नंदी रजिस्टर में दर्ज है, जबकि रोजाना निराश्रित गोवंश को यहां लाया जाता है, जिनका लेखा-जोखा अभी दर्ज नहीं किया गया। जिसका कारण उनकी टैगिंग न होना बताया जा रहा है।
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नगर निगम की नंदीशाला और गोशाला में लगभग रोज ही पशु चिकित्सक गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए जाते हैं। इलाज के बाद भी गोवंश की मौत स्वाभाविक है। गोवंश को सर्दी से बचाने के लिए इंतजाम किए गए हैं। - विद्याशंकर सिंह, नगर आयुक्त शाहजहांपुर।
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घायल गाय के मरने के बाद इलाज को पहुंचा डॉक्टर
खुटार। एक दिन पहले घायल गाय की मौत के बाद सोमवार को पशु चिकित्सक चमराबोझी गोशाला पहुंचे। उन्होंने में गोशाला में घायल और बीमार गायों का इलाज किया। इसके साथ ही भूसा और चारा की व्यवस्था भी कराई गई।
गौशाला में रविवार को एक घायल गाय की मौत हो गई थी। जिस पर एसडीएम पुवायां सौरभ भट्ट ने सख्ती दिखाते हुए पशु चिकित्सकों को गोशाला में गायों का स्वास्थ्य परीक्षण कर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सोमवार को डॉक्टर गोशाला पहुंचे और गायों का इलाज किया। एसडीएम सौरभ ने पांच दिन पहले इस गौशाला का निरीक्षण भी किया था। तब उन्हें गाय बीमारी तड़पती मिली थी, जिसमें पशु चिकित्सक की लापरवाही सामने आई थी। गोशाला में पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और चारा-पानी की व्यवस्था कराए जाने के निर्देशों के बाद भी कोई ध्यान नही दिया गया और घायल गाय की मौत हो गई। जिसकी खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद एसडीएम ने सख्त रुख अपनाया और डॉक्टर की फटकार लगाई। तब जाकर डॉक्टर ने घायल गायों का इलाज किया। वहीं गांव के प्रधान ने गौशाला में भूसा और चारा आदि की व्यवस्था कराई।
तिलहर में एसडीएम की फटकार के बाद गायों का शुरू हुआ इलाज
तिलहर। नगर में स्टेशन रोड पर स्थित बाईपास चौराहा के समीप प्राचीन गोशाला का हाल भी कुछ अच्छा नहीं है। इस गोशाला का संचालन कमेटी और नगर पालिका प्रशासन के सहयोग से होता है। इसके बावजूद गोशालों गायों को उचित इलाज नहीं मिल पाता।
वर्तमान में गोशाला के अंदर 60 गोवंशीय पशु रह रहे हैं। जिनकी देखरेख के लिए नगर पालिका की ओर से कर्मचारी तैनात है। चारा और भूसा की व्यवस्था नगरपालिका कर रही है, लेकिन गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह गोशाला में अब तक करीब एक दर्जन गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। जिसका संज्ञान एसडीएम तिलहर ने लिया है और पशु चिकित्सकों को लापरवाही बरतने पर फटकार लगाई। तब जाकर गायों का स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज हो सका। गोवंश की देखभाल कर रहे पुत्तन के मुताबिक पहले गोशाला में 110 गौवंश था, जोकि अब 60 हो गया है। 50 गोवंश गोपालकों को सुपुर्द कर दिया गया है।