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मां का प्यार, पिता का दुलार दिया लाडली को
Shahjahanpur
Updated Sun, 15 Jun 2014 05:33 AM IST
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- एक शिक्षक ने बेटी की परवरिश को बनाया जीने का आधार
- घरवालों और रिश्तेदारों के दबाव के बाद भी नहीं की शादी
पीयूष दुबे
शाहजहांपुर। हमारे सभ्य समाज में कहा जाता है कि मां के गुजर जाने के बाद किसी भी पिता के लिए बेटी को पालना बहुत मुश्किल होता है, वो भी तब, जब बिटिया अबोध हो, लेकिन एक रिटायर्ड शिक्षक ने न सिर्फ अपनी बेटी की परवरिश की, बल्कि उसकी हर इच्छा को पूरा करने में जीवन ही लगा दिया। शिक्षक ने अपनी ड्यूटी करने के साथ ही बेटी का टिफिन तैयार करने, स्कूल के लिए तैयार करने, स्कूल तक छोड़ने, चोटी करने, बेटी के पसंदीदा फास्टफूड तैयार जैसे तमाम काम अपनी लाडली बिटिया की परवरिश करने के लिए किए।
यह कोई कहानी नहीं, बल्कि एक सच है और वह भी शहर के मोहल्ला हयातपुरा के रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक रामनरेश द्विवेदी का, जिनकी शिक्षिका पत्नी आशा देवी की मृत्यु 11 अक्तूबर 2001 को हो गई थी, तब उनकी बेटी अनामिका मात्र साढ़े चार साल की थी। ऐसे में घरवालों एवं आसपास के लोगों के साथ ही उनके ससुर ने भी दूसरी शादी करने के लिए भी दबाव बनाया, लेकिन उनकी बेटी को प्यार में कोई कमी न रह जाए, इसलिए उन्होंने शादी नहीं की। इस बारे में श्री द्विवेदी ने कहा कि शादी से उनको पत्नी तो मिल जाती पर शायद उनकी बिटिया को सच्ची मां नहीं मिलती। इसके बाद उन्हें अपनी पत्नी के मृतक आश्रित के रूप में तीन दिसंबर 2001 को बतौर शिक्षक की नौकरी मिल गई। उन्होंने शिक्षक का दायित्व निभाने के साथ ही एक बेस्ट पापा का भी दायित्व निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
बेटी की चोटी करने
में होती थी दिक्कत
रामनरेश द्विवेदी ने बताया कि बेटी की परवरिश करते समय सबसे अधिक दिक्कत बेटी की चोटी करने में होती थी। बोले, उन्होंने बेटी के लिए कई नए व्यंजन बनाना सीख लिया।
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डायरिया होने पर
पूरी रात जागा
श्री द्विवेदी ने यादों के झरोखे से बताया कि एक बार बिटिया को डायरिया हो गया था, तो उन्हें पूरी रात नींद नहीं आई और वे अपनी बेटी का सिर गोद में रखे सारी रात बैठे रहे। बोले, तब मुझे एहसास हुआ कि मां को इतना महान क्यों कहा जाता है। बावजूद इसके मैंने मां का दायित्व भी निभाते हुए अपनी बिटिया रानी की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी।
मेरे पापा, दुनिया
के बेस्ट पापा
रामनरेश द्विवेदी की इकलौती बेटी अनामिका द्विवेदी इस समय आर्य महिला डिग्री कॉलेज से बीएससी कर रही हैं। उनका कहना है कि पापा के प्यार ने मां की कमी कभी महसूस ही नहीं होने दी। बोलीं, मेरी हर इच्छा जुबां पर आते ही पापा ने पूरी की है इसलिए मैं हमेशा गर्व से कहती हूं कि मेरे पापा, दुनिया के बेस्ट पापा।
सरप्राइज गिफ्ट देकर पापा
से कहेंगे दिल की बात
शाहजहांपुर। वर्ल्ड फादर्स डे की पूर्व संध्या पर बाजारों में बच्चों ने अपने पापा को सरप्राइज गिफ्ट देने के लिए खूब खरीददारी की है, जिन्हें रविवार को वे अपने पापा को देकर अपने दिल की बात करेंगे। बाजारों में फादर्स डे से संबंधित तमाम गिफ्ट की लंबी रेंज मौजूद है। सदर बाजार में आर्चिज गैलरी के संचालक शोभित गुप्ता ने बताया कि कुछ लोगों ने अपने पापा की फोटो को कॉफी मग पर प्रिंट करवाया है, जिसे देकर वह अपने पापा को अपनी भावनाओं से अवगत कराएंगे। बोले, इस बार फादर्स डे पर बच्चों में तो खासा उत्साह है। इसकी वजह से फोटो फ्रेम, पर्स, परफ्यूम सेट, ग्रीटिंग कार्ड, बेल्ट, रिस्ट वाच सहित तमाम उपहारों से बाजार पटा पड़ा है।
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- घरवालों और रिश्तेदारों के दबाव के बाद भी नहीं की शादी
पीयूष दुबे
शाहजहांपुर। हमारे सभ्य समाज में कहा जाता है कि मां के गुजर जाने के बाद किसी भी पिता के लिए बेटी को पालना बहुत मुश्किल होता है, वो भी तब, जब बिटिया अबोध हो, लेकिन एक रिटायर्ड शिक्षक ने न सिर्फ अपनी बेटी की परवरिश की, बल्कि उसकी हर इच्छा को पूरा करने में जीवन ही लगा दिया। शिक्षक ने अपनी ड्यूटी करने के साथ ही बेटी का टिफिन तैयार करने, स्कूल के लिए तैयार करने, स्कूल तक छोड़ने, चोटी करने, बेटी के पसंदीदा फास्टफूड तैयार जैसे तमाम काम अपनी लाडली बिटिया की परवरिश करने के लिए किए।
यह कोई कहानी नहीं, बल्कि एक सच है और वह भी शहर के मोहल्ला हयातपुरा के रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक रामनरेश द्विवेदी का, जिनकी शिक्षिका पत्नी आशा देवी की मृत्यु 11 अक्तूबर 2001 को हो गई थी, तब उनकी बेटी अनामिका मात्र साढ़े चार साल की थी। ऐसे में घरवालों एवं आसपास के लोगों के साथ ही उनके ससुर ने भी दूसरी शादी करने के लिए भी दबाव बनाया, लेकिन उनकी बेटी को प्यार में कोई कमी न रह जाए, इसलिए उन्होंने शादी नहीं की। इस बारे में श्री द्विवेदी ने कहा कि शादी से उनको पत्नी तो मिल जाती पर शायद उनकी बिटिया को सच्ची मां नहीं मिलती। इसके बाद उन्हें अपनी पत्नी के मृतक आश्रित के रूप में तीन दिसंबर 2001 को बतौर शिक्षक की नौकरी मिल गई। उन्होंने शिक्षक का दायित्व निभाने के साथ ही एक बेस्ट पापा का भी दायित्व निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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बेटी की चोटी करने
में होती थी दिक्कत
रामनरेश द्विवेदी ने बताया कि बेटी की परवरिश करते समय सबसे अधिक दिक्कत बेटी की चोटी करने में होती थी। बोले, उन्होंने बेटी के लिए कई नए व्यंजन बनाना सीख लिया।
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डायरिया होने पर
पूरी रात जागा
श्री द्विवेदी ने यादों के झरोखे से बताया कि एक बार बिटिया को डायरिया हो गया था, तो उन्हें पूरी रात नींद नहीं आई और वे अपनी बेटी का सिर गोद में रखे सारी रात बैठे रहे। बोले, तब मुझे एहसास हुआ कि मां को इतना महान क्यों कहा जाता है। बावजूद इसके मैंने मां का दायित्व भी निभाते हुए अपनी बिटिया रानी की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी।
मेरे पापा, दुनिया
के बेस्ट पापा
रामनरेश द्विवेदी की इकलौती बेटी अनामिका द्विवेदी इस समय आर्य महिला डिग्री कॉलेज से बीएससी कर रही हैं। उनका कहना है कि पापा के प्यार ने मां की कमी कभी महसूस ही नहीं होने दी। बोलीं, मेरी हर इच्छा जुबां पर आते ही पापा ने पूरी की है इसलिए मैं हमेशा गर्व से कहती हूं कि मेरे पापा, दुनिया के बेस्ट पापा।
सरप्राइज गिफ्ट देकर पापा
से कहेंगे दिल की बात
शाहजहांपुर। वर्ल्ड फादर्स डे की पूर्व संध्या पर बाजारों में बच्चों ने अपने पापा को सरप्राइज गिफ्ट देने के लिए खूब खरीददारी की है, जिन्हें रविवार को वे अपने पापा को देकर अपने दिल की बात करेंगे। बाजारों में फादर्स डे से संबंधित तमाम गिफ्ट की लंबी रेंज मौजूद है। सदर बाजार में आर्चिज गैलरी के संचालक शोभित गुप्ता ने बताया कि कुछ लोगों ने अपने पापा की फोटो को कॉफी मग पर प्रिंट करवाया है, जिसे देकर वह अपने पापा को अपनी भावनाओं से अवगत कराएंगे। बोले, इस बार फादर्स डे पर बच्चों में तो खासा उत्साह है। इसकी वजह से फोटो फ्रेम, पर्स, परफ्यूम सेट, ग्रीटिंग कार्ड, बेल्ट, रिस्ट वाच सहित तमाम उपहारों से बाजार पटा पड़ा है।