{"_id":"123-72688","slug":"Shahjahanpur-72688-123","type":"story","status":"publish","title_hn":"महंगाई के चलते लोगों ने प्याज से मुंह मोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महंगाई के चलते लोगों ने प्याज से मुंह मोड़ा
Shahjahanpur
Updated Wed, 14 Aug 2013 05:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नासिक, इंदौर से कम हुई प्याज की आवक
- सोने के भाव की तरह उछाल मार रहा है प्याज
- कई होटलों पर प्याज की जगह खप रहा कद्दू
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर/ रोजा। दिनों दिन बढ़ती कीमतों की वजह से प्याज आम आदमी की थाली से लुप्त होता जा रहा है। प्याज पर आई महंगाई को देखते हुए जहां घरों की थालियों से प्याज दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है, वहीं खाने के होटल और ढाबे वालों ने प्याज की जगह कद्दू से सब्जियों की तरी तैयार करने में लगे हैं।
बता दें कि शहर की रोजा स्थित मंडी में प्याज की अधिकांश आवक नासिक और इन्दौर से होती है। पिछले दिनों से अगर तुलना की जाए तो मात्र बीस प्रतिशत से भी कम आवक हो रही है। जिससे फुटकर बाजारों में प्याज 60 रुपये की कीमत पर पहुंच गया गया। जबकि थोक भाव 50 रुपये होने से 10 रुपये का अंतर हैं। अगर पिछले कुछ महीनों पर गौर किया जाए तो प्याज की कीमतों में सोने-चांदी की तरह बढ़ोत्तरी हुई है।
घर और रसोईघर की जिम्मेदारी संभालने में महिलाआें को इतने कम रुपयों में घर का खर्च चलाने में काफी परेशानी हो रही है। सब्जी खरीदने जाने वालों को कई बार आधी-अधूरी सब्जियां खरीदते पर ही रुपये समाप्त हो जाते हैं। जिससे बाजारों से आधा सामान लेकर ही वापस लौटना पड़ता हैै। बावजूद इसके सरकारी तंत्र की ओर से कोई खास कार्रवाई नहीं की जा रही है।
विज्ञापन
प्याज की बढ़ती हुई कीमतों ने गृहणियों, फुटकर दुकानदारों, आढ़तियों और मंडी समिति के अधिकारियों के क्या विचार हैं? उन्हीं की जुबानी.....
थाली का स्वाद हुआ फीका
‘प्याज पर बेइंतहा महंगाई आ जाने से घर का बजट बिगड़ गया है। जिससे खाने की थाली का स्वाद भी फीका हो गया है। अब तो पहले की अपेक्षा प्याज एक चौथाई ही खरीद रहे हैं।’
- शोभा सिंह, गृहणी, इंदिरा नगर
प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट
‘हे भगवान प्याज पर तो इतनी महंगाई है कि अब तो कई बार भाव पूछ के ही वापस लौटना पड़ता है। रसोई का बजट बिगड़ने से बचाने के लिए कुछ सब्जियों को छोड़कर बाकी में प्याज डालना ही बंद कर दिया है।’
- सुनीता शर्मा, गृहणी, झंडा कलां
ग्राहकों ने प्याज खरीदना किया कम
‘प्याज पर महंगाई छा जाने से ग्राहकों ने प्याज खरीदना बहुत ही कम कर दिया है। जहां पहले ढाई से तीन क्विंटल प्याज प्रतिदिन बिकता था, अब वही 60 से 70 किलो की बिक्री तक ही सीमित रह गया है। ’
- कल्लू प्याज वाले, फुटकर विक्रेता, सब्जी मंडी बहादुरगंज
आधी से कम रह गई आमदनी
‘प्याज की कीमतें आसमान छूने से लोगों ने प्याज की खरीददारी से मुंह मोड़ लिया है। जिससे प्याज की बिक्री घटकर एक चौथाई रह गई है और आमदनी तो आधे से भी कम रह गई है।’
- मोनू, प्याज विक्रेता, सब्जी मंडी बहादुरगंज
बाहर से प्याज न आने से बढ़ी महंगाई
‘बरसात से प्याज की काफी फसल बर्बाद हो गई। दूसरी ओर ट्रक भाड़ा बढ़ जाने से नासिक और इन्दौर से आने वाला प्याज न के बराबर आ रहा है। आवक की तुलना मे मांग अधिक होने से प्याज पर महंगाई आ गई है। भाव बढ़ने से लोगों ने प्याज खाना कम कर दिया है, जिससे बिक्री पर भी प्रभाव पड़ा है।’
- यासीन खां, सब्जी आढ़ती, रोजा मंडी
ढाई सौ ग्राम प्याज से ग्राहक चला रहे काम
‘रोजा मंडी से प्याज पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। साथ ही ढाई प्रतिशत मंडी टैक्स औ अन्य खर्चों सहित 55 रुपये प्रति किलो पड़ता है। पहले जहां लोग एक किलो प्याज खरीदते थे, अब वे ढाई सौ ग्राम में ही काम चला रहे है।’
- विजय, खुदरा व्यापारी, रोजा मंडी
कुछ व्यापारी कर रहे कालाबाजारी
‘इन दिनों मंडी में प्याज की आवक एक ट्रक से भी कम है जो सामान्य दिनों में पांच से छह ट्रक प्रतिदिन होती थी। जिससे प्याज के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने प्याज को स्टोर कर कालाबाजारी कर रहे हैं। जिससे प्याज की कीमतों में असामान्य बढ़ोत्तरी हुई है। इस गंभीर समस्या मंडी के अधिकारी नजरअंदाज किए हुए हैं।’
- विक्रम बाजपेयी, रोजा मंडी निरीक्षक
गत तीन महीनों के प्याज के दाम
माह थोक दर प्रति क्विंटल फुटकर दर प्रति किलो
जून 725 रुपये 10 रुपये
जुलाई 1750 रुपये 20 से 25 रुपये
अगस्त 5000 रुपये 60 रुपये
नोट: प्याज की आढ़तों पर पांच प्रतिशत की दर से खरीददारों से कमीशन लिया जाता है।
बारिश के चलते जेल में भी
सब्जियां जुटाना हुआ मुश्किल
शाहजहांपुर। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों और कैदियों को जेल परिसर में ही उगने वाली सब्जियों को बनाकर रोटी दी जाती है। जेल परिसर में उगी सब्जियों में अधिक बारिश होने के कारण बीमारियां लगने लगीं हैं। अधिक बारिश होने के कारण सब्जियों पर छिड़की जा रही कीटनाशक दवाइयां भी असर नहीं कर रहीं। जैसे ही दवा का छिड़काव किया जाता है, वैसे ही बारिश आ जाने के कारण वह धुल जाती है। जेल अधीक्षक ने बताया कि इसके बावजूद मशक्कत कर बंदियों को सब्जियां मुहैया कराई जा रही हैं।
विज्ञापन
- सोने के भाव की तरह उछाल मार रहा है प्याज
- कई होटलों पर प्याज की जगह खप रहा कद्दू
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर/ रोजा। दिनों दिन बढ़ती कीमतों की वजह से प्याज आम आदमी की थाली से लुप्त होता जा रहा है। प्याज पर आई महंगाई को देखते हुए जहां घरों की थालियों से प्याज दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है, वहीं खाने के होटल और ढाबे वालों ने प्याज की जगह कद्दू से सब्जियों की तरी तैयार करने में लगे हैं।
बता दें कि शहर की रोजा स्थित मंडी में प्याज की अधिकांश आवक नासिक और इन्दौर से होती है। पिछले दिनों से अगर तुलना की जाए तो मात्र बीस प्रतिशत से भी कम आवक हो रही है। जिससे फुटकर बाजारों में प्याज 60 रुपये की कीमत पर पहुंच गया गया। जबकि थोक भाव 50 रुपये होने से 10 रुपये का अंतर हैं। अगर पिछले कुछ महीनों पर गौर किया जाए तो प्याज की कीमतों में सोने-चांदी की तरह बढ़ोत्तरी हुई है।
विज्ञापन
घर और रसोईघर की जिम्मेदारी संभालने में महिलाआें को इतने कम रुपयों में घर का खर्च चलाने में काफी परेशानी हो रही है। सब्जी खरीदने जाने वालों को कई बार आधी-अधूरी सब्जियां खरीदते पर ही रुपये समाप्त हो जाते हैं। जिससे बाजारों से आधा सामान लेकर ही वापस लौटना पड़ता हैै। बावजूद इसके सरकारी तंत्र की ओर से कोई खास कार्रवाई नहीं की जा रही है।
विज्ञापन
प्याज की बढ़ती हुई कीमतों ने गृहणियों, फुटकर दुकानदारों, आढ़तियों और मंडी समिति के अधिकारियों के क्या विचार हैं? उन्हीं की जुबानी.....
थाली का स्वाद हुआ फीका
‘प्याज पर बेइंतहा महंगाई आ जाने से घर का बजट बिगड़ गया है। जिससे खाने की थाली का स्वाद भी फीका हो गया है। अब तो पहले की अपेक्षा प्याज एक चौथाई ही खरीद रहे हैं।’
- शोभा सिंह, गृहणी, इंदिरा नगर
प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट
‘हे भगवान प्याज पर तो इतनी महंगाई है कि अब तो कई बार भाव पूछ के ही वापस लौटना पड़ता है। रसोई का बजट बिगड़ने से बचाने के लिए कुछ सब्जियों को छोड़कर बाकी में प्याज डालना ही बंद कर दिया है।’
- सुनीता शर्मा, गृहणी, झंडा कलां
ग्राहकों ने प्याज खरीदना किया कम
‘प्याज पर महंगाई छा जाने से ग्राहकों ने प्याज खरीदना बहुत ही कम कर दिया है। जहां पहले ढाई से तीन क्विंटल प्याज प्रतिदिन बिकता था, अब वही 60 से 70 किलो की बिक्री तक ही सीमित रह गया है। ’
- कल्लू प्याज वाले, फुटकर विक्रेता, सब्जी मंडी बहादुरगंज
आधी से कम रह गई आमदनी
‘प्याज की कीमतें आसमान छूने से लोगों ने प्याज की खरीददारी से मुंह मोड़ लिया है। जिससे प्याज की बिक्री घटकर एक चौथाई रह गई है और आमदनी तो आधे से भी कम रह गई है।’
- मोनू, प्याज विक्रेता, सब्जी मंडी बहादुरगंज
बाहर से प्याज न आने से बढ़ी महंगाई
‘बरसात से प्याज की काफी फसल बर्बाद हो गई। दूसरी ओर ट्रक भाड़ा बढ़ जाने से नासिक और इन्दौर से आने वाला प्याज न के बराबर आ रहा है। आवक की तुलना मे मांग अधिक होने से प्याज पर महंगाई आ गई है। भाव बढ़ने से लोगों ने प्याज खाना कम कर दिया है, जिससे बिक्री पर भी प्रभाव पड़ा है।’
- यासीन खां, सब्जी आढ़ती, रोजा मंडी
ढाई सौ ग्राम प्याज से ग्राहक चला रहे काम
‘रोजा मंडी से प्याज पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। साथ ही ढाई प्रतिशत मंडी टैक्स औ अन्य खर्चों सहित 55 रुपये प्रति किलो पड़ता है। पहले जहां लोग एक किलो प्याज खरीदते थे, अब वे ढाई सौ ग्राम में ही काम चला रहे है।’
- विजय, खुदरा व्यापारी, रोजा मंडी
कुछ व्यापारी कर रहे कालाबाजारी
‘इन दिनों मंडी में प्याज की आवक एक ट्रक से भी कम है जो सामान्य दिनों में पांच से छह ट्रक प्रतिदिन होती थी। जिससे प्याज के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने प्याज को स्टोर कर कालाबाजारी कर रहे हैं। जिससे प्याज की कीमतों में असामान्य बढ़ोत्तरी हुई है। इस गंभीर समस्या मंडी के अधिकारी नजरअंदाज किए हुए हैं।’
- विक्रम बाजपेयी, रोजा मंडी निरीक्षक
गत तीन महीनों के प्याज के दाम
माह थोक दर प्रति क्विंटल फुटकर दर प्रति किलो
जून 725 रुपये 10 रुपये
जुलाई 1750 रुपये 20 से 25 रुपये
अगस्त 5000 रुपये 60 रुपये
नोट: प्याज की आढ़तों पर पांच प्रतिशत की दर से खरीददारों से कमीशन लिया जाता है।
बारिश के चलते जेल में भी
सब्जियां जुटाना हुआ मुश्किल
शाहजहांपुर। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों और कैदियों को जेल परिसर में ही उगने वाली सब्जियों को बनाकर रोटी दी जाती है। जेल परिसर में उगी सब्जियों में अधिक बारिश होने के कारण बीमारियां लगने लगीं हैं। अधिक बारिश होने के कारण सब्जियों पर छिड़की जा रही कीटनाशक दवाइयां भी असर नहीं कर रहीं। जैसे ही दवा का छिड़काव किया जाता है, वैसे ही बारिश आ जाने के कारण वह धुल जाती है। जेल अधीक्षक ने बताया कि इसके बावजूद मशक्कत कर बंदियों को सब्जियां मुहैया कराई जा रही हैं।