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दो दिन पति का शव सीने से लगाए फफकती रही वो
अंकित चौधरी
Updated Thu, 20 Jun 2013 01:04 AM IST
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उत्तराखंड के बदरीनाथ में होटल में पानी घुसने पर यहां ठहरे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया। होटल में रुके सहारनपुर निवासी सविता और उसके रिटायर्ड बैंक अधिकारी पति भी सुरक्षित ठौर की तलाश में बाहर निकले।
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होटल के बाहर बाढ़ जैसे हालात में हर तरफ मौत की गूंज थी। सविता और उसके पति एक-दूसरे का हाथ थामे पहाड़ पर ऐसे स्थान की तलाश कर रहे थे, जहां पानी का बहाव न हो। घंटों सुरक्षित स्थान की तलाश में सुबह हो गई।
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सोमवार को पानी और मलबे के साथ आया हल्की गति का झोंका सविता के पति को लगा। वह चोटिल हो गए, साहसी सविता ने पति का हाथ नहीं छोड़ा। मलबे से बचाया तो वह अचेत थे। सहायता के लिए घंटों चीखती रही, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। पति को खो चुकी सविता ने शव को सुरक्षित जगह रखा और बारिश रुकने, मदद मिलने का इंतजार करती रही।
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मंगलवार रात प्रशासन की टीम ने पति के शव के साथ फफकती सविता से घर का पता और मोबाइल नंबर लिया। मंगलवार तड़के साढ़े पांच बजे सविता के बेटे मुकेश नागपाल को प्रशासन ने पिता सुरेंद्र नागपाल की मौत होने, मां के जिंदा होने की सूचना दी। मुकेश तीन घंटे बाद मंगलवार सुबह सहस्रधार स्थित हैलीपैड पहुंच गये थे। सुबह से शाम तक बदरीनाथ जाने के लिए व्यवस्था में लगे रहे।
वे हैलीपैड संचालकों से रो-रो कर ले जाने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। मुकेश ने बताया कि उन्हें बदरीनाथ ले जाने के लिए दो लाख रुपये मांगे जा रहे थे। लेकिन इतनी रकम एडवांस देने के लिए उनके पास नहीं थी।
रात भी हैलीपैड पर बीत गई, मां ने एक सिपाही के सहारे उससे संपर्क किया। लेकिन वह करते तो क्या? बुधवार सुबह जो भी हैलीपैड पहुंचा रोते मुकेश उसी से मां-पिता के पास तक एक बार पहुंचाने की गुहार लगा रहे थे। दोपहर दस बजे हैलीपैड पहुंचे साकेत बहुगुणा को देखकर वह उनके आगे बार-बार हाथ जोड़कर रोए।
साकेत ने कंपनी संचालकों से उसे बदरीनाथ पहुंचाने को कहा और खुद चॉपर में सवार होकर मातली चले गए। तब जाकर उसे कंपनी संचालक बदरीनाथ ले गए। पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद मुकेश ने दून में मौजूद साथी को सूचना दी। मुकेश अपनी मां समेत अभी बदरीनाथ में ही फंसे हुए हैं।