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घाघरा नदी के बिड़हर घाट पुल का एप्रोच धंसा, आवागमन बंद
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धनघटा के बिड़हर घाट पुल के पास धंसा एप्रोच
- फोटो : KHALILABAD
घाघरा नदी के बिड़हर घाट पुल का एप्रोच धंसा, आवागमन बंद
धनघटा और टांडा-जहांगीरगंज मार्ग पर बैरियर लगाकर रोके गए वाहन
रूट डायवर्जन होने से आंबेडकरनगर जाने के लिए अधिक दूूरी तय करनी पड़ रही है
एनएच बस्ती की ओर से धंसे एप्रोच को ठीक कराने की शुरू हुई कवायद
अमर उजाला ब्यूरो
धनघटा/संतकबीरनगर। घाघरा नदी के बिड़हर घाट पर बने पुल का एप्रोच शुक्रवार की शाम संतकबीनगर की सीमा में धंस गया। इसकी वजह से प्रशासन ने पुल से होकर आने-जाने वाले वाहनों को बैरियर लगाकर रोकवा दिया। इसके साथ ही आंबेडकरनगर की ओर जाने वाले वाहनों का रूट डायवर्जन करा दिया। इससे लोगों को करीब 100 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि शाम को पुल के एप्रोच की मरम्मत करा दी गई और आवागमन शुरू हो गया।
वर्ष 2005 में घाघरा नदी के बिड़हर घाट पुल का शिलान्यास तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने किया था। इसके निर्माण के लिए सेतु निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था। 37 करोड़ की लागत से पुल वर्ष 2009 में बनकर तैयार होना था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद पुल का निर्माण कार्य लंबे समय के लिए ठप हो गया। उसके बाद वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो पुल का एस्टीमेट रिवाइज हुआ और लागत बढ़कर 60 करोड़ हो गई। 1074 मीटर लंबे पुल पर कुल 37 खंभे बनाए गए हैं। पुल के एप्रोच मार्ग पर 22 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। 17 दिसंबर 2014 को पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पुल का उद्घाटन किया था। उसके बाद से पुल के रास्ते आवागमन शुरू हो गया। इस पुल के बन जाने से आंबेडकरनगर, आजमगढ़, वाराणसी, प्रतापगढ़, जौनपुर, प्रयागराज आदि शहरों की दूरी करीब 100 किलोमीटर कम हो गई। प्रतिदिन 4000 से 5000 तक छोटे और बड़े वाहन इस पुल से होकर गुजरते हैं। शुक्रवार की शाम बिड़हर घाट पुलिस चौकी से महज 25 मीटर की दूरी पर पुल के एप्रोच में होल देखकर पुलिस कर्मी सहम गए। पुलिस कर्मियों ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को देने के साथ पुल पर आने-जाने वाले वाहनों को रोक दिया। प्रशासन ने रात में ही धनघटा में बैरियर लगाकर बिड़हर घाट की तरफ जाने वाले वाहनों को रोक दिया। उधर, आंबेडकरनगर की पुलिस ने टांडा-जहांगीरगंज मार्ग से पुल की तरफ आने से वाहनों को रोक दिया। धनघटा से ही रूट डायवर्जन करा दिया गया है। आंबेडकरनगर जाने के लिए बस्ती के कलवारी से होकर टांडा पुल के रास्ते या फिर गोरखपुर के सिकरीगंज से होकर बड़हलगंज के रास्ते आवागमन शुरू हुआ। इससे लोगों को आंबेडकरनगर, आजमगढ़, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ जाने के लिए 80 से 100 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर एके सिंह ने बताया कि करीब 60 करोड़ की लागत से पुल बनाया गया था। एप्रोच बनाने का कार्य पीडब्ल्यूडी ने किया था। 2014 में ही पुल को हैंडओवर कर दिया गया था। एप्रोच में बने होल को ठीक कराने का दायित्व पीडब्ल्यूडी का है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन रामजीत प्रसाद ने बताया कि वह मार्ग दो साल पहले एनएच को चला गया है। बिड़हर घाट पुल के पास एप्रोच के धंसने की सूचना जैसे ही मिली, वैसे ही एनएच बस्ती के अधिकारियों को दे दी गई है। एनएच की ओर से धंसे एप्रोच को ठीक कराए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस संबंध में एसडीएम धनघटा गुलशन कुमार ने कहा कि बिड़हर घाट पुल के एप्रोच में हुए गड्ढे को भरने के लिए एनएच की टीम बस्ती से सामान के साथ पहुंच रही है। देर शाम तक गड्ढा भर दिए जाने की उम्मीद है। उसके बाद आवागमन के लिए रास्ता खोलवा दिया जाएगा। महज छह वर्ष में एप्रोच के क्षतिग्रस्त हो जाने पर लोगों ने कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया है।
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धनघटा और टांडा-जहांगीरगंज मार्ग पर बैरियर लगाकर रोके गए वाहन
रूट डायवर्जन होने से आंबेडकरनगर जाने के लिए अधिक दूूरी तय करनी पड़ रही है
एनएच बस्ती की ओर से धंसे एप्रोच को ठीक कराने की शुरू हुई कवायद
अमर उजाला ब्यूरो
धनघटा/संतकबीरनगर। घाघरा नदी के बिड़हर घाट पर बने पुल का एप्रोच शुक्रवार की शाम संतकबीनगर की सीमा में धंस गया। इसकी वजह से प्रशासन ने पुल से होकर आने-जाने वाले वाहनों को बैरियर लगाकर रोकवा दिया। इसके साथ ही आंबेडकरनगर की ओर जाने वाले वाहनों का रूट डायवर्जन करा दिया। इससे लोगों को करीब 100 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि शाम को पुल के एप्रोच की मरम्मत करा दी गई और आवागमन शुरू हो गया।
वर्ष 2005 में घाघरा नदी के बिड़हर घाट पुल का शिलान्यास तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने किया था। इसके निर्माण के लिए सेतु निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था। 37 करोड़ की लागत से पुल वर्ष 2009 में बनकर तैयार होना था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद पुल का निर्माण कार्य लंबे समय के लिए ठप हो गया। उसके बाद वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो पुल का एस्टीमेट रिवाइज हुआ और लागत बढ़कर 60 करोड़ हो गई। 1074 मीटर लंबे पुल पर कुल 37 खंभे बनाए गए हैं। पुल के एप्रोच मार्ग पर 22 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। 17 दिसंबर 2014 को पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पुल का उद्घाटन किया था। उसके बाद से पुल के रास्ते आवागमन शुरू हो गया। इस पुल के बन जाने से आंबेडकरनगर, आजमगढ़, वाराणसी, प्रतापगढ़, जौनपुर, प्रयागराज आदि शहरों की दूरी करीब 100 किलोमीटर कम हो गई। प्रतिदिन 4000 से 5000 तक छोटे और बड़े वाहन इस पुल से होकर गुजरते हैं। शुक्रवार की शाम बिड़हर घाट पुलिस चौकी से महज 25 मीटर की दूरी पर पुल के एप्रोच में होल देखकर पुलिस कर्मी सहम गए। पुलिस कर्मियों ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को देने के साथ पुल पर आने-जाने वाले वाहनों को रोक दिया। प्रशासन ने रात में ही धनघटा में बैरियर लगाकर बिड़हर घाट की तरफ जाने वाले वाहनों को रोक दिया। उधर, आंबेडकरनगर की पुलिस ने टांडा-जहांगीरगंज मार्ग से पुल की तरफ आने से वाहनों को रोक दिया। धनघटा से ही रूट डायवर्जन करा दिया गया है। आंबेडकरनगर जाने के लिए बस्ती के कलवारी से होकर टांडा पुल के रास्ते या फिर गोरखपुर के सिकरीगंज से होकर बड़हलगंज के रास्ते आवागमन शुरू हुआ। इससे लोगों को आंबेडकरनगर, आजमगढ़, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ जाने के लिए 80 से 100 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर एके सिंह ने बताया कि करीब 60 करोड़ की लागत से पुल बनाया गया था। एप्रोच बनाने का कार्य पीडब्ल्यूडी ने किया था। 2014 में ही पुल को हैंडओवर कर दिया गया था। एप्रोच में बने होल को ठीक कराने का दायित्व पीडब्ल्यूडी का है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन रामजीत प्रसाद ने बताया कि वह मार्ग दो साल पहले एनएच को चला गया है। बिड़हर घाट पुल के पास एप्रोच के धंसने की सूचना जैसे ही मिली, वैसे ही एनएच बस्ती के अधिकारियों को दे दी गई है। एनएच की ओर से धंसे एप्रोच को ठीक कराए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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इस संबंध में एसडीएम धनघटा गुलशन कुमार ने कहा कि बिड़हर घाट पुल के एप्रोच में हुए गड्ढे को भरने के लिए एनएच की टीम बस्ती से सामान के साथ पहुंच रही है। देर शाम तक गड्ढा भर दिए जाने की उम्मीद है। उसके बाद आवागमन के लिए रास्ता खोलवा दिया जाएगा। महज छह वर्ष में एप्रोच के क्षतिग्रस्त हो जाने पर लोगों ने कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया है।
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