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बच्चों में वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ा, जिला अस्पताल में बेड पड़ गए कम, 44 बेड पर भर्ती हैं 62 बच्चे
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में बच्चों में वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1500 मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें करीब 250 से अधिक बच्चे वायरल फीवर से पीड़ित आ रहे हैं। जिला अस्पतातल के पीकू व बच्चा वार्ड में उपलब्ध 44 बेड पर 62 बच्चे भर्ती हैं। कई बेड पर मजबूरन चिकित्सकों को दो-दो बच्चों को भर्ती कर उपचार करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने बताया कि ओपीडी में 1500 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इसमें 250 से अधिक वायरल फीवर पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। वहीं वायरल फीवर पीड़ित महिला व बड़ों की संख्या 350 से अधिक है। जरूरी होने पर भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। अन्यथा दवा देकर घर पर बचाव के साथ दवा का सेवन करने की सलाह दी जा रही है। उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से बेहतर उपचार करने का प्रयास किया जा रहा है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी राय और डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि बच्चों के बुखार को लेकर सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। किसी को भी बुखार होता है तो वह इधर उधर भटकने के बजाय सीधे अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे। यही नहीं अपने मन से या किसी से पूछ कर मेडिकल स्टोर से खरीदकर भी कोई दवा न खाए। अगर आपके पास साधन नहीं हो तो निशुल्क एंबुलेंस सुविधा का प्रयोग करें। बच्चों में होने वाले बुखार के प्रति तो और सतर्कता की जरुरत है। बुखार के इलाज में की गई देरी मरीज में जटिलताएं बढ़ा सकती है। अपर सीएमओ वेक्टर्न बार्न डॉ वीपी पांडेय ने बताया कि किसी अप्रशिक्षित या फिर मेडिकल स्टोर आदि चलाने वालों से बुखार आदि की दवाएं कदापि न लें। ऐसा करने से उनका बुखार और भी बढ़ सकता है। जिले की आशा कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में बुखार के प्रति लोगों को संवेदीकृत करें।
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जिले में बच्चों के लिए हैं 48 वेंटीलेटरयुक्त बेड
अपर सीएमओ डॉ. वीपी पांडेय ने बताया कि बच्चों के इलाज के लिए जिले में छह ईटीसी कार्यरत हैं। इनमें प्रशिक्षित स्टाफ नर्स के साथ ही साथ चिकित्सक हैं। हैंसर व मेंहदावल आईसीयू में 12-12 बेड हैं। वहीं जिला अस्पताल में बने जेई-एईएस ट्रीटमेंट सेंटर (पीआईसीयू) में 24 बेड हैं। इस प्रकार कुल 48 बेड इंसेटिव केयर यूनिट के हैं जो ऑक्सीजन और वेंटीलेटर से लैस हैं। इन्हें प्रशिक्षित आईसीयू स्टाफ द्वारा संचालित किया जाता है।
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संतकबीरनगर। जिले में बच्चों में वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1500 मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें करीब 250 से अधिक बच्चे वायरल फीवर से पीड़ित आ रहे हैं। जिला अस्पतातल के पीकू व बच्चा वार्ड में उपलब्ध 44 बेड पर 62 बच्चे भर्ती हैं। कई बेड पर मजबूरन चिकित्सकों को दो-दो बच्चों को भर्ती कर उपचार करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने बताया कि ओपीडी में 1500 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इसमें 250 से अधिक वायरल फीवर पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। वहीं वायरल फीवर पीड़ित महिला व बड़ों की संख्या 350 से अधिक है। जरूरी होने पर भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। अन्यथा दवा देकर घर पर बचाव के साथ दवा का सेवन करने की सलाह दी जा रही है। उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से बेहतर उपचार करने का प्रयास किया जा रहा है।
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वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी राय और डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि बच्चों के बुखार को लेकर सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। किसी को भी बुखार होता है तो वह इधर उधर भटकने के बजाय सीधे अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे। यही नहीं अपने मन से या किसी से पूछ कर मेडिकल स्टोर से खरीदकर भी कोई दवा न खाए। अगर आपके पास साधन नहीं हो तो निशुल्क एंबुलेंस सुविधा का प्रयोग करें। बच्चों में होने वाले बुखार के प्रति तो और सतर्कता की जरुरत है। बुखार के इलाज में की गई देरी मरीज में जटिलताएं बढ़ा सकती है। अपर सीएमओ वेक्टर्न बार्न डॉ वीपी पांडेय ने बताया कि किसी अप्रशिक्षित या फिर मेडिकल स्टोर आदि चलाने वालों से बुखार आदि की दवाएं कदापि न लें। ऐसा करने से उनका बुखार और भी बढ़ सकता है। जिले की आशा कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में बुखार के प्रति लोगों को संवेदीकृत करें।
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जिले में बच्चों के लिए हैं 48 वेंटीलेटरयुक्त बेड
अपर सीएमओ डॉ. वीपी पांडेय ने बताया कि बच्चों के इलाज के लिए जिले में छह ईटीसी कार्यरत हैं। इनमें प्रशिक्षित स्टाफ नर्स के साथ ही साथ चिकित्सक हैं। हैंसर व मेंहदावल आईसीयू में 12-12 बेड हैं। वहीं जिला अस्पताल में बने जेई-एईएस ट्रीटमेंट सेंटर (पीआईसीयू) में 24 बेड हैं। इस प्रकार कुल 48 बेड इंसेटिव केयर यूनिट के हैं जो ऑक्सीजन और वेंटीलेटर से लैस हैं। इन्हें प्रशिक्षित आईसीयू स्टाफ द्वारा संचालित किया जाता है।