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जिले की 35 सड़कों की नहीं हुई मरम्मत
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Sat, 07 May 2016 12:15 AM IST
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सड़क के बीच बना गड्ढा।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
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चार साल पहले आई बाढ़ में खस्ताहाल हुई जिले की 35 सड़कों की मरम्मत में बजट न मिलने से पेंच फंस गया है। जर्जर सड़कों से होकर गुजरने वाले राहगीर हांफ जाते है और शासन- प्रशासन को कोस रहे है। जिला प्रशासन बजट की मांग को लेकर आपदा राहत आयुक्त को कई बार पत्र भेज चुका है, लेकिन दूसरी किश्त की धनराशि मुहैया नहीं हो पा रही है।
वर्ष 2012-13 में जिले में भीषण बाढ़ आई थी। जिसमें सर्वाधिक तबाही घाघरा ने मचाई थी और एमबीडी बांध के किनारे बसे कई गांव के लोग प्रभावित हुए थे। जबकि अतिवृष्टि से परेशानी बढ़ी थी। बाढ़ से जिले की सड़के भी टूट फूट कर बिखर गई थी। जर्जर हुई सड़कों को चिन्हित कर मरम्मत कराने के लिए डीएम ने कमेटी गठित की थी। गठित कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट डीएम को प्रेषित की। डीएम की तरफ से आपदा राहत कोष से 35 सड़कों की मरम्मत के लिए शासन को डिमांड भेजी गई। आपदा राहत कोष ने 35 सड़कों की मरम्मत के लिए करीब 20 करोड़ रुपये स्वीकृत करते हुए करीब दस करोड़ की धनराशि अवमुक्त किया था। शासन ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को कार्यदाई संस्था नामित किया था। दूसरी किश्त की धनराशि अवमुक्त नहीं होने से जर्जर सड़कों की मरम्मत में पेंच फंस गया। सड़कों की हालत ऐसी है कि उस रास्ते गुजरने वाले राहगीरों को बेहद परेशानी हो रही है। क्षेत्र के राम प्रताप यादव, घनश्याम पांडेय,मनोज और ब्रदीनाथ,प्रयागनाथ,हीरा लाल यादव ने कहा कि जर्जर सड़क से सफर करने में कितनी परेशानी हो रही है, इसका अंदाजा यदि जिम्मेदारों हो तो सड़क कब की बन गई होती। लोगों ने चेताया कि यदि सड़के नहीं बनी तो आने वाले चुनाव में यहां की जनता शासन- प्रशासन से इसका हिसाब लेंगी। कुछ लोग तो जरजर सड़क के मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट जाने का मूड बना रहे है।
केंद्र सरकार ने नहीं दिया पैसा: विधायक
सपा विधायक अलगू चौहान ने बताया कि मुख्य सचिव को तीन- चार पत्र लिख चुके है कि 2012 की बाढ़ एवं जलभराव में बर्बाद हुई सड़कों की मरम्मत के लिए दूसरी किश्त की धनराशि दिलाई जाए। जिला प्रशासन की तरफ से प्रथम किश्त की धनराशि का उपभोग करके दूसरी किश्त की धनराशि मांगी गई है। आरोप था कि केंद्र सरकार ने बजट हीं नहीं दिया। जबकि सीएम ने जर्जर सड़कों के लिए केंद्र सरकार से बजट की मांग की थी।
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बाढ़ से जर्जर हुई जिले की 67 सड़कों के लिए आपदा राहत कोष से धन की मांग की गई थी। 35 सड़कों के लिए 1970.61 लाख रुपये स्वीकृत हुआ था। प्रथम किश्त की धनराशि अवमुक्त हुई और कार्यदाई संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने काम भी कराया। दूसरी किश्त की धनराशि की मांग के लिए आपदा राहत आयुक्त को कई बार पत्र भेजा गया। आपदा राहत कोष से सूखा से प्रभावित किसानों को मदद दी जा रही है,ऐसी परिस्थिति बता कर बजट नहीं होने का जिक्र करते हुए अन्य मद से सड़कों की मरम्मत कराए जाने की बात बताई गई। कार्यदाई संस्था के पास कोई विभागीय बजट नहीं है। जिसकी वजह से काम रुका हुआ है। फिर भी आपदा राहत आयुक्त को पत्र भेज कर दूसरी किश्त की मांग करेंगे। अधूरी सड़कों की मरम्मत कराए जाने की पूरी कोशिश कराएंगे।
डा. सरोज कुमार ,डीएम
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वर्ष 2012-13 में जिले में भीषण बाढ़ आई थी। जिसमें सर्वाधिक तबाही घाघरा ने मचाई थी और एमबीडी बांध के किनारे बसे कई गांव के लोग प्रभावित हुए थे। जबकि अतिवृष्टि से परेशानी बढ़ी थी। बाढ़ से जिले की सड़के भी टूट फूट कर बिखर गई थी। जर्जर हुई सड़कों को चिन्हित कर मरम्मत कराने के लिए डीएम ने कमेटी गठित की थी। गठित कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट डीएम को प्रेषित की। डीएम की तरफ से आपदा राहत कोष से 35 सड़कों की मरम्मत के लिए शासन को डिमांड भेजी गई। आपदा राहत कोष ने 35 सड़कों की मरम्मत के लिए करीब 20 करोड़ रुपये स्वीकृत करते हुए करीब दस करोड़ की धनराशि अवमुक्त किया था। शासन ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को कार्यदाई संस्था नामित किया था। दूसरी किश्त की धनराशि अवमुक्त नहीं होने से जर्जर सड़कों की मरम्मत में पेंच फंस गया। सड़कों की हालत ऐसी है कि उस रास्ते गुजरने वाले राहगीरों को बेहद परेशानी हो रही है। क्षेत्र के राम प्रताप यादव, घनश्याम पांडेय,मनोज और ब्रदीनाथ,प्रयागनाथ,हीरा लाल यादव ने कहा कि जर्जर सड़क से सफर करने में कितनी परेशानी हो रही है, इसका अंदाजा यदि जिम्मेदारों हो तो सड़क कब की बन गई होती। लोगों ने चेताया कि यदि सड़के नहीं बनी तो आने वाले चुनाव में यहां की जनता शासन- प्रशासन से इसका हिसाब लेंगी। कुछ लोग तो जरजर सड़क के मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट जाने का मूड बना रहे है।
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केंद्र सरकार ने नहीं दिया पैसा: विधायक
सपा विधायक अलगू चौहान ने बताया कि मुख्य सचिव को तीन- चार पत्र लिख चुके है कि 2012 की बाढ़ एवं जलभराव में बर्बाद हुई सड़कों की मरम्मत के लिए दूसरी किश्त की धनराशि दिलाई जाए। जिला प्रशासन की तरफ से प्रथम किश्त की धनराशि का उपभोग करके दूसरी किश्त की धनराशि मांगी गई है। आरोप था कि केंद्र सरकार ने बजट हीं नहीं दिया। जबकि सीएम ने जर्जर सड़कों के लिए केंद्र सरकार से बजट की मांग की थी।
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बाढ़ से जर्जर हुई जिले की 67 सड़कों के लिए आपदा राहत कोष से धन की मांग की गई थी। 35 सड़कों के लिए 1970.61 लाख रुपये स्वीकृत हुआ था। प्रथम किश्त की धनराशि अवमुक्त हुई और कार्यदाई संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने काम भी कराया। दूसरी किश्त की धनराशि की मांग के लिए आपदा राहत आयुक्त को कई बार पत्र भेजा गया। आपदा राहत कोष से सूखा से प्रभावित किसानों को मदद दी जा रही है,ऐसी परिस्थिति बता कर बजट नहीं होने का जिक्र करते हुए अन्य मद से सड़कों की मरम्मत कराए जाने की बात बताई गई। कार्यदाई संस्था के पास कोई विभागीय बजट नहीं है। जिसकी वजह से काम रुका हुआ है। फिर भी आपदा राहत आयुक्त को पत्र भेज कर दूसरी किश्त की मांग करेंगे। अधूरी सड़कों की मरम्मत कराए जाने की पूरी कोशिश कराएंगे।
डा. सरोज कुमार ,डीएम