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Sant Kabir Nagar News: टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक लामबंद
Mon, 15 Sep 2025 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 15 Sep 2025 11:14 PM IST
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कलक्ट्रेट पर एडीएम को ज्ञापन देते राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के लोग-स्रोत शिक्षक
संतकबीरनगर। परिषदीय विद्यालयों में सेवारत शिक्षकों के टीईटी परीक्षा पास करने के सुप्रीम निर्णय को लेकर शिक्षक आक्रोशित हैं। शिक्षकों ने इसे अनुचित बताते हुए फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। सोमवार को जिला मुख्यालय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के फैसले के खिलाफ शिक्षक लामबंद हुए। कलक्ट्रेट पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष नवीन त्रिपाठी ने कहा कि एक सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य कर दिया गया है। यह आदेश उन सभी शिक्षकों पर लागू हो रहा है जिनकी सेवा मात्र कुछ वर्ष बची है या फिर वे रिटायरमेंट के कगार पर हैं। महासंघ ने कहा कि शिक्षा अधिकार अधिनियम तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में यह स्पष्ट उल्लेख है कि टीईटी की परीक्षा उन शिक्षकों को नहीं देनी है।
जिनकी नियुक्त वर्ष 2010 से पहले की है।वर्ष 2010 के बाद नियुक्ति पाए शिक्षकों को एक निश्चित अवधि में टीईटी पास करना अनिवार्य किया गया था। इसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सभी शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया।
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इस निर्णय से देश, प्रदेश के लाखों शिक्षक दुख, निराशा तथा भरी तनाव में हैं। यह निर्णय स्वीकार नहीं है। शिक्षकों पर मंडरा रहे व
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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष नवीन त्रिपाठी ने कहा कि एक सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य कर दिया गया है। यह आदेश उन सभी शिक्षकों पर लागू हो रहा है जिनकी सेवा मात्र कुछ वर्ष बची है या फिर वे रिटायरमेंट के कगार पर हैं। महासंघ ने कहा कि शिक्षा अधिकार अधिनियम तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में यह स्पष्ट उल्लेख है कि टीईटी की परीक्षा उन शिक्षकों को नहीं देनी है।
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जिनकी नियुक्त वर्ष 2010 से पहले की है।वर्ष 2010 के बाद नियुक्ति पाए शिक्षकों को एक निश्चित अवधि में टीईटी पास करना अनिवार्य किया गया था। इसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सभी शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया।
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इस निर्णय से देश, प्रदेश के लाखों शिक्षक दुख, निराशा तथा भरी तनाव में हैं। यह निर्णय स्वीकार नहीं है। शिक्षकों पर मंडरा रहे व