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Sant Kabir Nagar News: सूफी निजामुद्दीन के उर्स की तैयारियां तेज, जुटेंगे विद्वान

Sun, 12 Nov 2023 07:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sun, 12 Nov 2023 07:52 PM IST
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Preparations for Sufi Nizamuddin's Urs intensified, scholars will gather
हजरत सूफी निजामुद्दीन साहब की खानकाह निजामिय पर हो रही तैयारी।
सेमरियावां। ब्लाॅक के अगया में पंद्रह नवंबर को आयोजित होने वाले इस्लामिक विद्वान हजरत सूफी मुफ्ती निजामुद्दीन के ग्यारहवें उर्स की तैयारियां तेज हो गई हैं। उर्स निजामी अकीदत व खुलूस के साथ मनाने के लिए खानकाह को लाईटिंग व फूल मालाओं से सजाया जा रहा है। इसमें शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से मुरीद खानकाह पर पहुंचने लगे हैं। मुरीदों के खाने, रहने की व्यवस्था की गई है।
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हजरत सूफी निजामुद्दीन का शुमार उनके दौर के बड़े सूफी बुजुर्ग और आलिमे दीन के रूप में होता है। यही कारण है कि हर वर्ष इनके सालाना उर्स में शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, अहमदाबाद, मुंबई, गोवा, कोलकाता, बिहार, बंगाल, दिल्ली, नेपाल देश के बड़ी संख्या में मुरीद और अकीदतमंद पहुंचते हैं। सज्जादानशीन मौलाना हबीबुर्रहमान रिजवी ने बताया कि नमाज-ए-फज्र के बाद कुरान खानी से कार्यक्रम शुरू होगा। दोपहर जोहर की नमाज के बाद मजार पर चादरपोशी और गुलपोशी का सिलसिला शुरू होगा और देर शाम तक चलता रहेगा।
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रात में ईशा की नमाज के बाद निजामी कान्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। जिसमें देश के कई बड़े इस्लामिक विद्वान प्रतिभाग करेंगे। 16 नवंबर की सुबह में आठ बजे मजार पर कुल शरीफ के आयोजन के बाद उर्स का कार्यक्रम समाप्त होगा। अकीदतमंद खानकाह को सजा कर भव्य बनाने के लिए अंतिम रूप देने में लगे हैं। हर तरफ प्रकाश की व्यवस्था की जा रही है। बताया कि खतीबुल बराहीन अलहाज हजरत मोहम्मद निजामुद्दीन मुहद्दिस बस्तवी का जन्म सेमरियावां ब्लाॅक के अगया में 15 जनवरी 1928 को हुआ। बुनियादी तालीम घर पर हुई। इसके बाद 1947 में आगे की तालीम बसडीला में हासिल की। उच्च शिक्षा 1948 में जमीयतुल अशरफिया मुबारकपुर से ली। मुबारकपुर में शिक्षा लेने के बाद 1952 में दस्तार ए बंदी हुई। जन्म से ही सीधे व सरल स्वभाव के होने के कारण इनका नाम सू़फी पड़ गया। 14 मार्च 2013 को पैतृक गांव अगया में निधन हो गया था।
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तालीम को बढ़ावा देने के लिए की थी स्कूलों की स्थापना
सेमरियावां। भारत के प्रसिद्ध सूफी बुजुर्ग इस्लामिक विद्वान हजरत सुफी निजामुद्दीन मुहद्दिस बस्तवी ने अरबी तालीम की दुनिया में एक नया आयाम दिया। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सैकड़ों मदरसों का शिलान्यास किया। अमन-ओ-शांति के प्रतीक सूफी साहब की किताबों को पढ़ कर लोग अमन व शांति का संदेश दे रहे हैं। पूरी जिंदगी अपने अमल व किरदार से सीधा रास्ता दिखाते रहे। हजरत सूफी निजामुददीन ने पूरी जिंदगी तालीम को बढ़ावा देने के लिए सैकड़ों मदरसे की स्थापना किया। अपनी कलम व जुबान से समाज को एक अच्छा रास्ता दिखाते रहे।

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सूफी साहब ने अपनी हयात-ए-जिंदगी में शिक्षा की खिदमत को अंजाम देते हुए समाज को सीधा रास्ता दिखाने के लिए एक दर्जन से अधिक किताबेंं लिखीं। इनमें प्रमुख रूप से बरकाते रोजा, हुक़ूके वालिदैन, फजाइले मदीना, फलसफए कुर्बानी, बरकाते मिस्वाक, दाढ़ी की अहमियत, फजाइले तिलावते कुरान मजीद, इख्तियारते इमामुन नबियीन, खाने-पीने का इस्लामी तरीका जो काबिल-ए-जिक्र है।
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