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Sant Kabir Nagar News: मंदिरों में हुई मां स्कंदमाता की पूजा

Thu, 15 Oct 2026 11:59 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:59 PM IST
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Goddess Skandamata was worshipped in temples.
समय माता मंदिर में दर्शन करते लोग-संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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संतकबीरनगर। नवरात्र के पांचवें दिन दुर्गा मंदिरों में मां स्कंदमाता की पूजा हुई। लोगों ने कपूर, अगरबत्ती जलाकर व नारियल चढ़ाकर माता से आशीर्वाद मांगा। भोर से मंदिरों में लोग पूजा पाठ के लिए जुट गए थे। यह क्रम देर शाम तक चलता रहा। शाम के समय मंदिरों में आरती हुई, जिसमें महिलाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
नवरात्र में हर दिन माता के नए- नए रूपों की पूजा की जा रही है। बृहस्पतिवार को माता के पांचवें रूप स्कंदमाता की पूजा हुई। शहर के समय माता मंदिर, उस्का वन देवी मंदिर, बरदहिया की दुर्गा मंदिर, मेंहदावल की नगर वाली माता मंदिर आदि जगहों पर विधि विधान से पूजा की गई।
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इसी तरह से बखिरा, धनघटा, महुली, बेलहर, सांथा, मेंहदावल आदि क्षेत्रो के मंदिरो में भी लोग पूजा अर्चन किए। समय माता मंदिर के पुजारी चंदन बाबा ने बताया कि देवी दुर्गा की आराधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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इस दिन भक्त केले, खीर और अन्य सात्विक पकवानों का भोग अपनी परंपरा के अनुसार अर्पित करते हैं। केले का भोग लगाना आसान है और इसके लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। मां स्कंदमाता को ममता, करुणा और वात्सल्य का प्रतीक माना जाता है। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं, जिन्हें स्कंद के नाम से भी जाना जाता है। इसी कारण देवी के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा।

बताया गया कि नवरात्र के पांचवें दिन भक्त मां स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा करते हैं और फल, मिठाई तथा सात्विक पकवानों का भोग लगाते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दूध से बनी मिठाइयां, खीर और अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि हर दिन मां को भोग अर्पित करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। प्रसाद तैयार करने के लिए शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल करें और मन में श्रद्धा रखते हुए देवी को भोग लगाएं। धार्मिक आस्था में भोग का महत्व केवल पकवान से नहीं, बल्कि भक्त की भावना और समर्पण से भी जुड़ा होता है।
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