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Sant Kabir Nagar News: पुत्रों से बिछड़ने की पीड़ा पर दशरथ हुए भावुक
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धर्मसिंहवा में चल रहे रामलीला में मंचन करते कलाकार-संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मसिंहवा। क्षेत्र के मेंहदूपार में चल रही रामलीला मंचन में बुधवार को भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने महर्षि विश्वामित्र द्वारा राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को मांगने से लेकर ताड़का वध, सुबाहु वध और जनकपुर में वाटिका भ्रमण तक के दृश्यों का मंचन किया।
रामलीला के प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंचकर यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को साथ ले जाने के लिए कहते हैं। अपने प्रिय पुत्रों को वन में भेजने की बात सुनकर राजा दशरथ भावुक हो उठते हैं। अंततः वे राम-लक्ष्मण के कोमल हाथों को महर्षि विश्वामित्र के हाथों में सौंप देते हैं लेकिन पुत्रों से बिछड़ने की पीड़ा के कारण कुछ कह नहीं पाते। यह मार्मिक दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे।
इसके बाद श्रीराम ताड़का का वध करते हैं और यज्ञ में बाधा डालने वाले राक्षस सुबाहु का संहार कर ऋषि-मुनियों के यज्ञ की रक्षा करते हैं। आगे राम-लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचते हैं, जहां वाटिका भ्रमण के सुंदर दृश्य का मंचन किया जाता है। रामलीला के दौरान कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
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मंचन देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। इस दौरान पूर्व न्यायाधीश राघवेंद्र पांडेय, मनीष शुक्ला, शेखर दास, चैतू राजभर, विशाल गौड़, विक्रम गौड़, अंबरीश पांडेय, अश्वनी शुक्ला, विपिन कुमार आदि मौजूद रहे।ह
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धर्मसिंहवा। क्षेत्र के मेंहदूपार में चल रही रामलीला मंचन में बुधवार को भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने महर्षि विश्वामित्र द्वारा राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को मांगने से लेकर ताड़का वध, सुबाहु वध और जनकपुर में वाटिका भ्रमण तक के दृश्यों का मंचन किया।
रामलीला के प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंचकर यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को साथ ले जाने के लिए कहते हैं। अपने प्रिय पुत्रों को वन में भेजने की बात सुनकर राजा दशरथ भावुक हो उठते हैं। अंततः वे राम-लक्ष्मण के कोमल हाथों को महर्षि विश्वामित्र के हाथों में सौंप देते हैं लेकिन पुत्रों से बिछड़ने की पीड़ा के कारण कुछ कह नहीं पाते। यह मार्मिक दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे।
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इसके बाद श्रीराम ताड़का का वध करते हैं और यज्ञ में बाधा डालने वाले राक्षस सुबाहु का संहार कर ऋषि-मुनियों के यज्ञ की रक्षा करते हैं। आगे राम-लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचते हैं, जहां वाटिका भ्रमण के सुंदर दृश्य का मंचन किया जाता है। रामलीला के दौरान कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
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मंचन देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। इस दौरान पूर्व न्यायाधीश राघवेंद्र पांडेय, मनीष शुक्ला, शेखर दास, चैतू राजभर, विशाल गौड़, विक्रम गौड़, अंबरीश पांडेय, अश्वनी शुक्ला, विपिन कुमार आदि मौजूद रहे।ह