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Sant Kabir Nagar News: अखंड सुहाग के लिए सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा की
Fri, 19 May 2023 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 19 May 2023 11:42 PM IST
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मेंहदावल के बनकसिया गांव में वट सावित्री की पूजा करती महिलाएं।संवाद
मेंहदावल। पति की दीर्घायु सुख- समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए सुहागिनों ने शुक्रवार को वट सावित्री व्रत रखा है। शहर से लेकर गांव तक सामूहिक रूप से महिलाओं ने पूजा की।
तहसील क्षेत्र में वट सावित्री पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रख पति की लंबी उम्र की कामना की। इस दौरान क्षेत्र के अलग-अलग जगहों पर बरगद के पेड़ पर महिलाओं ने पूजा भी की। शुक्रवार सुबह छह बजे से क्षेत्र के अलग-अलग पेड़ के पास महिलाएं पहुंचीं और विधि पूर्वक पूजन किया। महिलाएं व्रत के साथ वट वृक्ष के पूजन में विशेष रूप से इस खास दिन पर महीन धागे से वट वृक्ष को रक्षा सूत्र से परिक्रमा करके बांधती हैं। महिलाएं इसी तरह से वृक्षों में पूजन करते हुए और परिक्रमा लगाते हुए दिखाई दीं।
मान्यता है कि सावित्री के पति सत्यवान को वट वृक्ष के नीचे ही यमराज ने जीवनदान दिया था। उस दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या थी। इसलिए इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा। सनातन संस्कृति में यह भी माना जाता है कि वट में ब्रह्म, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास है। महिलाएं पूरे दिन उपवास पर रहीं। सायंकाल केवल एक अनाज का ही सेवन किया।
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तहसील क्षेत्र में वट सावित्री पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रख पति की लंबी उम्र की कामना की। इस दौरान क्षेत्र के अलग-अलग जगहों पर बरगद के पेड़ पर महिलाओं ने पूजा भी की। शुक्रवार सुबह छह बजे से क्षेत्र के अलग-अलग पेड़ के पास महिलाएं पहुंचीं और विधि पूर्वक पूजन किया। महिलाएं व्रत के साथ वट वृक्ष के पूजन में विशेष रूप से इस खास दिन पर महीन धागे से वट वृक्ष को रक्षा सूत्र से परिक्रमा करके बांधती हैं। महिलाएं इसी तरह से वृक्षों में पूजन करते हुए और परिक्रमा लगाते हुए दिखाई दीं।
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मान्यता है कि सावित्री के पति सत्यवान को वट वृक्ष के नीचे ही यमराज ने जीवनदान दिया था। उस दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या थी। इसलिए इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा। सनातन संस्कृति में यह भी माना जाता है कि वट में ब्रह्म, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास है। महिलाएं पूरे दिन उपवास पर रहीं। सायंकाल केवल एक अनाज का ही सेवन किया।
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