{"_id":"60a2bc0a8ebc3e74fa776b31","slug":"woman-cries-for-treatment-outside-covid-hospital-son-cries-sambhal-news-mbd389317191","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोविड अस्पताल के बाहर इलाज के लिए तड़पी महिला, बेटे रोए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोविड अस्पताल के बाहर इलाज के लिए तड़पी महिला, बेटे रोए
विज्ञापन
संभल। जिले के नरौली स्थित सरकारी कोरोना अस्पताल में भर्ती महिला को रविवार की रात मुरादाबाद के लिए रेफर किया गया लेकिन एंबुलेंस चालक उसे संभल के एशियन हसीना बेगम अस्पताल में बने एल-2 कोविड अस्पताल में छोड़कर चला गया। अस्पताल में तैनात कर्मियों ने महिला को भर्ती तो तत्काल कर लिया लेकिन जब मालूम हुआ कि महिला एलथ्री अस्पताल मुरादाबाद के लिए रेफर की गई है तो कुछ ही देर में बाहर कर दिया। जब अस्पताल कर्मियों ने उसे अस्पताल से बाहर किया तब महिला का ऑक्सीजन का स्तर घट रहा था और उसके बेटे मां की स्थिति देखकर रो रहे थे।
एंबुलेंस को बार-बार कॉल की लेकिन करीब एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। आसपास के लोगों ने महिला को तड़पते हुए देखा तो कोरोना के सर्विलांस अधिकारी को फोन किया और करीब एक घंटे तड़पने के बाद महिला को मुरादाबाद के लिए सरकारी एंबुंलेंस से रेफर किया गया।
दरअसल चंदौसी तहसील के गांव कादरपुर कुकैटा निवासी 65 वर्षीय महिला रविवार को एक निजी अस्पताल में एंटीजन किट की जांच के दौरान संक्रमित आईं थीं। उपचार के लिए नरौली के एल-2 कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उपचार तो दिया लेकिन कुछ ही समय में एलथ्री कोविड अस्पताल मुरादाबाद के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस से भेजा गया लेकिन एंबुलेंस चालक संभल के एशियन हसीना बेगम अस्पताल में छोड़कर चला गया। एशियन हसीना बेगम में महिला को भर्ती कर लिया लेकिन जब कर्मचारियों को मालूम हुआ कि महिला को रेफर एलथ्री के लिए किया गया है तो बाहर कर दिया।
विज्ञापन
इस दौरान महिला को ऑक्सीजन की जरूरत थी लेकिन अस्पताल की ओर से ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई। महिला के बेटे एक घंटे तक अस्पताल के गेट पर रोते रहे और मदद की गुहार लगाते रहे। लेकिन अस्पताल से ऑक्सीजन नहीं मिली। समस्या यह थी कि महिला के बेटे ऑक्सीजन का छोटा सिलिंडर साथ लाए थे लेकिन उसमें ऑक्सीजन नहीं बची थी। इसी दौरान सर्विलांस अधिकारी को सूचना पहुंची और उन्होंने एंबुलेंस की सहायता से मुरादाबाद अस्पताल भेजा।
5500 रुपये सिक्योरिटी जमा करने के बाद मिला था छोटा सिलिंडर
संभल। महिला के बड़े बेटे ने बताया कि जब उसकी मां के संक्रमित होने की जानकारी मिली तो ऑक्सीजन लेवल कम था। निजी अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं मिला। गांव के कुछ लोगों से 5500 रुपये उधार लिए और चंदौसी के बाईपास पर पहुंचे। जहां से 5500 रुपये जमाकर छोटा सिलिंडर मिला। सिलिंडर लेकर गुरुद्वारा पहुंचे और ऑक्सीजन रीफिलिंग कराई। लेकिन वह ऑक्सीजन इतनी थी कि चंदौसी से नरौली अस्पताल पहुंचने तक ही खत्म हो गई।
विज्ञापन
एंबुलेंस को बार-बार कॉल की लेकिन करीब एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। आसपास के लोगों ने महिला को तड़पते हुए देखा तो कोरोना के सर्विलांस अधिकारी को फोन किया और करीब एक घंटे तड़पने के बाद महिला को मुरादाबाद के लिए सरकारी एंबुंलेंस से रेफर किया गया।
विज्ञापन
दरअसल चंदौसी तहसील के गांव कादरपुर कुकैटा निवासी 65 वर्षीय महिला रविवार को एक निजी अस्पताल में एंटीजन किट की जांच के दौरान संक्रमित आईं थीं। उपचार के लिए नरौली के एल-2 कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उपचार तो दिया लेकिन कुछ ही समय में एलथ्री कोविड अस्पताल मुरादाबाद के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस से भेजा गया लेकिन एंबुलेंस चालक संभल के एशियन हसीना बेगम अस्पताल में छोड़कर चला गया। एशियन हसीना बेगम में महिला को भर्ती कर लिया लेकिन जब कर्मचारियों को मालूम हुआ कि महिला को रेफर एलथ्री के लिए किया गया है तो बाहर कर दिया।
विज्ञापन
इस दौरान महिला को ऑक्सीजन की जरूरत थी लेकिन अस्पताल की ओर से ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई। महिला के बेटे एक घंटे तक अस्पताल के गेट पर रोते रहे और मदद की गुहार लगाते रहे। लेकिन अस्पताल से ऑक्सीजन नहीं मिली। समस्या यह थी कि महिला के बेटे ऑक्सीजन का छोटा सिलिंडर साथ लाए थे लेकिन उसमें ऑक्सीजन नहीं बची थी। इसी दौरान सर्विलांस अधिकारी को सूचना पहुंची और उन्होंने एंबुलेंस की सहायता से मुरादाबाद अस्पताल भेजा।
5500 रुपये सिक्योरिटी जमा करने के बाद मिला था छोटा सिलिंडर
संभल। महिला के बड़े बेटे ने बताया कि जब उसकी मां के संक्रमित होने की जानकारी मिली तो ऑक्सीजन लेवल कम था। निजी अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं मिला। गांव के कुछ लोगों से 5500 रुपये उधार लिए और चंदौसी के बाईपास पर पहुंचे। जहां से 5500 रुपये जमाकर छोटा सिलिंडर मिला। सिलिंडर लेकर गुरुद्वारा पहुंचे और ऑक्सीजन रीफिलिंग कराई। लेकिन वह ऑक्सीजन इतनी थी कि चंदौसी से नरौली अस्पताल पहुंचने तक ही खत्म हो गई।