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हाईवे पर नहीं बढ़ाई गई अरिल नदी के पुल की चौड़ाई
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चंदौसी। मुरादाबाद-आगरा हाईवे बने हुए करीब दो दशक हो गए हैं। कागजों में घोषित नेशनल हाईवे पर सड़क तो अच्छी बना दी गई लेकिन इस हाईवे को बनाने में मानकों का पालन नहीं किया गया। जिस तरह सड़क के दोनों ओर बने खड़ंजे पर तारकोल डालकर सड़क को हाईवे नाम दे दिया गया उसी तरह रोड पर पड़ने वाली पुलिस की चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई।
चंदौसी क्षेत्र में गांव अकरौली के पास अरिल नदी पर बने पुराने पुल की न तो चौड़ाई बढ़ाई गई और न ही दूसरा पुल बनाया गया है। यहां हर समय हादसों का खतरा बना रहता है। पुल इतना संकरा है कि दोनों ओर से तेज गति में आए वाहन एक साथ नहीं गुजर सकते हैं। इसके अलावा चंदौसी से मुरादाबाद के बीच कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर भी बना दिए गए हैं, जो मानकों के विपरीत हैं और हादसों का एक कारण भी बन सकते हैं।
मुरादाबाद-आगरा हाईवे पर कई स्थानों पर नदी के पुल तथा नालों की पुलिया बनी हुई है। चंदौसी क्षेत्र के गांव अकरौली के निकट अरिल नदी पर पुल बना हुआ है। इस पुल की चौड़ाई करीब छह मीटर है। इस मार्ग के हाईवे बनने के बाद साइड पटरी यानी खड़ंजे पर ही तारकोल बिछाया गया और चौड़ीकरण किया गया पर अरिल नदी के पुल की चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई। चौड़ाई इतनी है कि दोनों ओर से दो कार तेज गति में नहीं गुजर सकती हैं। आपस में टकराने का भय रहता है। यदि बड़े वाहन यानी ट्रक और बस आ जाए तो दोनों ओर पुल से पहले वाहनों को रोकना पड़ता है। एक-एक वाहन गुजरता है अथवा बिल्कुल धीमी गति से दोनों वाहन पुल से गुजारे जाते हैं। हाईवे बनाते समय पुल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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1950 में नदी में आए पानी में बह गया था लकड़ी का पुल
गांव अकरौली निवासी 84 वर्षीय ठाकुर गज्जू सिंह ने बताया कि करीब सात दशक पहले अरिल नदी में हर समय पानी बहता था। बरसात में बाढ़ की स्थिति रहती थी। 1950 में अरिल नदी में खूब पानी आया था। इसमें अरिल नदी का पुल बह गया था। इसके बाद दिसंबर 1950 में इस पुल निर्माण की नींव रखी गई। निर्माण में तकरीबन चार वर्ष का समय लगा। 1954 में यह पुल बनकर तैयार हुआ।
हाईवे पर बना दिए स्पीड ब्रेकर
चंदौसी। मुरादाबाद-आगरा हाईवे मानकों की दृष्टि से एक भी शर्त को पूरा नहीं करता है। चंदौसी से मुरादाबाद के बीच इस हाईवे पर दो गांव में चार स्थानों पर बड़े स्पीड ब्रेकर लगे हैं, जो हाईवे की शर्त में शामिल नहीं हैं। स्पीड ब्रेकर रात के समय हादसों का एक बड़ा कारण भी बन सकते हैं।
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चंदौसी क्षेत्र में गांव अकरौली के पास अरिल नदी पर बने पुराने पुल की न तो चौड़ाई बढ़ाई गई और न ही दूसरा पुल बनाया गया है। यहां हर समय हादसों का खतरा बना रहता है। पुल इतना संकरा है कि दोनों ओर से तेज गति में आए वाहन एक साथ नहीं गुजर सकते हैं। इसके अलावा चंदौसी से मुरादाबाद के बीच कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर भी बना दिए गए हैं, जो मानकों के विपरीत हैं और हादसों का एक कारण भी बन सकते हैं।
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मुरादाबाद-आगरा हाईवे पर कई स्थानों पर नदी के पुल तथा नालों की पुलिया बनी हुई है। चंदौसी क्षेत्र के गांव अकरौली के निकट अरिल नदी पर पुल बना हुआ है। इस पुल की चौड़ाई करीब छह मीटर है। इस मार्ग के हाईवे बनने के बाद साइड पटरी यानी खड़ंजे पर ही तारकोल बिछाया गया और चौड़ीकरण किया गया पर अरिल नदी के पुल की चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई। चौड़ाई इतनी है कि दोनों ओर से दो कार तेज गति में नहीं गुजर सकती हैं। आपस में टकराने का भय रहता है। यदि बड़े वाहन यानी ट्रक और बस आ जाए तो दोनों ओर पुल से पहले वाहनों को रोकना पड़ता है। एक-एक वाहन गुजरता है अथवा बिल्कुल धीमी गति से दोनों वाहन पुल से गुजारे जाते हैं। हाईवे बनाते समय पुल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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1950 में नदी में आए पानी में बह गया था लकड़ी का पुल
गांव अकरौली निवासी 84 वर्षीय ठाकुर गज्जू सिंह ने बताया कि करीब सात दशक पहले अरिल नदी में हर समय पानी बहता था। बरसात में बाढ़ की स्थिति रहती थी। 1950 में अरिल नदी में खूब पानी आया था। इसमें अरिल नदी का पुल बह गया था। इसके बाद दिसंबर 1950 में इस पुल निर्माण की नींव रखी गई। निर्माण में तकरीबन चार वर्ष का समय लगा। 1954 में यह पुल बनकर तैयार हुआ।
हाईवे पर बना दिए स्पीड ब्रेकर
चंदौसी। मुरादाबाद-आगरा हाईवे मानकों की दृष्टि से एक भी शर्त को पूरा नहीं करता है। चंदौसी से मुरादाबाद के बीच इस हाईवे पर दो गांव में चार स्थानों पर बड़े स्पीड ब्रेकर लगे हैं, जो हाईवे की शर्त में शामिल नहीं हैं। स्पीड ब्रेकर रात के समय हादसों का एक बड़ा कारण भी बन सकते हैं।