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हत्यारोपी सपा नेत्री ने अदालत में किया आत्मसमर्पण
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Sat, 29 Apr 2017 01:08 AM IST
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अदालत
- फोटो : file
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विश्व हिन्दू महासंघ के कार्यकर्ता विनीकेत की हत्या में फरार चल रही सपा नेत्री व जिला पंचायत सदस्य ऊषा रानी ने शुक्रवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने सपा नेत्री की जमानत निरस्त करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस मामले में सपा नेत्री के पति समेत पांच हत्यारोपी पहले से ही जिला जेल में बंद हैं।
संभल जनपद के असमोली थानाक्षेत्र के मढ़न गांव निवासी मोनू कुमार पुत्र शिव लाल विश्व हिन्दू महासंघ के संभल के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष हैं। जबकि उनका छोटा भाई विनीकेत उर्फ नन्हें भी महासंघ में कार्यकर्ता था। योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने की खुशी में 26 मार्च 2017 की रात गांव में मोनू और उसका भाई विनीकेत सीएम योगी के नारे लगा रहे थे।
जिससे खफा होकर जिला पंचायत सदस्य ऊषा रानी के पति मास्टर शिशुपाल सिंह और उसके भाइयों ने विनीकेत को गोली मार दी थी। इलाज के दौरान विनीकेत की मौत हो गई थी। इस मामले में शिवलाल ने सपा नेत्री, उसके पति शिशुपाल, समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था।
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पांच आरोपियों को पुलिस ने जेल भेज दिया था, लेकिन जिला पंचायत सदस्य ऊषा रानी फरार चल रहीं थी। पुलिस तलाश में दबिश दे रही थी। लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पा रहीं थी। शुक्रवार को ऊषा रानी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रण विजय सिंह की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
अभियोजन अधिकारी नागेंद्र गोस्वामी और रूद्रेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि ऊषा रानी की जमानत निरस्त कर दी गई है। जहां से महिला को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
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संभल जनपद के असमोली थानाक्षेत्र के मढ़न गांव निवासी मोनू कुमार पुत्र शिव लाल विश्व हिन्दू महासंघ के संभल के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष हैं। जबकि उनका छोटा भाई विनीकेत उर्फ नन्हें भी महासंघ में कार्यकर्ता था। योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने की खुशी में 26 मार्च 2017 की रात गांव में मोनू और उसका भाई विनीकेत सीएम योगी के नारे लगा रहे थे।
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जिससे खफा होकर जिला पंचायत सदस्य ऊषा रानी के पति मास्टर शिशुपाल सिंह और उसके भाइयों ने विनीकेत को गोली मार दी थी। इलाज के दौरान विनीकेत की मौत हो गई थी। इस मामले में शिवलाल ने सपा नेत्री, उसके पति शिशुपाल, समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था।
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पांच आरोपियों को पुलिस ने जेल भेज दिया था, लेकिन जिला पंचायत सदस्य ऊषा रानी फरार चल रहीं थी। पुलिस तलाश में दबिश दे रही थी। लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पा रहीं थी। शुक्रवार को ऊषा रानी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रण विजय सिंह की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
अभियोजन अधिकारी नागेंद्र गोस्वामी और रूद्रेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि ऊषा रानी की जमानत निरस्त कर दी गई है। जहां से महिला को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।