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धर्मगुरु का काम नफरत फैलाना नहीं : यतींद्र सागर
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Sun, 08 May 2016 01:47 AM IST
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। जैन धर्म के आचार्य 1008 यतींद्र सागर ने कहा कि सारा संसार हमारा है, हम किसी से बैर नहीं मानते। जीव रक्षा एवं मानव के कल्याण हमारे धर्म का आधार है। सभी को उसका अनुसरण करना चाहिए।
वह शनिवार को छछैरा गांव स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवधारी का दूध पीने वाला हमारा भाई है, मगर मां का खून पीने वालों को हम उस श्रेणी में नहीं रख सकते।
उन्होंने कहा कि हम किसी मजहब को मिटाने नहीं आए हैं। सभी को साथ लेकर चलना हमारी संस्कृति है। हिंदू दर्शन कहता है कि रघुवीर हमारे इष्ट हैं। सिख धर्म में रणधीर को पूज्य माना गया है। मुस्लिम अपने पैगंबर को मानते हैं। अहिंसा के पुजारी कहते हैं कि भगवान महावीर ही हमारे सब कुछ हैं। जबकि किसी भी धर्म के गुरु का काम धर्मानुसार कुशल उपदेश देना होता है, न कि नफरत फैलाना।
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वह शनिवार को छछैरा गांव स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवधारी का दूध पीने वाला हमारा भाई है, मगर मां का खून पीने वालों को हम उस श्रेणी में नहीं रख सकते।
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उन्होंने कहा कि हम किसी मजहब को मिटाने नहीं आए हैं। सभी को साथ लेकर चलना हमारी संस्कृति है। हिंदू दर्शन कहता है कि रघुवीर हमारे इष्ट हैं। सिख धर्म में रणधीर को पूज्य माना गया है। मुस्लिम अपने पैगंबर को मानते हैं। अहिंसा के पुजारी कहते हैं कि भगवान महावीर ही हमारे सब कुछ हैं। जबकि किसी भी धर्म के गुरु का काम धर्मानुसार कुशल उपदेश देना होता है, न कि नफरत फैलाना।
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